किसान विरोधी माहौल को और तेज किया जा रहा!

हमारा मध्यम वर्ग बड़ा पाखंडी है। सात साल पहले तक या दो साल पहले तक भी कई मामलों में यह अपने विचार कुछ और बताता था लेकिन आज ज्यादा मुखर होकर कुछ और।

बिहार के किसान के अकाउंट में मिले 52 करोड़ रुपये, सरकार से कुछ पैसे रखने की अपील की..

बैंक खाते में गलती से पैसे ट्रांसफर होने में बिहार के एक किसान ने पाया कि उसके पेंशन खाते में ₹52 करोड़ प्राप्त हुए हैं। राम बहादुर शाह ने अब सरकार से अपील की है कि उन्हें कुछ पैसे रखने की अनुमति दी ज

Real India : इस हिंदू बाहुल्य गांव में मोहर्रम पर अंगारों पर चलते हैं हिन्दू परिवार, आपसी सौहार्द का देते हैं संदेश…

हिंदू बाहुल्य गांव में हर घर में मोहर्रम के नियमों का पालन किया जाता है और इस दिन पमिथिथल (अंगारों पर चलाना) समेत अन्य कार्यक्रमों में लोग शामिल होते हैं….

अजब-गजब : सांप और किसान दोनों ने एक दूसरे को काटा, सांप मर गया …

उड़ीसा के जाजपुर जिले से सामने आया है. बताया जा रहा है कि 45 वर्ष के व्यक्ति को जब एक सांप ने काट लिया तो बदला लेने के लिए उसने भी सांप को काट दिया.

Kisan Andolan: किसानों ने मनाया काला दिवस

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बुधवार को काला दिवस मनाया। बुधवार यानी 26 मई को किसान आंदोलन के छह महीने पूरे हुए। इस मौके पर किसानों ने काला दिवस मनाया और इस दौरान उन्होंने काले झंडे फहराए, सरकार विरोधी नारे लगाए, पुतले जलाए और प्रदर्शन किया। गाजीपुर में प्रदर्शन स्थल पर थोड़ी अराजकता भी हुई, जहां किसानों ने भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच प्रधानमंत्री का पुतला जलाया। इस दौरान हल्की झड़प हुई। काला दिवस मनाने के दौरान किसानों ने दिल्ली के तीन सीमा क्षेत्रों सिंघू, गाजीपुर और टिकरी पर काले झंडे लहराए और नेताओं के पुतले जलाए। दिल्ली पुलिस ने लोगों से कोरोना वायरस संक्रमण से हालात और लागू लॉकडाउन को देखते हुए इकट्ठा नहीं होने की अपील की थी। हालांकि इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे। किसान नेताओं ने बताया कि प्रदर्शन की जगह पर ही नहीं, बल्कि हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के गांवों में भी काले झंडे लगाए गए हैं। नेताओं ने कहा कि ग्रामीणों ने अपने घरों और गाड़ियों पर भी काले झंडे लगाए। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार की सुबह कहा था- हम… Continue reading Kisan Andolan: किसानों ने मनाया काला दिवस

सरकार और किसान बात करें

किसान आंदोलन को चलते-चलते आज छह महिने पूरे हो गए हैं। ऐसा लगता था कि शाहीन बाग आंदोलन की तरह यह भी कोरोना के रेले में बह जाएगा लेकिन पंजाब, हरयाणा और पश्चिम उत्तरप्रदेश के किसानों का हौसला है कि अब तक वे अपनी टेक पर टिके हुए हैं। उन्होंने आंदोलन के छह महिने पूरे होने पर विरोध-दिवस आयोजित किया है। अभी तक जो खबरें आई हैं, उनसे ऐसा लगता है कि यह आंदोलन सिर्फ ढाई प्रांतों में सिकुड़कर रह गया है। पंजाब, हरयाणा और आधा उत्तरप्रदेश। इन प्रदेशों के भी सारे किसानों में भी यह फैल पाया है नहीं, यह भी नहीं कहा जा सकता। यह आंदोलन तो चौधरी चरणसिंह के प्रदर्शन के मुकाबले भी फीका ही रहा है। उनके आहवान पर दिल्ली में लाखों किसान इंडिया गेट पर जमा हो गए थे। यह भी पढ़ें: ये बादशाहत जरुरी नहीं दूसरे शब्दों में शक पैदा होता है कि यह आंदोलन सिर्फ खाते-पीते या मालदार किसानों तक ही तो सीमित नहीं है ? यह आंदोलन जिन तीन नए कृषि-कानूनों का विरोध कर रहा है, यदि देश के सारे किसान उसके साथ होते तो अभी तक सरकार घुटने टेक चुकी होती लेकिन सरकार ने काफी संयम से काम लिया है। उसने… Continue reading सरकार और किसान बात करें

Kisan Andolan: किसानों का आज काला दिवस, 12 प्रमुख विपक्षी दलों ने किसानों समर्थन किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसानों के आंदोलन के छह महीने पूरे हो गए हैं। देश के कई राज्यों के किसानों ने पिछले साल 26 नवंबर को दिल्ली की अलग अलग सीमाओं पर प्रदर्शन शुरू किया था। काफी उतार-चढ़ाव के साथ किसानों के इस आंदोलन के छह महीने पूरे हो गए। छह महीने पूरे होने के दिन किसानों ने केंद्र सरकार के विरोध में काला दिवस मनाने का ऐलान किया है। किसान आंदोलन से जुड़े 40 संगठनों के समहू संयुक्त किसान मोर्चे की ओर से एक बयान जारी करके पिछले हफ्ते कहा गया था कि किसान 26 मई को काला दिवस मनाएंगे। उस दिन किसानों ने लोगों से अपने घरों पर काले झंडे लगाने की अपील की है। किसान संगठनों ने यह भी कहा है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला भी जलाएंगे। इस बीच पिछले हफ्ते हरियाणा के हिसार में किसानों के ऊपर लाठीचार्ज किए जाने के बाद विरोध में बड़ी संख्या में किसान इकट्ठा होने लगे हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से किसान आंदोलन में किसानों की मौजूदगी कुछ कम हो गई थी। लेकिन अब फसलों की बुवाई के बाद किसान फिर आंदोलन की जगहों पर… Continue reading Kisan Andolan: किसानों का आज काला दिवस, 12 प्रमुख विपक्षी दलों ने किसानों समर्थन किया

kinda weird : ऑस्ट्रेलिया में कोरोना के बाद आई एक और आफत..आसमान से होने लगी चूहों की बारिश..

कोरोना वायरस से अभी तक पुरी दुनिया उभर नहीं आई है और एक के बाद एक संकट आये जा रहे है। ताजा मामला ऑस्ट्रेलिया से जुड़ा है। ऑस्ट्रेलिया  में चूहों मे आतंक मचा रखा है। ऑस्ट्रेलिया माउस प्लेग से भी जूझ रहा है। लोगों को डर है कि चूहे कहीं कोई दूसरी महामारी ना फैला दें। चूहों के आतंक की वजह से फैक्ट्री मालिक से लेकर किसान तक परेशान हैं। लाखों की तादात में चूहों ने फसलें बर्बाद कर दी हैं।लाखों चूहे ऑस्ट्रेलिया की अलग-अलग फैक्ट्री और खेतों से निकल रहे हैं। लोग दहशत में तब आ गये जब आसमान से चूहों की ‘बारिश’ होने लगी। ऐसा ना कभी देखा और ना ही कभी सुना है आसमान से बारिश आते तो सभी ने देखा है लेकिन बारिश के रूप में चूहें बरसते किसी ने नहीं देखा है। ऑस्ट्रेलिया  में आसमान से चूहों की बारिश होने लगी। इससे आम जनता में भय का माहौल छा बन गया। सभी इसका समाधान ढूंढ़ने में लगे है। इसे भी पढ़ें Good News : रूसी वैक्सीन स्पुतनीक-वी का एक डोज मिलेगा 995.4 रुपये में, सबसे पहले प्राइवेट सेक्टर को मिलेगी वैक्सीन आसमान से बरसी चूहों की आफत दरअसल, ऑस्ट्रेलिया में आसमान से चूहों की बारिश का… Continue reading kinda weird : ऑस्ट्रेलिया में कोरोना के बाद आई एक और आफत..आसमान से होने लगी चूहों की बारिश..

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने वाला ब्रेसलेट, पास आने पर देगा करंट के झटके

भारत में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। जो सभी के लिए बेहद खतरनाक है। सरकार ने कोरोना के संक्रमण रोकने के लिए तमाम प्रयास कर लिए है। लेकिन सामाजिक दूरी का नियम टूटता जा रहा है। ऐसे में मेरठ में एक किसान के युवा होनहार बेटे ने ब्रेसलेट जैसी डिवाइस ईजाद की है। इस ब्रेसलेट को ईजाद करने वाले का नाम नीरज है। नीरज फिलहाल बी. टेक में फाइनल इयर की पढ़ाई कर रहा है।  एक दिन में कोरोना के 3 लाख के पार मामले दर्ज हो रहे है। आये दिन कोरोना एक नया आंकड़ा दर्ज कर रहा है। बाजार जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर सामाजिक दूरी का पालन नहीं होता है। इसे भी पढ़ें Friendship goal: जब ऐसे दोस्त हों तो कोरोना कुछ नहीं बिगाड़ सकता ! पास आते ही लगेगा करंट का झटका बी-टेक की पढ़ाई कर रहे छात्र नीरज उपाध्याय का दावा है कि इस ब्रेसलेट को पहनने से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना आसान हो जाएगा। इसे पहनने वाले दो लोग जब भी ज्यादा करीब आएंगे तो उन्हें करंट जैसा हल्का झटका लगेगा और उन्हें दो गज की दूरी बनाने का एहसास हो जाएगा। हालांकि ये ब्रेसलेट तभी कारगर होगा जब इसका अधिक से अधिक… Continue reading सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने वाला ब्रेसलेट, पास आने पर देगा करंट के झटके

राजस्थान : बेटी नहीं देवी है, दुर्गा नवमी के दिन हैलीकाॅप्टर से घर लाए दादा, चाॅपर के किराए के लिए चार लाख की फसल बेच दी

Jaipur | कभी बेटियों के कत्ल के लिए कुख्यात कहे जाने वाले राजस्थान में नवजात बेटियों की आमद अब लोगों में उत्साह भरी है। यह उदाहरण ही नहीं बल्कि एक नजीर है, जिसने लोगों के मन में बेटियों के घर में आगमन को देवी के रूप में स्वीकार करना शुरू किया है। राजस्थान (Rajasthan) के नागौर (Nagour) में जन्मी एक बेटी का स्वागत उसके दादा ने इस प्रकार किया है जो सिर्फ राजस्थान के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए मिसाल है। राजस्थान के नागौर जिले में कुचेरा इलाके का गांव निम्बड़ी चांदावता (Nagour Kuchera Nimbdi Chandawata Village) और हरसोलाव में एक परिवार में 35 साल बाद बेटी का जन्म होने के कारण किसान दादा ने अपनी नवजात पोती के हेलीकॉप्टर बुक करवाया है, जिसमें सवार होकर नवजात पोती अपने ननिहाल हरसोलाव से आज पहली बार दादा के घर गांव निम्बड़ी चांदावता पहुंचेगी। दादा ने अपनी फसल बेचकर अपनी दुलारी के लिए जयपुर से हेलीकॉप्टर बुक करवाया। इसे भी पढ़ें Earth Day 2021 : अभिनेत्री दीया मिर्जा ने कहा, पर्यावरण में बदलाव के लिए अधिकारी और उद्योग जिम्मेदार राजस्थान में नवजात ने हेलीकॉप्टर से की लैंडिंग नवजात के लिए हेलीकॉप्टर बुक करवाने का यह पहला मामला है। राजस्थान में… Continue reading राजस्थान : बेटी नहीं देवी है, दुर्गा नवमी के दिन हैलीकाॅप्टर से घर लाए दादा, चाॅपर के किराए के लिए चार लाख की फसल बेच दी

किसानों पर सुप्रीम कोर्ट भी चुप

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 145 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों के बारे में जल्दी किसी फैसले की जरूरत है। अगर केंद्र सरकार कोई फैसला नहीं करती है तो उसका कारण समझ में आता है। उसका राजनीतिक मकसद है और जिस कारोबारी मकसद के लिए उसने ये कानून बनाए हैं उसे भी पूरा करना है। कुछ चुनिंदा कारोबारियों के हितों के सामने किसानों के हित उसके लिए ज्यादा मायने नहीं रखते हैं। लेकिन क्या सुप्रीम कोर्ट के सामने भी ऐसी ही मजबूरी है, जो वह फैसला नहीं कर रही है। आखिर सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है पर अदालत उस पर कोई विचार क्यों नहीं कर रही है? यह सही है कि इन दिनों कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से अदालत का काम पूरी रफ्तार से नहीं हो रहा है और वर्चुअल सुनवाई करनी पड़ रही है। लेकिन सर्वोच्च अदालत को प्राथमिकता तय करनी होगी। उसकी बनाई तीन सदस्यों की कमेटी ने कोई दस दिन पहले अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है। अदालत ने इस कमेटी को आठ हफ्ते का ही समय दिया था। हालांकि रिपोर्ट सौंपने में उससे… Continue reading किसानों पर सुप्रीम कोर्ट भी चुप

किसानों से बात करे सरकार

केंद्र सरकार को अपने बनाए कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के प्रति दुश्मनी का भाव छोड़ देना चाहिए और उनके साथ तत्काल बातचीत करनी चाहिए। राजधानी दिल्ली में जिस तेजी से कोरोना वायरस का संक्रमण फैल रहा है उसे देखते हुए यह आशंका निराधार नहीं है कि किसानों के बीच महामारी फैल सकती है। किसान 144 दिन से धरने पर बैठे हैं। वे थक भी गए हैं और खेती-किसानी का उनका काम भी प्रभावित हो रहा है। कोरोना का खतरा अलग से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार उनसे बातचीत की शुरुआत करे और जिस शर्त पर होता है उनका आंदोलन खत्म कराने का प्रयास करे। भाजपा के सहयोगी और हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह आंदोलन कर रहे किसानों से बातचीत शुरू करे। भाजपा के अपने सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्विट करके कहा कि सरकार किसानों से बात करे और आंदोलन खत्म कराए। उन्होंने तो अपनी पार्टी की सरकार को सुझाव भी दिया कि कैसे आंदोलन खत्म कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से वादा करे कि जो भी राज्य इस कानून को लागू नहीं करना चाहता है वह इसे लागू नहीं… Continue reading किसानों से बात करे सरकार

Bihar: मुजफ्फरपुर में मौसम की मार झेल रहे लीची किसानों को अब कोरोना का डर

मुजफ्फरपुर| बिहार में लीची के लिए चर्चित मुजफ्फरपुर के लीची किसान इन दिनों कोरोना की दूसरी लहर से आशंकित हैं। इस साल पहले से ही मौसम के अनुकूल नहीं होने के कारण लीची की पैदावार कम होने को लेकर किसान उदास हैं और फिर से कोरोना (Corona) की दूसरी लहर ने इनकी रही सही उम्मीद पर भी पानी फेर रही है। इस वर्ष मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के अधिकांश क्षेत्रों के लीची बगानों में अधिक समय तक नमी रहने और अचानक गर्मी आ जाने के कारण लीची के पौघों में मंजर कम लगे हैं, जिससे फलों की संख्या कम है। लीची किसान (Litchi Farmer) कहते हैं कि इस बार अभी तक बाहर के व्यवसायियों ने लीची (Litchi) के बाग नहीं खरीदे हैं। वे दानों (फलों) के और पुष्ट और आकार लेने का इंतजार कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें – West Bengal Assembly Election: मोदी बोले -नंदीग्राम में दीदी हुईं बोल्ड, बंगाल में उनकी पारी समाप्त पिछले साल लॉकडाउन की वजह से किसानों को बड़ा नुकसान हुआ था। इस बार भी कुछ इसी तरह की स्थिति बन रही है। मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के बंदरा क्षेत्र के रहने वाले लीची किसान एस के दुबे (Litchi Farmer SK dube) बताते हैं कि बागों में पेड़ों पर… Continue reading Bihar: मुजफ्फरपुर में मौसम की मार झेल रहे लीची किसानों को अब कोरोना का डर

सरकार ने किसानों से वार्ता के लिए रखी शर्त

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 136 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों से सरकार की वार्ता बंद है। आखिरी बार 22 जनवरी को किसानों के साथ केंद्र की वार्ता हुई थी, जिसके बाद केंद्र ने बातचीत बंद कर दिया। हालांकि उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो बार कहा कि सरकार किसानों से वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन कोई पहल नहीं की गई। अब केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री ने इस शर्त के साथ वार्ता की पेशकश की है कि किसान अपना आंदोलन स्थगित करें। दूसरी ओर किसानों ने साफ किया है कि उनका आंदोलन चलता रहेगा। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शनिवार को किसानों के सामने वार्ता का प्रस्ताव रखा। तोमर ने कहा कि किसानों के मन में असंतोष नहीं है, जो किसान संगठन इन बिलों के विरोध में है, उनसे सरकार बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा- मैं किसान संगठनों से आग्रह करूंगा कि वे अपना आंदोलन स्थगित करे अगर वे बातचीत के लिए आएंगे तो सरकार उनसे बातचीत के लिए तैयार है। नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि कृषि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना और उनका निराकरण करना, हमेशा… Continue reading सरकार ने किसानों से वार्ता के लिए रखी शर्त

Kisan Agitation : कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे किसान आंदोलन में आंदोलन स्थल पर नहीं दिख रहे किसान

कृषि कानूनों (Agricultural law) के खिलाफ हो रहे किसान आंदोलन (Kisan Agitation) को 134 दिन बीत जाने के बाद गाजीपुर बॉर्डर (Ghazipur Border) पर किसानों की संख्या अब बेहद कम होती नज़र आ रही है।

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