‘सारे घर के बदलने’ के प्रयोग पर अटकलें….?

नरेन्द्र भाई मोदी ने जो ‘‘सारे घर के बदलने’’ का नया राजनीतिक प्रयोग किया उसे लेकर राजनीतिक, बुद्धिजीवी तथा अन्य तबकों ने काफी दिलचस्प अटकलों का दौरा जारी हैI

तब कांग्रेस में हार्दिक पटेल का क्या मतलब?

हार्दिक के आंदोलन ने बीजेपी को किसी पटेल को सीएम बनाने के मजबूर किया, तब कांग्रेस में क्या सोच?

व्यवहार की भाषा ही देश की भाषा हो

जातीय अर्थात राष्ट्रीय उत्थान और सुरक्षा के लिये किसी भी देश की भाषा वही होना श्रेयस्कर होता है, जो जाति अर्थात राष्ट्र के कामकाज और व्यवहार की भाषा हो। समाज की बोल-चाल की भाषा का प्रश्न पृथक् है।

श्रीकृष्ण का कोमल, रसिक चित्रण क्यों अधिक?

श्रीकृष्ण का यशोगायन करने के बजाय क्यों अधिकांश साहित्यकारों-कवियों-चिंतकों-कथाकारों ने उनके कोमल एवं रसिक स्वरूप का ही अधिकाधिक चित्रण किया?

एक तरफ बाढ़ तो दूसरी ओर सूखा!

कभी चेन्नई में 200 फुट नीचे पानी मिल जाता था वहीं आज भूजल 2000 फुट पर भी नहीं है। यह एक गम्भीर व भयावह स्थिति है। ये चेतावनी है भारत के बाकी शहरों के लिए कि अगर समय से नहीं जागे तो आने वाले समय में ऐसी दुर्दशा और शहरों की भी हो सकता है

बरसो राम धड़ाके से

आज भारत का हर पहाड़ी पर्यटन केंद्र बेतरतीब, अनियोजित, भौड़े और अवैध शहरीकरण का भद्दा नमूना प्रस्तुत कर रहा है। इस कदर निर्माण हुआ है कि इन शहरों का प्राकृतिक सौंदर्य खत्म हो गया है।

नामवर जी को किस रूप में याद किया

आलोचना की दुनिया में उनकी पुस्तक “छायावाद” ने उन्हें स्थापित किया जो उन्होंने महज 29 साल की उम्र में लिखी थी। आज हिंदी का कोई भी छात्र इतनी कम उम्र में ऐसी किताब नहीं लिख सकता और किसी ने आज तक लिखा भी नहीं।

भरे नहीं है बंटवारे के जख्म

पंजाब और दोनों सीमाओं के आर-पार के लोगों ने बंटवारे के वक्त जो झेला है वो इतना भयावह था कि तब की पीढ़ी के जो लोग अभी भी ज़िंदा हैं वो आज तक उस मंजर को याद कर नींद में घबरा कर जाग जाते हैं और फूट-फूट कर रोने लगते हैं।

तालिबान का यह कौन सा इस्लाम?

‘क़ब्ज़ा किए गए इलाक़ों के सभी इमामों और मुल्लाओं से कहा जा रहा है कि वे 15 से ज़्यादा उम्र की लड़कियों और 45 साल से कम की विधवाओं की सूची बना कर तालिबान को सौंप दें ताकि उनकी शादी तालिबान लड़ाकों ले कराई जा सके।’ हालाकि तालिबान के एक प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने इससे इनकार करते हुए इसे अफ़वाह बताया है।

कांग्रेस मुक्त भारत की बात फालतू

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों में से जब नेतृत्व नहीं मिल पाया तो विपक्षी दलों के स्थापित नेताओं को धन और पद के लालच देकर भाजपा में लिया गया। तो उसकी ये नीति भी कांग्रेस या विपक्ष मुक्त भारत के दावे को कमजोर करती है। क्योंकि इस तरह जो लोग भाजपा में आकर विधायक, सांसद या मंत्री बने, वे संघी मानसिकता के तो न थे, न बन पाएँगे। इस बात का गहरा अफसोस संघ परिवार को भी है।

चित्रकूट में संघ चिंतन और योगी

chitrakoot yogi adityanath : आश्चर्य की बात यह है कि जिस घबराहट में संघ आज सक्रिय हुआ है अगर समय रहते उसने चारों तरफ़ से उठ रही आवाज़ों को सुना होता तो स्थिति इतनी न बिगड़ती। पर ये भी हिंदुओं का दुर्भाग्य है कि जब-जब संघ वालों को सत्ता मिलती है, उनका अहंकार आसमान को छूने लगता है। देश और धर्म की सेवा के नाम फिर जो नौटंकी चलती है उसका पटाक्षेप प्रभु करते हैं और हर मतदाता उसमें अपनी भूमिका निभाता है। लेखक: विनीत नारायण chitrakoot yogi adityanath : उत्तर प्रदेश के चुनाव कैसे जीते जाएं इस पर गहन चिंतन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी अधिकारियों और प्रचारकों का एक सम्मेलन चित्रकूट में हुआ हैं। ऐसे शिविर में हुई कोई भी वार्ता या लिए गए निर्णय इतने गोपनीय रखे जाते हैं कि वे कभी बाहर नहीं आते। मीडिया में जो खबरें छपती हैं वो केवल अनुमान पर आधारित होती हैं, क्योंकि संघ के प्रचारक कभी असली बात बाहर किसी से साझा नहीं करते। इसलिए अटकलें लगाने के बजाए हम अपनी सामान्य बुद्धि से ही इस महत्वपूर्ण शिविर के उद्देश्य, वार्ता के विषय और रणनीति पर अपने विचार बना सकते है। जहां तक उत्तर प्रदेश के आगामी विधान… Continue reading चित्रकूट में संघ चिंतन और योगी

जिन्हें कोरोना ने कहीं का नहीं छोड़ा

COVID crisis children risk | मां और पिता कोरोना से मर गए और दोनों बच्चे अपने चाचा और चाची के पास हैं। 14 जून की रात ओडिशा के कई स्थानीय टीवी चैनलों पर लोगों ने इस सात साल की बच्ची को झूला झुला कर अपने डेढ़ महीने के भाई को सुलाने की कोशिश करते देखा। दिहाड़ी पर काम करने वाले उसके चाचा देबाशीष के लिए अपने परिवार के अलावा दो अतिरिक्त बच्चों को पालना बहुत मुश्किल है। वह चाहता था कि जिला प्रशासन या सरकार उसकी मदद करे।… कोरोना ने देश के कितने घरों की जिंदगियों को इस तरह उलट-पलट कर दिया है।  यह भी पढ़ें: आर्थिकी भी खलास! लेखक: सुशील कुमार सिंह COVID crisis children risk | कृष्णा की उम्र केवल सात साल है। उसकी मां कटक के एक अस्पताल में नर्स थी और पिता भुवनेश्वर में ईस्ट कोस्ट रेलवेज़ के मुख्यालय में काम करता था। अप्रैल के पहले हफ्ते तक कृष्णा के घर में सब ठीक चल रहा था और वह अपनी ऑनलाइन पढ़ाई में व्यस्त थी। मगर अचानक उसकी गर्भवती मां कोरोना की चपेट में आ गई। एक लड़के को जन्म देने के सात दिन बाद मां चल बसी। पिता कमलेश दोनों बच्चों यानी नवजात बेटे और… Continue reading जिन्हें कोरोना ने कहीं का नहीं छोड़ा

लेफ्ट का वोट निगल कर भाजपा बनी विपक्ष

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी पूरी ताक़त झोंकी। इसके बावजूद वो ममता बनर्जी को सत्ता से इंच भर भी डिगा नहीं पाई। उखाड़ फेंकना तो बहुत दूर की बात है। हां, बीजेपी राज्य में मुख्य विपक्षी दल ज़रूर बन गई है। बीजेपी के मुख्य विपक्षी दल बन जाने के बाद ममता बनर्जी की चुनौतियां बेतहाशा बढ़ जांएगी। ममता से चोट खाई बीजेपी उन्हें अगले पांच साल आराम से सरकार नहीं चलाने देगी। ममता को परेशान करने लायक ताक़त बीजेपी ने चुनानों में मिले वोटों से बटोर ली है। ममता बनर्जी ने गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की ललकार, ‘अबकी बार, बीजेपी 200 पार’ को ‘फिर एक बार, टीएमसी 200 पार’ में बदल कर दुनिया को बंगाल का जादू दिखा दिया।  बीजेपी ममता के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की 100 सीटे जीतने की चुनौती भी पार नहीं कर पाई। ममता नंदीग्राम का संग्राम भले ही राह गईं हों लेकिन उन्होने दिखा दिया कि बेहतर रणनीति और लगातार संघर्ष करके चुनाव कैसे जीता जाता है। ममता ने अपने अकेले दम पर पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और मोदी सरकार केस मंत्रियों और बीजेपी के तमाम मुख्यमंत्रियों की फौज का अकेले अपने… Continue reading लेफ्ट का वोट निगल कर भाजपा बनी विपक्ष

देश के हाई कोर्ट्स को सलाम

देश की उच्च न्यायपालिका में लोगों के कम होते भरोसे की मजबूत होती धारणा के बीच देश की उच्च अदालतों ने रोशनी की किरण दिखाई है। दिल्ली से लेकर मद्रास हाई कोर्ट और इलाहाबाद से लेकर गुजरात हाई कोर्ट तक ने कमाल किया है। कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में जब देश की सर्वोच्च अदालत तक इस धारणा के साथ काम कर रही है कि सरकार के प्रशासकीय कामकाज में न्यायिक दखल नहीं होना चाहिए, ऐसे समय में हाई कोर्ट्स ने रास्ता दिखाया है। कम से कम चार हाई कोर्ट्स ने राज्य सरकारों को जिम्मेदार बनाने वाली टिप्पणियां की हैं। हालांकि उनके भी आदेश नहीं आए हैं, जिससे कहा जाए कि अब नजीर बनेगी। लेकिन मौजूदा समय में किसी जज का राज्य सरकारों के कामकाज पर तीखी मौखिक टिप्पणी भी बहुत बड़ी बात है और दिल्ली हाई कोर्ट ने तो सीधे केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया और मद्रास हाई कोर्ट ने संवैधानिक संस्था होने के नाम पर पवित्र गाय बने केंद्रीय चुनाव आयोग को उसकी गलतियों के लिए आईना दिखाया। ध्यान रहे पिछले साल कोरोना वायरस की पहली लहर के समय जब प्रवासी मजदूर पलायन कर रहे थे और देश की छह हाई कोर्ट्स ने केंद्र से… Continue reading देश के हाई कोर्ट्स को सलाम

बहुत सही कहा अनमोल अंबानी ने!

अब तक राजीव बजाज यह कहते रहे थे कि लॉकडाउन बिना सोचे-समझे किया गया एक गलत फैसला था, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को गर्त में पहुंचा दिया। यही बात अब अनिल अंबानी के बेटे अनमोल अंबानी ने कही है। राजीव बजाज का कहना समझ में आता है क्योंकि वे राहुल बजाज के बेटे हैं और जमनालाल बजाज के पोते हैं। उनका परिवार आजादी की लड़ाई में शामिल था और सच कहने की विरासत उनके डीएनए में है। लेकिन हैरानी की बात है कि जिस अनिल अंबानी की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सर्वाधिक बदनाम हुए, उनके ऊपर राफेल सौदे में अनिल अंबानी को ऑफसेट कांट्रैक्ट दिलाने का आरोप लगा, अनिल अंबानी की डूबती कंपनी को बचाने के लिए सवाल उठे, उनके बेटे ने राजीव बजाज से भी आगे बढ़ कर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने न सिर्फ लॉकडाउन की आलोचना की, बल्कि कोरोना वायरस के संक्रमण के बहाने देश के लोगों के जीवन को कंट्रोल करने के प्रयासों की भी आलोचना की। उन्होंने किसानों की जमीन छीनने का आरोप लगाया तो भारत को चीन की तरह ‘टोटैलिटेरियन बायो सर्विलांस फासिस्ट स्टेट’ बनाने के प्रयास का अंदेशा जताया। उन्होंने ट्विट करके दो टूक अंदाज में कहा कि फिल्म के… Continue reading बहुत सही कहा अनमोल अंबानी ने!

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