ट्रंप चले जाएंगे पर ट्रंपवाद रहेगा!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदाई हो गई है। अमेरिकी जनता ने उनके ब्रांड की राजनीति को खारिज कर दिया है। सोचें, पूरी एक सदी में वे सिर्फ तीसरे राष्ट्रपति हैं, जिन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं मिला है। सदी में सबसे ज्यादा मतदान के जरिए अमेरिका के लोगों ने उनको हराया है। लेकिन उनका हारना भी मामूली नहीं है। वे सात करोड़ से ज्यादा वोट लेकर हारे हैं। अमेरिका के इतिहास में किसी जीते हुए राष्ट्रपति को कभी सात करोड़ वोट नहीं मिले। इस बार रिकार्ड संख्या में वोटिंग हुई, जो बाइडेन रिकार्ड संख्या में वोट लेकर जीते हैं तो डोनाल्ड ट्रंप रिकार्ड संख्या में वोट लेकर हारे हैं। अमेरिका के सात करोड़ से ज्यादा लोगों ने उनमें भरोसा जताया। रिपब्लिकन पार्टी के असर वाले लगभग सारे राज्यों में ट्रंप जीते। इतना ही नहीं, जिन बैटलग्राउंड या स्विंग स्टेट्स में ट्रंप हारे हैं वहां भी बराबरी की लड़ाई हुई है। मिसाल के तौर पर पेन्सिलवेनिया को देख सकते हैं। करीब 70 लाख लोगों ने वहां वोट किए थे और बाइडेन महज 42 हजार वोट से जीते। आधे से एक फीसदी के फर्क से वे कई राज्यों में आगे रहे। जाहिर है यह मुकाबला बराबरी का ही था। तभी यह कहना… Continue reading ट्रंप चले जाएंगे पर ट्रंपवाद रहेगा!

ज्वालामुखी पर बैठा है यूरोप!

समूचा यूरोप इस समय उबल रहा है। फ्रांस में दो लगातार आतंकवादी हमले के बाद ऑस्ट्रिया में आतंकवादी हमला हुआ है। फ्रांस में पहले भी हमले हो चुके हैं और स्पेन, ब्रिटेन भी आतंकी हमले का निशाना बने हैं।

चुनाव आयोग के पास अधिकार क्या?

केंद्रीय चुनाव आयोग, सुनने में इतना भारी-भरकम नाम है पर सवाल है कि इसके पास क्या अधिकार हैं? यह एक संवैधानिक संस्था है। इसके ऊपर देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की महती जिम्मेदारी है।

फ्रांस से फरीदाबाद तक एक सी कहानी!

फ्रांस में एक कट्टरपंथी मुस्लिम युवक ने एक स्कूल शिक्षक की गला काट कर हत्या कर दी। स्कूल शिक्षक का दोष यह था कि उसने क्लासरूम में बच्चों को पैगबंर मोहम्मद का एक कार्टून दिखाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी छात्र को यह पसंद नहीं है तो वह क्लास से बाहर चला जाए।

कृषि कानूनों पर सरकार पीछे नहीं हटेगी

बिहार में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं और माना जा रहा था कि तीन कृषि कानूनों का मुद्दा बिहार चुनाव उठेगा और चुनाव एक तरह से उन कानूनों पर जनमत संग्रह की तरह होगा। लेकिन अफसोस की बात है कि बिहार में कृषि कानूनों को मुद्दा नहीं बनाया गया है।

कश्मीर में सरकार आखिर चाहती क्या है?

जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार आखिर क्या करना चाहती है? वहां राष्ट्रपति शासन लगे हुए डेढ़ साल हो गए है और राज्य का विशेष दर्जा खत्म हुए भी एक साल से ज्यादा हो गया है।

अर्थव्यवस्था कितना पीछे जाएगी?

बहस हो रही है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी गिरेगी? पहली तिमाही में 24 फीसदी गिरावट रही। दूसरी तिमाही में भी 14 फीसदी तक गिरावट का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि चालू वित्त वर्ष यानी 2020-21 में देश की अर्थव्यवस्था में साढ़े नौ फीसदी की गिरावट रहेगी।

जीएसटी पर केंद्र की मजबूरी

वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी के मुआवजे की भरपाई को लेकर केंद्र सरकार जैसे तेवर दिखा रही थी वह तेवर कौंसिल की पिछली बैठक में नहीं दिखी। सोमवार को हुई कौंसिल की बैठक में सरकार का रुख नरम रहा

किसान आंदोलन कहां तक पहुंचेगा?

केंद्र सरकार तीन विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ देश के कई हिस्सों में चल रहे किसान आंदोलनों को लेकर चिंता में है। तभी प्रधानमंत्री लगभग रोज इस बारे में बोल रहे हैं।

राज्यसभा में बनी खराब मिसाल

इन दिनों देश में जिस तरह का राजकाज चल रहा है, संसदीय परंपराओं की जिस तरह से अनदेखी की जा रही है, राजनीतिक फायदे के लिए नियमों-कानूनों का जैसा इस्तेमाल हो रहा है और संवैधानिक संस्थाओं से जैसे मनमाने तरीके से काम लिया जा रहा है उसे देखते हुए किसी भी बात पर हैरानी नहीं होनी चाहिए।

सुधार के नाम पर संकट को न्योता

जैसे इस सरकार के सारे सुधारों के साथ हुआ है वैसा ही आगे होने जा रहे नए सुधारों के साथ भी होगा। सुधार के नाम पर किए गए लगभग सारे क्रांतिकारी काम अंततः नए संकटों का कारण बने।

गरीबों के लिए सचमुच क्या काम हुआ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के रेहड़ी-पटरी वालों से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बात की। इसको स्वनिधि संवाद का नाम दिया गया है। नाम से ही जाहिर है कि यह स्वरोजगार से जुड़ा हुआ मामला है।

आंतरिक लोकतंत्र जैसी कोई चीज नहीं होती

आंतरिक लोकतंत्र किस चिड़िया का नाम है? भारत की राजनीति में ऐसी कोई चीज नहीं होती है! भारत में लोकतंत्र है, जो राजनीति से संचालित होती है पर राजनीति में या राजनीतिक पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र जैसी कोई चीज नहीं होती है।

पड़ोसी देशों से संबंध सुधार की पहल

भारत की विदेश नीति शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की नीति पर आधारित रही है। हालांकि यह अलग बात है कि पिछले कुछ बरसों में न शांति दिख रही है और न सहअस्तित्व का कहीं अता-पता है।

क्षेत्रवाद की नई होड़ शुरू होगी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार ऐसा कानून लाने जा रही है, जिसके जरिए राज्य की सरकारी नौकरियां मध्य प्रदेश के युवाओं को ही मिलेंगी। इस तरह की घोषणा करने वाला मध्य प्रदेश देश का संभवतः पहला राज्य बन गया है।

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