एक समय राहुल गांधी और तेजस्वी यादव में अच्छे संबंध थे। राहुल गांधी उनको खान मार्केट में अपनी पसंद के रेस्तरां में खाना खिलाने भी ले गए थे। एक दिन वे लालू प्रसाद से मिलने भी गए थे, जहां लालू ने उनको मटन बनान सिखाया था। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के समय दोनों के संबंधों में बहुत दूरी आ गई। राहुल गांधी ने अपने एक करीबी कृष्णा अल्लावरू को बिहार का प्रभारी बना कर भेजा। यह नहीं पता है कि उनको दिल्ली से किसने यह निर्देश दिया था कि लालू परिवार से नहीं मिलना है। अल्लावरू पटना पहुंचे तो वे लालू प्रसाद से मिलने नहीं गए, जबकि यह अघोषित नियम था कि कांग्रेस का जो प्रभारी बनेगा वह पटना यात्रा के दौरान लालू प्रसाद से मिलेगा।
अल्लावरू नहीं मिले तो उसके बाद दूरी बढ़ती गई। बाद में तो विवाद इतना हो गया कि सीट बंटवारा करने के लिए कांग्रेस को अलग से अशोक गहलोत को भेजना पड़ा। फिर भी दोनों पार्टियां खूब लड़ीं और नौ सीटों पर दोस्ताना लड़ाई हुई। गठबंधन में होकर भी दोनों ने एक दूसरे को हराया। अब खुद सोनिया गांधी दिल्ली में लालू प्रसाद से मिलने गईं। लालू प्रसाद की सांसद बेटी मीसा भारती के आवास पर यह मुलाकात हुई। तेजस्वी यादव भी मौजूद थे। हालांकि वहां न मीसा थीं और न राहुल गए थे। तभी सवाल है कि लालू प्रसाद के साथ सोनिया गांधी ने अपनी निजी बॉन्डिंग दिखाई है उसका क्या लाभ होगा? क्या उत्तर प्रदेश के लिए यह मैसेज है या बिहार में राजद और कांग्रेस या यूं कहें कि तेजस्वी और राहुल नजदीक आएंगे? ध्यान रहे बिहार में लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य राजद व प्रशांत किशोर के जनसुराज के तालमेल की बात कर रही हैं तो राहुल के करीबी नेता कांग्रेस और जनसुराज गठबंधन की चर्चा कर रहे हैं।
