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सत्र के बाद विपक्ष की बैठक

कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां इस बात पर विचार कर रही हैं कि संसद की कार्यवाही के दौरान जो एकजुटता बनती है उसको राजनीतिक एकता में कैसे बदला जाएगा। इसके लिए संसद का बजट सत्र समाप्त होने के बाद विपक्षी पार्टियों की बैठक होगी। तय कार्यक्रम के मुताबिक बजट सत्र छह अप्रैल तक है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि सत्र का समापन उससे पहले हो जाएगा। बताया जा रहा है कि सत्र खत्म होने के बाद विपक्षी पार्टियां मिलेंगी, उसमें मुश्किल यह है कि कर्नाटक के विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के नेता अप्रैल के महीने में चुनाव में व्यस्त हो जाएंगे। अगर अप्रैल में समय नहीं निकलता है तो मई में बैठक होगी।

विपक्षी पार्टियों की यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है कि क्योंकि इससे पहले संसद के हर सत्र में विपक्षी पार्टियां एक रही हैं लेकिन सत्र समाप्त होने के सब आपस में लड़ने लगती हैं। पिछले साल अक्टूबर में मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद संसद सत्र में विपक्ष की ज्यादा एकता दिखी है। शीतकालीन सत्र में और बजट सत्र के पहले चरण में विपक्षी पार्टियों ने एक साथ मिल कर सरकार को घेरा और उसके ऊपर दबाव बनाए रखा। लेकिन सत्र खत्म होने के बाद सबकी अपनी अपनी राजनीति शुरू हो गई। बजट सत्र के पहले चरण में एकजुट रहा विपक्ष फरवरी के अंत में हुए पूर्वोत्तर के विधानसभा चुनावों में एक दूसरे से लड़ने पहुंच गया था।

तभी इस बार विपक्षी पार्टियों ने तय किया है कि संसद सत्र की एकजुटता को संसद के बाहर भी कायम रखना है और उसे राजनीतिक व चुनावी तालमेल में कन्वर्ट करना है। यह आसान काम नहीं है लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जब से विपक्षी पार्टियों के साथ तालमेल का जिम्मा संभाला है तब से पार्टियों के बीच सद्भाव बढ़ा है। सोनिया और राहुल गांधी तक सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं का पहुंचना मुश्किल था। लेकिन खड़गे आसानी से उपलब्ध हैं। वे लगातार विपक्षी पार्टियों के साथ बैठक कर रहे हैं। संसद में अपने चैंबर से लेकर आवास तक पर वे नेताओं से मिलते रहते हैं।

बजट सत्र के दौरान वे रोज कई बार विपक्षी नेताओं से मिल रहे हैं। इसी दौरान यह तय हुआ कि सत्र के बाद सभी विपक्षी पार्टियों के अध्यक्ष और महत्वपूर्ण नेताओं की एक बैठक हो। सभी पार्टियां इस पर राजी हैं। कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि 18 पार्टियों की बैठक में फैसला हुआ और चार को छोड़ कर बाकी पार्टियों का बैठक में शामिल होना तय है। चार पार्टियों में- तृणमूल कांग्रेस, भारत राष्ट्र समिति, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी शामिल हैं। इन चार पार्टियों को संभालना चुनौती की तरह है। लेकिन खड़गे की वजह से कांग्रेस के नेता भरोसे में हैं कि बैठक होगी।

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