Airtel

  • फिर कॉरपोरेट बेलआउट

    जब ऐसे कदम उठाए जाते हैं, तो उसके लिए तर्क गढ़ लिए जाते हैँ। रोजगार बचाना आम दलील है। वीआई के मामले में यह भी कहा गया कि कंपनी फेल हुई, तो बाजार में जियो और एयरटेल का द्वि-अधिकार हो जाएगा। आलोचक अक्सर कहते हैं कि मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था का वास्तविक अर्थ हैः फायदे का निजीकरण और घाटे का समाजीकरण। यानी जो फायदा हुआ, वह कंपनी मालिकों की जेब में जाएगा, लेकिन घाटा हुआ, तो उसे करदाताओं के पैसे भरा जाएगा। यह प्रवृत्ति अब बेहद आम हो चुकी। लेकिन इस कारण आर्थिक प्रबंधन का यह ढांचा आम जन की निगाह...

  • बदलती हवा के साथ

    अभी जबकि सैटेलाइट इंटरनेट सेवा प्रदान करने के लिए स्पेसएक्स को भारत में लाइसेंस हासिल नहीं हुआ है, एयरटेल भारती ने उसके साथ करार कर लिया है। नतीजतन स्पेसएक्स के खिलाफ मोर्चे में रियालंस जियो अकेली पड़ गई है। अभी पांच महीने नहीं हुए हैं, जब भारती एयरटेल कंपनी ने रिलायंस जियो के साथ साझा रुख लेते हुए भारत सरकार से कहा था कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन नीलामी के जरिए हो। यह मांग इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के विपरीत थी, जो यह सरकारी फैसले से आवंटन चाहती है। इस बीच अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप...