कांग्रेस हो सकेगी कोरोना मुक्त?

नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च का जनता कर्फ्यू का जब आह्वान किया था तो सारा देश शाम 5 बजे इस संकट की घड़ी ने जनता की सेवा करने वालों का आभार करने के लिए तालियाँ, थालियाँ और घंटियां शंख बजा रहा था। शरद पवार मुम्बई में, नवीन पटनायक भुवनेश्वर में , केसीआर और जगनमोहन रेड्डी हैदराबाद में इस हवन में शामिल थे। सिर्फ सोनिया गांधी और राहुल गांधी कहीं दिखाई नहीं दिए। हालांकि खुद राहुल गांधी में फरवरी मध्य में देश को इस खतरे से आगाह किया था। उन्हें तब तक यह नहीं पता था कि कोरोना वायरस उन की एक राज्य सरकार निगल लेगा। कोरोना वायरस छूआछूट की बीमारी है और सब जानते हैं कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के खेमे हमेशा से छूआछूत से ग्रस्त रहे हैं। तब यह समझ आ रहा था कि दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य के बीच राज्यसभा की सुरक्षित सीट के लिए जंग चल रही है। राज्यसभा की तीन सीटें खाली हुई है , रिटायर होने वालों में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह खुद और भाजपा के सत्य नारायण जटिया व प्रभात झा हैं। जीतने के लिए हर उम्मीदवार को 58 विधायकों का समर्थन चाहिए था , कांग्रेस के अपने 114 विधायक थे , यानी कांग्रेस… Continue reading कांग्रेस हो सकेगी कोरोना मुक्त?

सांसदी-विधायकी से इस्तीफे की राजनीति

अप्रैल में रिटायर होने वाले 55 राज्यसभा सदस्यों में से15 भाजपा के और 13 कांग्रेस के हैं| दोनों को तीन-चार सीटों का नुक्सान होगा ,जबकि तृणमूल कांग्रेस और वाईआरएस कांग्रेस की सीटें बढ़ेंगी। कांग्रेस को असम, आंध्र ,तेलंगाना , उड़ीसा , मेघालय , हिमाचल से आठ सीटों का नुक्सान है , जिस की भरपाई इन राज्यों से नहीं हो सकती।  कांग्रेस को उम्मींद थी कि राजस्थान से -2, गुजरात से-1 और मध्य प्रदेश से भी 1 सीट ज्यादा मिलने के कारण 4 सीटों की भरपाई हो जाएगी। इस तरह उसके सिर्फ 4 सदस्य घटेंगे , मौजूदा 46 से घट कर 42 हो जाएंगे।  लेकिन मध्य प्रदेश और गुजरात ने राज्यसभा के चुनाव दिलचस्प बना दिए हैं| संख्या बल के हिसाब से इन दोनों राज्यों से कांग्रेस को एक एक रिटायर होने वाले सदस्यों के बदले दो-दो सीटों पर जीत होनी चाहिए थी। कर्नाटक की तरह ही भाजपा ने मध्यप्रदेश और गुजरात के कांग्रेस विधायकों से भी इस्तीफे दिला कर अपनी सदस्य संख्या बरकरार रखने की कोशिश को सफल बना लिया है। मध्यप्रदेश से भाजपा के दो सदस्य रिटायर हो रहे हैं और भाजपा की कोशिश है कि वह दोनों सीटें दुबारा जीत कर आए जबकि कांग्रेस अपने एक सदस्य के… Continue reading सांसदी-विधायकी से इस्तीफे की राजनीति

दादी की पार्टी में शामिल पोता

सिंधिया परिवार का राजनीतिक सफर 1957 में कांग्रेस से ही शुरू हुआ था, जब जवाहर लाल नेहरू ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयाराजे सिंधिया को गुना-शिवपुरी से लोकसभा टिकट दिया था। नेहरू के जमाने में राजमाता 1957 और 1962 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस टिकट पर ही जीती थीं। नेहरू की मौत के बाद जब 1967 आते-आते कांग्रेस की बागडौर इंदिरा गांधी के हाथ में आई थी, तो विजया राजे ने कांग्रेस छोड़ कर 1967 का लोकसभा चुनाव स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर जीता। लेकिन उनके गृह राज्य मध्य प्रदेश में जनसंघ बड़े दल के रूप में उभरा था इसलिए राजमाता विजया राजे ने स्वतंत्र पार्टी छोड़ जनसंघ ज्वाईन कर ली और कांग्रेस के 36 विधायक तोड़ कर डी.पी.मिश्रा सरकार गिरा दी। अब अपनी दादी की पार्टी भाजपा में शामिंल हो कर उनका पोता कांग्रेस के 22 विधायक तोड़ कर कमल नाथ की सरकार गिराने जा रहा है। विजया राजे सिंधिया का बेटा और ज्योतिरादित्या के पिता माधव राव सिंधिया ने भी अपना पहला 1971 का चुनाव जनसंघ के टिकट पर जीता था। इंदिरा गांधी ने जब 1975 में आपातकाल लगाया तो विजया राजे सिंधिया को गिरफ्तार कर लिया गया था, माधव राव सिंधिया अपने ससुराल नेपाल में अंदर ग्राऊंड हो… Continue reading दादी की पार्टी में शामिल पोता

दादागिरी वाली भाषा और सदन की गरिमा

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने जो कहा, वह किया। उन्होंने सदन में कहा था कि अगर कोई भी सदस्य अपने बेंचों की सीमा लांघ कर सामने वाले पक्ष के बेंचों की ओर जाएगा तो वह उसे सत्र की शेष अवधि के लिए निलम्बित करेंगे।

खुद का भंडा फोड़ रही यूएनएचआरसी

यूएनएचआरसी यानी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद या तो भारत के अपने वामपंथी मित्रों और उनके झोलाछाप गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के बहुत ज्यादा प्रभाव में है या फिर पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रही है। उसने भारत की सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन क़ानून की संवैधानिक वैधता पर दायर मुकद्दमे में खुद को पार्टी बनाने की याचिका दाखिल करने का फैसला किया है। अगर वह अपने भारतीय वामपंथी एनजीओ के सलाहाकारों की सलाह पर यह कदम उठा रहा है, तो वह भारी गलती कर रहा है क्योंकि उसके गुजरात के संबंध में लगाए गए सारे आरोप भी गलत साबित हुए थे। इन्हीं संगठनों की अंतर्राष्ट्रीय साजिश के चलते ब्रिटेन, अमेरिका और कई यूरोपियन देशों ने नरेंद्र मोदी पर धार्मिक उत्पीड़न और मानवाधिकार उलंघन का आरोप लगाते हुए उनकी यात्राओं पर रोक लगा दी थी। मार्च 2005 में जब मोदी को एशियन-अमेरिकन होटल मालिकों की एसोसिएशन ने अपने कार्यक्रम में आमंत्रित किया था तो अमेरिका ने उन्हें कूटनीतिक वीजा देने से इनकार कर दिया था और पर्यटक वीजा भी रद्द कर दिया था। अंगना चटर्जी नाम की वामपंथी ने 125 वामपंथी बुद्धिजीवियों के दस्तखत करवा कर मोदी को वीजा नहीं देने की याचिका लगाई थी। ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन को… Continue reading खुद का भंडा फोड़ रही यूएनएचआरसी

दंगों पर बहस के लिए संसद में दंगा

पांच साल की वाह-वाही के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार गम्भीर मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। जैसे ही वह भाजपा के कोर मुद्दों पर आए हैं 2002 से 2014 वाली नफरत की राजनीति फिर शूरू हो गई है।

कपिल मिश्रा और ताहिर हुसैन

दिल्ली में कपिल मिश्रा हिन्दुओं के और ताहिर हुसैन मुसलमानों का चेहरा बन गए हैं। भाजपा कह रही है कि हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा के पीछे आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन का हाथ है , जिस के घर में पत्थरों, इटों और तेज़ाब का जाखीरा पकड़ा गया है। आई बी अफसर अंकित शर्मा के घर वालों ने आरोप लगाया है कि हत्या ताहिर हुसैन ने की थी। अंकित शर्मा का शव ताहिर हुसैन के घर के साथ ही गंदे नाले में मिला था| सोशल मीडिया पर एक वीडियो चल रहा है जिसमें उस नाले और ताहिर हुसैन के घर और फेक्ट्री की छत को दिखाया जा रहा है। छत पर ताहिर हुसैन खुद डंडा ले कर खड़ा है| ताहिर हुसैन ने कबूल कर लिया है कि वीडियो में दिख रहा आदमी वही है ,लेकिन उस ने सफाई दी है कि कुछ लोग उस की फेक्ट्री की छत पर चढ़ गए थे , जिन्हें वहां से निकालने के लिए वह छत पर गए थे। ताहिर हुसैन की फेक्ट्री और छत पर पत्थर–ईंट और तेज़ाब पकड़े जाने के बाद उन की फेक्ट्री को सील कर दिया गया है। आम आदमी पार्टी ताहिर के बचाव में आ गई है। सौरभ भारद्वाज… Continue reading कपिल मिश्रा और ताहिर हुसैन

जाफराबाद मुस्लिम-दलित गठजोड़ का खतरा

शाहीन बाग़ में हो रहे धरने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा था , यह प्रदर्शन एक संयोग नहीं , एक प्रयोग है। कर्नाटक , महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश में हू-ब-हू शाहीन बाग़ दोहराया गया और रविवार को दिल्ली में ही जाफराबाद और चाँद बाग़ दोहराया गया। असदुद्दीन ओवेसी ने कहा था कि अगर पुलिस ने जबरदस्ती की तो शाहीन बाग़ जलियांवाला बाग़ बनेगा। औरतों और बच्चों को आगे कर के मुस्लिम कट्टरपंथियों की रणनीति शाहीन बाग़ को जलियांवाला बाग़ बनवाने की थी। शाहीन बाग़ की तरह अब चाँद बाग़ को चुना गया है , जाफराबाद भी दिल्ली का मुस्लिम बहुल इलाका है। शाहीन बाग़ का यह प्रयोग इस लिए आगे बढ़ रहा है क्योंकि सुप्रीमकोर्ट कोई साफ़ निर्देश नहीं दे रही।कोर्ट ने संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को उन्हें जगह बदलने के लिए मनाने का जिम्मा सौंपा था , लेकिन वे धरने पर जा कर उन की होंसला अफजाई कर आए। अपने आप मध्यस्थता के लिए तैनात वजाहद हबीबुल्लाह ने तो कोर्ट को कह ही दिया कि धरना देने वालों ने रास्ता नहीं रोका , रास्ता पुलिस ने रोका हुआ है। वह खुद पश्चिमी उतर प्रदेश में दलित नेता चन्द्र शेखर आज़ाद के साथ याचिकाकर्ता हैं। भीम आर्मी के… Continue reading जाफराबाद मुस्लिम-दलित गठजोड़ का खतरा

दादियों-नानियों के कान कौन भर रहा?

शाहीन बाग़ में बैठे प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीमकोर्ट की ओर से भेजे गए वार्ताकारों साधना रामचंद्रन और संजय हेगड़े के सामने भी महिलाओं को आगे कर दियाऔर वे नागरिकता संशोधन क़ानून वापस लेने तक एक ईंच भी नहीं हटने पर अड़ी रहीं। नतीजा नहीं निकलना था और नहीं निकला। वार्ता अभी और चार दिन जारी रहेगी| देश की सहानुभूति हासिल करने के लिए अम्माओं, दादियों , नानियों वाला लेफ्ट का नरेटिव चला हुआ है। वार्ता कर के बाहर निकली साधना रामचंद्रन ने भी दादियों शब्द का इस्तेमाल किया। अनपढ़ बूढ़ी औरतों को सामने रख कर संविधान की लड़ाई लडी जा रही है तो देशवासी इस का मतलब समझ सकते हैं। यह बात खुल रही है कि वामपंथी एनजीओ धरने को गाईड कर रहे हैं। मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही विदेशी चंदे के दुरूपयोग की जांच शुरू करवा दी थी और चंदा हासिल करने के नियम सख्त बना दिए थे। तब से ये सारे एनजीओ कोई न कोई बलवा करते रहते हैं। सुप्रीमकोर्ट ने साधना रामचंद्रन और संजय हेगड़े को धरने का स्थान बदलने के लिए राजी करने का जिम्मा सौंपा था। लेकिन बुधवार को जब दोनों शाहीन बाग़ पहुंचने वाले थे तो उस से ठीक पहले तीस्ता सीतलवाड दादियों-नानियों के कान… Continue reading दादियों-नानियों के कान कौन भर रहा?

सुप्रीम कोर्ट के रूख से धरने का क्या होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों साफ़ साफ़ कह चुके हैं कि न 370 वापिस बहाल होगी, न ट्रिपल तलाक बहाल होगा और न सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून से पीछे हटेगी।

नवीन पटनायक के रास्ते पर केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर के तिकडमी राजनीति के झंडे गाड  दिए हैं| जो लोग समझते थे कि अन्ना हजारे के आन्दोलन से उठा बुलबुला है , झाग की तरह बैठ जाएगा , उनका आकलन गलत साबित हुआ। अलबत्ता केजरीवाल को आँखे दिखाने वाले प्रशांत भूषण , योगेन्द्र यादव , मयंक गांधी , प्रो.आनन्द कुमार झाग की तरह बैठ गए। केजरीवाल ने लोकपाल बनाने का अन्ना हजारे का सपना चकनाचूर कर दिया>बहुतेरे लोगों ने अन्ना हजारे के कान भर कर केजरीवाल के खिलाफ बयान भी दिलवाए ,पर अन्ना हजारे का विरोध भी केजरीवाल का कुछ नहीं बिगाड़ सका। भाजपा से ज्यादा झटका तो कुमार विशवास को लगा है , जो यह समझ रहे थे कि केजरीवाल 2015 में उनके चुनाव प्रचार के कारण जीते थे। वह तो यह भी कह रहे थे कि केजरीवाल ने क्योंकि उन्हें पंजाब में चुनाव प्रचार के लिए नहीं भेजा , इसलिए आम आदमी पार्टी वहां चुनाव हार गई। कुमार विशवास के साथ आशुतोष को भी झटका लगा होगा। किरन बेदी तो खैर अरुण जेटली के माध्यम से भाजपा में शामिल हो कर उपराज्यपाल बन गई , लेकिन शाजिया ईल्मी , विनोद कुमार बिन्नी और कपिल मिश्रा के सितारे… Continue reading नवीन पटनायक के रास्ते पर केजरीवाल

वन मैन आर्मी ने मचाई सभी दलों में खलबली

राजनीतिक दल अपराधियों को टिकट देने और पदाधिकारी बनाने से बाज नहीं आ रहे। 2004 में 24 प्रतिशत सांसदों की पृष्ठभूमि आपराधिक थी, 2009 में ऐसे सांसदों की संख्या बढ़कर 30 प्रतिशत, 2014 में 34 प्रतिशत और मौजूदा लोकसभा में 43 पर्सेंट सांसदों के खिलाफ गम्भीर अपराध के मामले लंबित हैं। इस पर न तो कोई राजनीतिक दल गम्भीर है, न सरकार। चुनाव आयोग सिफारिशे करके थक गया, अदालत क़ानून बनाने का निर्देश दे कर थक गईं। लेकिन एक शख्स है जो राजनीति और समाज में शुद्धिकरण के लिए लगातार लड़ रहा है। वह है दिल्ली प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय। जो सुप्रीमकोर्ट में दर्जनों पीआईएल याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं। चुनाव सुधारों से जुड़ी उनकी कुछ प्रमुख याचिकाओं की बानगी देखिये। सजायाफ्ता व्यक्तियों को ताउम्र चुनाव लड़ने पर पाबंदी, सजायाफ्ता व्यक्तियों पर राजनीतिक दल बनाने पर पाबंदी, सजा याफ्ता को राजनीतिक दल का पदाधिकारी बनाए जाने पर पाबंदी। चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शिक्षा और अधिकतम आयु तय किया जाना। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कोलिजिय्म के माध्यम से किया जाना। एक साथ एक से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाना। चुनाव आयोग का स्वतंत्र सचिवालय बनाया जाना। डाक घरों को वोट रजिस्टर्ड करने की नोडल… Continue reading वन मैन आर्मी ने मचाई सभी दलों में खलबली

अब निगाह बिहार और नीतीश पर

भाजपा विरोधियों में एक बात तो है, अगर वे खुद हार जाएं पर भाजपा न जीते, तब भी वे ताली बजाने लगते हैं। बेगाने की शादी में अब्दुल्ला दीवाना।

बाल संरक्षण इकाईयों को भी तलब करे सुप्रीमकोर्ट

सुप्रीमकोर्ट को राजनीति करने की जरूरत नहीं थी। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सुप्रीमकोर्ट ने यह कह कर शाहीन बाग़ के धरने पर टिप्पणी नहीं की थी कि वह क्यों राजनीति में शामिल होलेकिन शाहीन बाग़ में जिस तरह बच्चों का इस्तेमाल किया गया

यह गांधी-गोडसे नहीं, गांधी-सुभाष है

आज़ादी के बाद से एकतरफ़ा इतिहास पढाया जाता रहा। हालांकि शुरू में जनमत के दबाव में स्कूली पाठ्यक्रम की किताबो में सुभाष चन्द्र बोस, भगत सिंह, राज गुरु, सुखदेव, चन्द्रशेखर आज़ाद जैसे लोकप्रिय क्रान्तिकारियों का गांधी के बराबर ही जिक्र होता था। इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में  गैंदा लाल दीक्षित , राम प्रशाद बिस्मिल, रास बिहारी बोस, शचीन्द्र नाथ सन्याल , सन्यासी विद्रोह, सन्याल विद्रोह, कूका विद्रोह का विस्तार से उल्लेख होता था। 1857 के रणनीतिकार तात्या टोपे और मंगल पाण्डेय सहित 84 क्रांतिकारियों का भी जिक्र होता था| यहाँ तक कि वीर सावरकर भी पाठ्य पुस्तकों में शामिल थे, लेकिन धीरे धीरे क्रांतिकारियों की भूमिका को पाठ्य पुस्तकों से निकाल दिया गया। इंदिरा गांधी की सोवियत संघ से दोस्ती के बाद इतिहास लिखने का काम वामपंथी इतिहासकारों को दे दिया गया। वामपंथी इतिहासकारों को मान्यता देने और उन के लिखे इतिहास को पढाने और प्रचारित करने के मूक आदेश दे दिए गए। जेएनयू की स्थापना की गई ताकि वामपंथी अपनी मनमर्जी से लिखे इतिहास को ही सच बताने की मशीन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके। आज़ादी की लड़ाई में सुभाष चन्द्र बोस और वीर सावरकर की भूमिका गांधी के बाराबर या ज्यादा थी , लेकिन इन दोनों… Continue reading यह गांधी-गोडसे नहीं, गांधी-सुभाष है

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