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केंद्र ने ट्विटर को जिम्मेदार बताया

नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को मिला कानूनी संरक्षण खत्म होने और उसके ऊपर मुकदमा दर्ज होने के बाद केंद्र सरकार ने इसके लिए ट्विटर को ही जिम्मेदार ठहराया है। गौरतलब है कि नए आईटी नियमों का पालन नहीं करने की वजह से ट्विटर ने बुधवार को देश में इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म का दर्जा खो दिया है। इसका मतलब है कि अब ट्विटर अपने प्लेटफॉर्म पर किए गए पोस्ट के लिए जिम्मेदार होगा। इस फैसले के बाद बुधवार को केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा। सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा- इस बात को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्विटर कानूनी संरक्षण का हकदार है? हालांकि, मामले में सीधी बात यह है कि ट्विटर 26 मई से लागू हुई गाइडलाइन का पालन करने में नाकाम रहा है। इसके बाद भी उन्हें काफी मौके दिए गए थे। फिर भी उन्होंने जान बूझकर गाइडलाइन न मानने का रास्ता चुना। हालांकि ट्विटर का कानूनी संरक्षण खत्म होने को लेकर केंद्र सरकार ने कोई भी आदेश जारी नहीं किया है। आईटी मंत्रालय की ओर जारी की गई गाइडलाइन का पालन नहीं करने की वजह से कानूनी संरक्षण अपने आप खत्म हुआ है। कानूनी संरक्षण 25 मई से खत्म माना… Continue reading केंद्र ने ट्विटर को जिम्मेदार बताया

आईटी और पेट्रोलियम की समितियों की बैठक

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के मामले कम होने के साथ ही स्थायी समितियों की बैठकें तय हो गई हैं। अगले दो दिन यानी 17 और 18 जून को दो स्थायी समितियों की अहम बैठक होगी। एक बैठक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की स्थायी समिति की बैठक होगी, जिसमें लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर चर्चा होगी। दूसरी बैठक 18 जून को सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय की स्थायी समिति की होगी, जिसमें माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया है। गुरुवार को होने वाली पेट्रोलियम मंत्रालय की स्थायी समिति की बैठक में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर करने के बारे में बात होगी। स्थायी समिति की इस मीटिंग में सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक इस मीटिंग में तेल की बढ़ती कीमतों की वजह, उसका हल निकालने पर चर्चा की जाएगी। भाजपा के सांसद रमेश बिधूड़ी इस कमेटी के अध्यक्ष हैं। इसके एक दिन बाद शुक्रवार को सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय की स्थायी समिति की बैठक होगी। ध्यान रहे पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच तनातनी चल रही है। संसद की स्थायी समिति… Continue reading आईटी और पेट्रोलियम की समितियों की बैठक

कैसे दें सरकार का साथ?

ये व्यवस्था एक आम नागरिक की निजता के लिहाज से सही है या गलत? जाहिर है, नागरिक अधिकारों के लिए सचेत कोई व्यक्ति ऐसी और ज्यादा व्यवस्थाओं की मांग सोशल मीडिया कंपनियों से करेगा। और जब सरकार जो व्यवस्था है, उसे भी खत्म करना चाहती है, तो वह उसके विरोध में खड़ा होगा। जिस समय सोशल मीडिया कंपनियां पूरी विकसित दुनिया में जांच-पड़ताल के दौर से गुजर रही हैं और उनके एल्गोरिद्म को लेकर सवाल गहराते गए हैं, उस समय भारत में नागरिकों अधिकारों के प्रति जागरूक कोई व्यक्ति इनमें से किसी कंपनी का समर्थन करे, यह विडंबना ही है। लेकिन भारत सरकार को जो रुख सामने है, उसके बीच ऐसा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखता। जब देसी मीडिया को पूरी तरह ‘वफादार’ बना लेने के बाद सरकार सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स को भी उस मॉडल पर चलाने की जुगत में है, अगर किसी कंपनी ने इस कोशिश को चुनौती दी है, तो उसका समर्थन करने के अलावा और क्या रास्ता बचता है? मुद्दा सोशल मीडिया मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप और सरकार के बीच खड़े हुए तनाव का है। यह भी पढ़ें: अगर इरादा साफ हो सोशल मीडिया मध्यस्थ कंपनियों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से लागू किए गए… Continue reading कैसे दें सरकार का साथ?

निजता, अभिव्यक्ति की चिंता किसको?

सोचें, भारत के नागरिकों की निजता और अभिव्यक्ति की चिंता में कौन दुबला हो रहा है? कौन इसकी लड़ाई लड़ रहा है? अमेरिका का सोशल मीडिया कंपनियां व्हाट्सऐप और ट्विटर भारतीय नागरिकों की चिंता में हैं और उनकी निजता और अभिव्यक्ति की लड़ाई लड़ रही हैं। यह कैसी विडंबना है कि जिन कंपनियों के ऊपर लोगों की निजता से समझौता करने और गोपनीय डाटा इकट्ठा करने, उन्हें लीक करने या बेचने के आरोप है या जो कंपनियां मनमाने तरीके से लोगों की बोलने-लिखने की आजादी को नियंत्रित करती हैं वो भारत सरकार को सबक दे रही हैं और अदालत में जाकर नागरिकों की निजता और अभिव्यक्ति के मुद्दे उठा रही हैं! इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि भारत सरकार इस मामले में यह कह कर बचाव कर रही है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और उसको ये कंपनियां नसीहत न दें। सोचें, क्या भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसलिए यह मान लिया जाए कि देश में लोगों की निजता सुरक्षित है और अभिव्यक्ति की आजादी है? यह बहुत सतही तर्क है और यह तर्क पेश करने से पहले सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इस बारे में सोचना चाहिए था। यह अपने आप में इस… Continue reading निजता, अभिव्यक्ति की चिंता किसको?

स्वतंत्रताः बताने की या छिपाने की?

व्हाटसाप और हमारी सरकार के बीच बड़ा मजेदार और अजीब-सा दंगल चल रहा है। इसी साल फरवरी में बहस चली थी कि व्हाट्साप और फेसबुक जैसी संस्थाएँ नागरिकों की निजता पर हमला करती हैं। सरकार को उन पर प्रतिबंध लगाना चाहिए और व्हाट्साप ने अब दिल्ली के उच्च न्यायालय में जाकर गुहार लगाई है कि भारत सरकार नागरिकों की निजता भंग करना चाहती है। उस पर रोक लगाई जाए। हमारी सरकार और इन संचार-कंपनियों के अपने अपने तर्क हैं। दोनों कुछ हद तक ठीक लगते हैं और कुछ हद तक गलत ! सरकार का कहना है कि वह जो नया कानून ला रही है, उसके मुताबिक व्हाटसाप को ऐसे संदेशों का मूल-स्त्रोत खोजकर बताना होगा, जो आपत्तिजनक हैं। आपत्तिजनक वे संदेश माने जाएंगे, जो भारत की सुरक्षा, शांति-व्यवस्था, कानून आदि के लिए खतरनाक हों। आजकल भारत में लगभग 45 करोड़ लोग व्हाट्साप आदि का इस्तेमाल करते हैं। इस पर आने-जानेवाले संदेशों के बारे में पूर्ण गोपनीयता का वादा किया जाता है। इस सुविधा का फायदा उठाकर आतंकवादी, चोर, विदेशी दलाल, जासूस, अपराधी, अफवाहबाज़ और नादान भोले-भंडारी लोग भी ऐसी खबरें, विचार, संदेश, दृश्य आदि भेजते रहते हैं, जिन पर प्रतिबंध न केवल तत्काल आवश्यक होता है बल्कि ऐसे लोगों को… Continue reading स्वतंत्रताः बताने की या छिपाने की?

ट्विटर हैकिंग का बड़ा खतरा

अब तक दुनिया भर के हैकर्स की वजह से कंप्यूटर और सरकारी नेटवर्क को खतरा बताया जाता था, बैंकिंग की गतिविधियों के लिए चिंता जताई जाती थी यह कहा जाता था कि अगर सुरक्षा नेटवर्क में सेंध लग गई तो क्या होगा पर अब एक नया खतरा पैदा हो गया है।

व्हाइट हाउस ने मोदी को अनफॉलो किया

व्हाइट हाउस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर अकाउंट अनफॉलो कर दिया है। 19 दिन पहले जब भारत ने अमेरिका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा निर्यात की थी,

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