नीतीश के नए तेवर पर सवाल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीशकुमार बड़े मजेदार नेता हैं। वे कई ऐसे अच्छे काम कर डालते हैं, जिन्हें करने से बहुत-से नेता डरते रहते हैं। अपने देश में कितने मुख्यमंत्री हैं, जो जनता दरबार लगाने की हिम्मत करते हैं?

तो नीतीश पीएम पद के योग्य हैं!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोबारा एनडीए में लौटने से पहले प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। जब उन्होंने राजद और कांग्रेस के साथ मिल कर बिहार में भाजपा को हराया था तब उनकी स्थिति लगभग वैसी ही थी, जैसी अभी ममता बनर्जी की है

भाजपा को लेकर शिव सेना की दुविधा

शिव सेना के नेताओं ने पिछले दिनों भाजपा के प्रति सद्भाव दिखाया था। पार्टी के सांसद  संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उनको सबसे लोकप्रिय नेता बताया था। दोनों तरफ से कई बार कहा गया कि दोनों पार्टियां अलग हो गई हैं लेकिन संबंध खत्म नहीं हुए हैं।

झारखंड का महाराष्ट्र कनेक्शन

झारखंड के 20 साल के इतिहास में मुख्यमंत्री रघुवर दास के पांच साल के कार्यकाल को छोड़ दें तो हमेशा अस्थिरता रही है। अभी राज्य में चुनाव पूर्व गठबंधन की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है

द्वारचार, जयमाला हो गया, सातवें फेरे में दुल्हन ने गठबंधन खोल कहा- मैं नहीं करूंगी ये शादी..जानें पूरा मामला

महोबा |  भारत में शादी समारोह बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। जब एक बेटी की शादी होती है तो एक पिता अपनी जीवन भर की कमाई लगा देता है। लेकिन शादी के समय में कोई अप्रिय घटना हो जाएं तो सदमा लग जाता है। ऐसा ही एक मामला उत्तरप्रदेश के महोबा से सामने आया है। यह बात पता चलते ही पूरे इलाके में सन्नाटा फैला है। माहोबा के एक घर में शादी की रस्में चल थी। दुल्हन के परिवार जनों द्वारा दुल्हें के सभी नेकचार ( bride refused to marry ) किए गए। लेकिन सभी रस्मों के बाद दुल्हन ने अंतिम फेरे में शादी से मना कर दिया। इस के बाद वहां बैठे सभी लोग हैरान हो गये। गांव में उसी समय पंचायत की बैठक बुलाई गई। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी बारात को दुल्हन के बगैर ही लौटना पड़ा। बारात खाली हाथ ही लौट गई। यह मामला इस वक्‍त पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। also read: शादी के 48 घंटे बाद ही दुल्हन हुई अस्पताल में भर्ती, अपनी सौतन की बचाई जान और…. क्या था पुरा मामला ( bride refused to marry ) गुरुवार को उत्‍तर प्रदेश के महोबा में शादी का कार्यक्रम… Continue reading द्वारचार, जयमाला हो गया, सातवें फेरे में दुल्हन ने गठबंधन खोल कहा- मैं नहीं करूंगी ये शादी..जानें पूरा मामला

अविश्वास प्रस्ताव की क्या जरूरत थी?

यह हुड्डा का निजी राजनीति के लिए चला गया दांव था। उनको पता था कि अविश्वास प्रस्ताव से कुछ नहीं होगा पर उन्होंने जजपा के विधायकों और भाजपा के ग्रामीण इलाकों के विधायकों को एक्सपोज किया

खट्टर सरकार का खतरा टला

हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार पर से खतरा टल गया है। बुधवार को विपक्ष की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव विधानसभा में गिर गया।

अखिलेश के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं शिवपाल यादव

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (पीएसपीएल) के प्रमुख शिवपाल यादव ने कहा है कि उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है। ताकि उनकी पार्टी और

असम में कांग्रेस गठबंधन कारगर नहीं!

कांग्रेस पार्टी ने असम में पांच पार्टियों को साथ लेकर गठबंधन बनाया है। लेकिन चुनाव के लिहाज से यह कोई बहुत कारगर गठबंधन नहीं दिख रहा है क्योंकि इसमें शामिल छह पार्टियों में से सिर्फ कांग्रेस और एआईयूडीएफ का आधार है।

असम में महागठबंधन के प्रयास विफल होंगे!

असम में चार महीने के बाद विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले विपक्षी एकता की कोई कोशिश सिरे नहीं चढ़ रही है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और लगातार तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई के निधन के बाद विपक्षी एकता की  संभावना और कम हो गई है

बंगाल में क्या महागठबंधन की जरूरत है

क्या बिहार या झारखंड की तरह पश्चिम बंगाल में भी महागठबंधन की जरूरत है? कई जानकार मान रहे हैं कि बंगाल में जिस तरह से भाजपा की ताकत बढ़ रही है और जैसा माहौल बन रहा है उसे देखते हुए भाजपा को रोकने के लिए सभी पार्टियों को साथ आना होगा

बोडोलैंड में भाजपा का नया गठबंधन

बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद, बीटीसी के चुनाव में भाजपा नया गठबंधन बना कर अपनी सरकार बनाएगी। भाजपा ने दो पार्टियों के साथ गठबंधन बनाया है।

डीएमके, कांग्रेस का तालमेल तय!

कांग्रेस पार्टी ने अगले साल होने वाले पांच राज्यों के चुनाव से छह महीने पहले ही चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि यह तैयारी हर राज्य में नहीं दिख रही है। पश्चिम बंगाल, असम में अभी तक पार्टी को समझ में नहीं आ रहा है कि वह कैसे आगे बढ़े।

भाजपा के साथ अन्नाद्रमुक रहेगी

तमिलनाडु में सत्ताधारी अन्नाद्रमुक ने कहा कि भाजपा के साथ उसका गठबंधन 2021 विधानसभा चुनावों के लिये भी बरकरार रहेगा और भरोसा जताया कि वह अगले साल लगातार तीसरी बार चुनाव जीतेगी।

मोदी कैबिनेट बिना सहयोगी मंत्री के!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। उन्होंने करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी अपनी कैबिनेट में फेरबदल नहीं की इसके बावजूद अपने आप उसका स्वरूप बदल रहा है। पिछले साल 30 मई को जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी कैबिनेट के साथ शपथ ली थी तब उसमें सहयोगी पार्टियों के तीन कैबिनेट मंत्री थे। अब सहयोगी पार्टी का एक भी कैबिनेट मंत्री नहीं है। सहयोगी पार्टियों में से अब सिर्फ रामदास अठावले अकेले बचे हैं, जो सरकार का हिस्सा हैं। आरपीआई के नेता रामदास अठावले मोदी सरकार में राज्य मंत्री हैं। पिछले साल 30 मई को कैबिनेट मंत्री के तौर पर अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल, शिव सेना के नेता अरविंद सावंत और लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने शपथ ली थी। भाजपा की पुरानी सहयोगी जनता दल यू से भी एक कैबिनेट मंत्री बनाया जाना था पर प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व दिए जाने के विरोध में नीतीश कुमार ने शपथ लेने को तैयार बैठे आरसीपी सिंह को रोक दिया था। भाजपा की और सहयोगी अपना दल को पिछली सरकार में राज्यमंत्री का पद मिला था पर इस बार उन्हें वह भी नहीं मिला। बहरहाल, सबसे पहले शिव सेना सरकार से… Continue reading मोदी कैबिनेट बिना सहयोगी मंत्री के!

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