कोरोना से लड़ें युद्ध स्तर पर

विदेशों से मिल रही जबर्दस्त मदद के बावजूद कोरोना मरीजों का जो हाल भारत में हो रहा है, उसने सारे देश को ऐसे हिलाकर रख दिया है, जैसे कि किसी युद्ध ने भी नहीं हिलाया था। लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि हजारों ऑक्सीजन-यंत्र और हजारों टन ऑक्सीजन के जहाजों से भारत पहुंचने के बाद भी कई अस्पतालों में मरीज क्यों मर रहे हैं ? उन्हें ऑक्सीजन क्यों नहीं मिल रही है ? जो लापरवाही हमने बंगाल में चुनाव के दौरान देखी और कुंभ के मेले ने जैसे कोरोना को गांव-गांव तक पहुंचा दिया, उसे हम अभी भूल भी जाएं तो कम से कम इतना इंतजाम तो अभी तक हो जाना चाहिए था कि करोड़ों लोगों को टीका लग जाता। लेकिन अभी तक मुश्किल से तीन करोड़ लोगों को पूरे दो टीके लगे हैं। उन्हें भी 20-25 दिन बाद पूर्ण सुरक्षित माना जाएगा। यदि डाॅक्टरों और नर्सों की कमी है तो देश की फौज और पुलिस कब काम आएगी ? यदि हमारे 20 लाख फौजी और पुलिस के जवान भिड़ा दिए जाएं तो वे कोरोना मरीजों को क्यों नहीं सम्हाल सकते हैं ? फौज के पास तो अपने अस्पतालों और डाक्टरों की भरमार है। ऑक्सीजन सिलेंडरों को ढोने… Continue reading कोरोना से लड़ें युद्ध स्तर पर

क्या लिखूं, सब तो साल पहले लिखा

भारत मौत का कुंआ बना है! ऐसा कोई सैकेंड वेव, थर्ड, फोर्थ वेव से नहीं है जो है वह नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की अंतहीन मूर्खताओं से है। इन मूर्खताओं में ब्रेक कभी नहीं था जो समझदार-सभ्य देशों की तरह यह सोचे कि वायरस रूक गया, फिर फैला, फिर रूका फिर फैला। भारत में वायरस लगातार फैलता हुआ है और यह कहीं सन् 1918 के स्पेनिश फ्लू जैसी महामारी की मौतों का मंजर न बने, इसके लक्षण पहले दिन से इसलिए दीवाल पर लिखे हुए थे क्योंकि नरेंद्र मोदी ने अपनी बुद्धी के घमंड में अकेले फैसले लिए। इनसे भारत मौत का कुंआ बनेगा, दुनिया का अछूत देश बनेगा, अगले तीन-चार भारत लगातार बरबाद होना है, यहमैंने इतना लिखा था कि अब तो बरबादी ही बरबादी है।  तो क्यों न आज गौर करें मेरे लिखे कॉलम के शीर्षक- पंक्तियों पर गौर रहें – वायरस वैश्विक व लापरवाह भारत!-‘भारत राष्ट्र-राज्य सावधान-सतर्क नहीं है। भारत को क्या सुध है कि ईरान, इटली, दक्षिण कोरिया, चीन के साथ हमारी आवाजाही खत्म करना जरूरी है या नहीं? (28 फरवरी 2020) यह भी पढ़ें:वायरस हुआ वैश्विक व लापरवाह भारत! मोदीजी विश्राम कीजिए, बुद्धी, हार्वड को मौका दीजिए!-वायरस से लड़ाई के मौजूदा सिनेरियों में भारत… Continue reading क्या लिखूं, सब तो साल पहले लिखा

सुई की नोक बराबर काम नहीं

दुर्भाग्य की बात है जो भारत में कोरोना वायरस की आपदा को अवसर बनाया गया और फिर आपदा के बीच उत्सव मनाया गया। जिससे जहां भी संभव हुआ उसने वहां कोरोना और दूसरी बीमारी के मरीजों को लूटना शुरू कर दिया। कोरोना की टेस्टिंग से लेकर अस्पतालों में इलाज तक हर जगह अभूतपूर्व लूट मची। वह लूट अभी तक जारी है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने आपदा में उत्सव का ऐलान किया। उन्होंने पहले ताली-थाली बजवाई थी और बाद में दीये जलवाए थे। इस बार उत्सव में उन्होंने टीका उत्सव मनवाया है। लेकिन हकीकत यह है कि चार दिन के टीका उत्सव के दौरान कई राज्यों में टीकाकरण की रफ्तार कम हो गई क्योंकि वैक्सीन की डोज उपलब्ध नहीं थी। सोचें, देश में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने वाले टीके ज्यादा से ज्यादा संख्या में बनें इसके लिए पूरे साल सरकार ने कुछ नहीं किया। दो निजी कंपनियों ने जैसे तैसे और बिना सरकारी मदद के अपने यहां टीका बनवाया तो प्रधानमंत्री ने जाकर उनकी लैब का ऐसा मुआयना किया, जैसे खुद अपनी देख-रेख में वैक्सीन बनवा रहे हों। उसके बाद केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन की पूरी प्रक्रिया को केंद्रीकृत किए रखा, जिसकी वजह से कई तरह की समस्याएं हुई हैं।… Continue reading सुई की नोक बराबर काम नहीं

कुछ भी नया नहीं हो रहा है

कोरोना वायरस की महामारी में जो कुछ हो रहा है उससे अनेक लोग हैरान हो रहे हैं, जैसे यह कुछ नया हो रहा है। इसमें कुछ भी नया नहीं हो रहा है। यह भारत की सनातन कथा है। हमेशा ऐसा ही होता रहा है। भारत में शासक कभी भी इतने दूरदर्शी नहीं हुए कि वे खतरे को समय रहते भांप लें और उससे निपटने के उपाय करें। चाहे बाहरी आक्रमण का मामला हो या बीमारी और महामारी का मामला हो, सब में भारत के शासकों की ऐसी ही प्रतिक्रिया रही है। जब तक खतरा एकदम सिर पर नहीं आ जाता है तब तक भारत के शासक न तो कोई तैयारी करते हैं और न कोई प्रतिक्रिया देते हैं। सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चैलानी ने इसे ‘पानीपत सिंड्रोम’ का नाम दिया है। यानी खतरा जब तक पानीपत नहीं पहुंचेगा तब तक दिल्ली का शासक उस पर प्रतिक्रिया नहीं देगा। जैसे चीन ने भारत की जमीन कब्जा कर ली लेकिन जब तक दुनिया ने बताया नहीं या यह दिखा नहीं कि चीन भारत की सीमा में घुस कर बैठा है, तब तक भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। वैसे ही जब तक महामारी भारत में आकर एक… Continue reading कुछ भी नया नहीं हो रहा है

आपात्काल से भी बड़ा आफतकाल

कोरोना महामारी ने इतना विकराल रुप धारण कर लिया है कि सर्वोच्च न्यायालय को वह काम करना पड़ गया है, जो किसी भी लोकतांत्रिक देश में संसद को करना होता है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह उसे एक राष्ट्रीय नीति तुरंत बनाकर दे, जो कोरोना से लड़ सके। मरीज़ों को ऑक्सीजन, इंजेक्शन, दवाइयाँ आदि समय पर उपलब्ध करवाने की वह व्यवस्था करे। न्यायपालिका को यह क्यों करना पड़ा ? इसीलिए कि लाखों लोग रोज़ बीमार पड़ रहे हैं और हजारों लोगों की जान जा रही है। रोगियों को न दवा मिल रही है, न ऑक्सीजन मिल रही है, न पलंग मिल रहे हैं। इनके अभाव में बेबस लोग दम तोड़ रहे हैं। टीवी चैनलों पर श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में लगी लाशों की भीड़ को देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कोरोना की दवाइयों, इंजेक्शनों और अस्पताल के पलंगों के लिए जो कालाबाजारी चल रही है, वह मानवता के माथे पर कलंक का टीका है। अभी तक एक भी कालाबाजारी को चौराहे पर सरे-आम नहीं लटकाया गया है। क्या हमारी सरकार और हमारी अदालत के लिए यह शर्म की बात नहीं है? होना तो यह चाहिए कि इस आपात्काल में, जो भारत का आफतकाल… Continue reading आपात्काल से भी बड़ा आफतकाल

नेता कोरोना-दंगल बंद करें

ऑक्सीजन की कमी के कारण नाशिक के अस्पताल में हुई 24 लोगों की मौत दिल दहलानेवाली खबर है। ऑक्सीजन की कमी की खबरें देश के कई शहरों से आ रही हैं। कई अस्पतालों में मरीज़ सिर्फ इसी की वजह से दम तोड़ रहे हैं। कोरोना से रोज हताहत होनेवालों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि कई देशों के नेताओं ने अपनी भारत-यात्रा स्थगित कर दी है। कुछ देशों ने भारतीय यात्रियों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया है। लाखों लोग डर के मारे अपने गांवों की तरफ दुबारा भाग रहे हैं। नेता लोग भी डर गए हैं। वे तालाबंदी और रात्रि-कर्फ्यू की घोषणाएं कर रहे हैं लेकिन बंगाल में उनका चुनाव अभियान पूरी बेशर्मी से जारी है। ममता बेनर्जी ने बयान दिया है कि ‘‘कोविड तो मोदी ने पैदा किया है।’’ इससे बढ़कर गैर-जिम्मेदाराना बयान क्या हो सकता है ? यदि मोदी चुनावी लापरवाही के लिए जिम्मेदार है तो उससे ज्यादा खुद ममता जिम्मेदार है। ममता यदि हिम्मत करतीं तो मुख्यमंत्री के नाते चुनावी रैलियों पर प्रतिबंध लगा सकती थीं। उन्हें कौन रोक सकता था? यह ठीक है कि बंगाल में कोरोना का प्रकोप वैसा प्रचंड नहीं है, जैसा कि वह मुंबई और दिल्ली में है लेकिन उसकी चुनाव-रैलियों… Continue reading नेता कोरोना-दंगल बंद करें

इस साल ऑक्सीजन बड़ी चीज हो गई

सोचें, मेडिकल ऑक्सीजन को लेकर पूरे देश में हाहाकार मचा है। मेडिकल ऑक्सीजन कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसका फॉर्मूला बहुत मुश्किल से मिलता है या जो लाइसेंस के तहत मिलता है या जिसका उत्पादन बहुत कठिन है या जिसके लिए कच्चे माल की कमी है। यह बहुत बेसिक चीज है। जिस तरह दवा की दुकान में पारासिटामोल का टैबलेट सहज रूप से होता है वैसे ही स्वास्थ्य सुविधाओं में या अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता होती है। लेकिन केंद्र से लेकर राज्यों की सरकारों के निकम्मेपन ने इसे भी दुर्लभ वस्तु बना दिया। कुछ अति ज्ञानी लोग इसी बहाने प्रकृति को बचाने की अपील करने लगे हैं। लेकिन उनको भी पता होना चाहिए कितने भी पेड़-पौधों हों, मेडिकल ऑक्सीजन उनसे नहीं निकाली जा सकती है। उसकी जरूरत अलग है। प्रकृति बचाने की अपील करें, लेकिन उससे पहले अभी अपनी सरकारों को कठघरे में खड़ा करें, जो मेडिकल ऑक्सीजन जैसी बुनियादी चीज की व्यवस्था करने में विफल रहे हैं। हैरानी की बात है कि यह बेसिक चीज की व्यवस्था के लिए प्रधानमंत्री ने खुद कमर कसी है। कैबिनेट सचिव भी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस बारे में निर्देश दे रहे हैं। राज्यों के मुख्यमंत्री रेल मंत्री से अपील… Continue reading इस साल ऑक्सीजन बड़ी चीज हो गई

कोरोनाः तालाबंदी हल नहीं है

कोरोना महामारी इतना विकराल रुप आजकल धारण करती जा रही है कि उसने सारे देश में दहशत का माहौल खड़ा कर दिया है। भारत-पाकिस्तान युद्धों के समय भी इतना डर पैदा नहीं हुआ था, जैसा कि आजकल हो रहा है। प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम संबोधन देना पड़ा है। उन्हें बताना पड़ा है कि सरकार इस महामारी से लड़ने के लिए क्या-क्या कर रही है। आॅक्सीजन, इंजेक्शन, पलंगों, दवाइयों की कमी को कैसे दूर किया जाएगा। विरोधी नेताओं ने सरकार पर लापरवाही और बेफिक्री के आरोप लगाए हैं। लेकिन उन्हीं नेताअेां को कोरोना ने दबोच लिया है। कोरोना किसी की जाति, हैसियत, मजहब, प्रांत आदि का भेद-भाव नहीं कर रहा है। सभी टीके के लिए दौड़े चले जा रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथसिंह ने फौज से भी अपील की है कि वह त्रस्त लोगों की मदद करे। लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि रोज़ लाखों नए लोगों में यह महामारी क्यों फैल रही है और इसका मुकाबला कैसे किया जाए ? इसका सीधा-सादा जवाब यह है कि लोगों में असवाधानी बहुत बढ़ गई थी। दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, पुणें जैसे शहरों को छोड़ दें तो छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में आपको लोग बिना मुखपट्टी लगाए घूमते हुए मिल जाएंगे।… Continue reading कोरोनाः तालाबंदी हल नहीं है

दस राज्यों में संकट गहरा, 1,320 लोगों की मौत हुई

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या परे देश में तेजी से बढ़ रही है और उसी अनुपात में मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। लेकिन देश के 10 राज्यों का संकट बहुत गहरा है और इन राज्यों की वजह से ही देश में कोरोना की हालत बेकाबू दिख रही है। देश में हर दिन मिल रहे नए संक्रमितों में 10 राज्यों का हिस्सा 78 फीसदी से ज्यादा है। देश में सर्वाधिक संक्रमित महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात ये 10 राज्य हैं, जहां 78 फीसदी से ज्यादा नए केसेज मिल रहे हैं। इन राज्यों में कोरोना की स्थिति बेकाबू हो गई है। सर्वाधिक संक्रमित इन 10 राज्यों में से पांच राज्यों- दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन लगा हुआ है फिर भी हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। मंगलवार को खबर लिखे जाने तक पूरे देश में दो लाख 21 हजार से ज्यादा नए केसेज आए थे, जिसके बाद संक्रमितों की संख्या एक करोड़ 55 लाख, 28 हजार से ज्यादा हो गई और एक्टिव मरीजों की संख्या 21 लाख 18 हजार से ज्यादा हो गई। खबर लिखे जाने तक राजधानी दिल्ली, कर्नाटक, छत्तीसगढ़… Continue reading दस राज्यों में संकट गहरा, 1,320 लोगों की मौत हुई

Job Market News : कोरोना काल में आईटी सेक्टर में आई नौकरियों की बाढ़, इन कंपनियो ने दिया सुनहरा मौका

लगभग पिछले साल से प्राइवेट नौकरी वालों की हालत खराब है। लॉकडाउन के कारण सभी प्राइवेट कंपनी बंद हो गयी थी। लेकिन प्राइवेट वालों के लिए अब खुशी का मौका है। कोरोना काल में जिन लोगों की नौकरियां चली गई है उनके पास अब बेहतरीन मौका है। 2020 के बाद अब 2021 में आईटी सेक्टर में नौकरियों की बहार आई हुई है। जहां एक तरफ देश में कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। देश की 5 टॉप आईटी कंपनी बंपर भर्ती कर रही है। भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर चल रही है जो पहली लहर से अत्यंत खतरनाक है। कोविड-19 के एक दिन में करीब 2 लाख मामले दर्ज हो रहे है। भारत के कुछ राज्यों में एक बार फिर से लॉकडाउन लग गया है। एक बार फिर से प्राइवेट कंपनियों में तालाबंदी हो गयी है। इसी बीच आईटी कंपनियों में नौकरियों की बहार आयी है। इसे भी पढ़ें कोरोना काल में मदद के लिए आगे आया ABVP, जारी किए हेल्पलाइन नंबर इन कंपनियों में मिलेगा मौका नौकरी देने वाली कंपनियों में देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और विप्रो शामिल हैं। आपको बता दें कि इस भयावह माहौल में इन कंपनियों को तलाश… Continue reading Job Market News : कोरोना काल में आईटी सेक्टर में आई नौकरियों की बाढ़, इन कंपनियो ने दिया सुनहरा मौका

Corona Virus in Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश के चार शहरों में लॉकडाउन बढ़ा

भोपाल। कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से एक मध्य प्रदेश में हालात बेकाबू हो रहे हैं। राज्य के कई बड़े शहरों में स्थिति बहुत खराब है। कोरोना के बढ़ते केसेज को देखते हुए चार बड़े शहरों- भोपाल, इंदौर, उज्जैन और रतलाम में लॉकडाउन बढ़ा कर 26 अप्रैल की सुबह छह बजे तक कर दिया गया है। आपदा प्रबंधन के लिए बनी कमेटी की बैठक में इस बारे में फैसला किया गया। यह भी तय किया गया कि हरिद्वार कुंभ से लौटने वालों को क्वरैंटाइन किया जाएगा। बैठक के बाद भोपाल के कलेक्टर अविनाश लवानिया ने बताया कि इस सप्ताह सख्ती ज्यादा रहेगी। बेवजह घूमने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ कोविड-19 से जुड़े लोगों के लिए ही आने-जाने में विशेष रियायतें मिलेंगी। इंदौर के कलेक्टर मनीष सिंह ने भी बताया कि अस्पतालों में बेड की स्थिति को देखते हुए लॉकडाउन को सात दिन के लिए बढ़ाया जा रहा है। उज्जैन में भी लॉकडाउन बढ़ाया गया है लेकिन शादियों के सीजन को देखते हुए खरीद के लिए इस बार कुछ दुकानों को भी खोलने की अनुमति दी गई है। इसके तहत सुबह आठ से दोपहर 12 तक खरीदी के लिए दुकानें खुल सकेंगी। इसकी पुष्टि कलेक्टर… Continue reading Corona Virus in Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश के चार शहरों में लॉकडाउन बढ़ा

दुनिया सचमुच देख रही हमें!

दुनिया भर के देशों ने कोरोना वायरस के संक्रमण को जब गंभीरता से लिया, उसके तीन-चार महीने बाद भारत में इस बारे में गंभीरता से विचार शुरू हुआ।

गैर जिम्मेदारी का भी इतिहास लिखा जाएगा

कोरोना महामारी का जब इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें भारतीय नेतृत्व की गैर जिम्मेदारी इतिहास का काला अध्याय होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्र सरकार के दर्जनों मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक का इतिहास एक ही तरह से दर्ज होगा। इसके एकाध अपवाद हो सकते हैं लेकिन कोरोना महामारी से लड़ने में भारत की असलियत गैर जिम्मेदारी, लापरवाही और मानवता के प्रति अपराध करने वाली है। भारत के 138 करोड़ लोगों को भगवान भरोसे छोड़ना ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई की भारत की हकीकत है। महामारी शुरू होने के पहले से या भारत में महामारी के प्रति अटेंशन बनने के पहले से राहुल गांधी एकमात्र नेता था, जिन्होंने इस खतरे को समझा था और सरकार को आगाह करना शुरू किया था लेकिन अफसोस की बात है कि उन्होंने भी चुनाव प्रचार में कोई जिम्मेदारी नहीं दिखाई। राहुल गांधी भी केरल, तमिलनाडु और असम में बड़ी चुनावी रैलियां करते रहे, जहां चुनाव खत्म होने के बाद से कोरोना वायरस के केसेज में 12 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। जब महामारी की दूसरी लहर पीक की तरफ बढ़ रही थी तब भी राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल जाकर बड़ी रैली की। फिर उनमें और नरेंद्र मोदी में क्या फर्क… Continue reading गैर जिम्मेदारी का भी इतिहास लिखा जाएगा

उफ! वायरस में कुंभ

कोरोना की भयावह महामारी के बीच कुंभ मेले का आयोजन कौन सी समझदारी कही जा सकती है? शुरू में इतनी समझदारी दिखाई गई कि कुंभ मेले की अवधि घटा दी गई। लेकिन एक महीने में ही इस बात का ख्याल नहीं रखा गया कि लाखों की संख्या में लोग अगर कुंभ मेले में आते हैं या गंगा में डुबकी लगाने पहुंचते हैं तो कैसे कोरोना प्रोटोकॉल का पालन होगा, सोशल डिस्टेसिंग का पालन कैसे होगा या सबकी टेस्टिंग कैसे होगी? उलटे राज्य के मुख्यमंत्री ने लाखों की संख्या में लोगों के मेले में हिस्सा लेने की अपील की। यहां तक कहा कि गंगा में डुबकी लगाने से कोरोना खत्म हो जाएगा। देश के लगभग सभी नेता न कम या ज्यादा मात्रा में लापरवाही दिखाई, गैर जिम्मेदारी का परिचय दिया, जिसका नतीजा है कि भारत आज ऐसी बदहाल और दयनीय स्थिति में खड़ा है। चुनाव प्रचार या कुंभ मेले के आयोजन की लापरवाहियों के अलावा केंद्र और राज्यों की सरकारों ने कोरोना वायरस की महामारी के पूरे एक साल में जिस गैर जिम्मेदारी का परिचय दिया वह भी देश की बदहाली का एक कारण है। पूरे साल में कहीं भी स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया। वायरस… Continue reading उफ! वायरस में कुंभ

भारत के सिंहकर्मा नमो और रोम का चूं-चूं नीरो

पिछले सात बरस में राजधर्म का एक नया व्याकरण रच-बस रहा है। हम देख रहे हैं कि सत्तासीन होने और सिंहासन पर बने रहने के लिए अनसुनी-योग का जो जितना गहन अभ्यास कर लेगा, वह अपनी कामयाबी का उतना ही ऊंचा परचम लहराएगा। साढ़े चार साल से भारत में आर्थिक-हाहाकार हो रहा है। पिछले एक साल से महामारी-त्राहिमाम मचा हुआ है। लेकिन हमारे नीरो का मन झूले पर झूलने को मचल रहा है। उनका मन मोर से खेलने को फुदक रहा है। उनका मन ‘ओए, ओए’ की तान लगाने को ललक रहा है। बढ़ती बेरोज़गारी से हमारे नीरो की पेशानी पर सिलवटें नहीं पड़ीं। बढ़ती महंगाई से हमारे नीरो ने अपनी ठोड़ी नहीं खुजलाई। सरहदी आपदाओं को हमारा नीरो अवसर में बदलने की नाकाम जुगत भिड़ाता रहा। विश्व-राजनय में भारत के मखौल को वह लाल कालीन के नीचे खिसकाता रहा। कोरोना महामारी के पहले चरण में हमारे नीरो ने देष के के गले में ताली-थाली-दीये-मोमबत्ती की माला डाल दी। महामारी के दूसरे चरण में वे हम से श्मशान में उत्सव मनाने को कह रहे हैं। सरकार ने हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया है। और, हमारा धैर्य धन्य है कि हम ने ख़ुद को अपने नसीब पर छोड़ दिया है।… Continue reading भारत के सिंहकर्मा नमो और रोम का चूं-चूं नीरो

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