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Tuesday, April 13, 2021
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लुटेरी दुल्हन : चार फेरे लेने का बाद बाथरूम के बहाने हुई फरार, पंडित से लेकर परिजन तक निकले फर्जी

New Delhi: देश में लगातार शादियों में होने वाली ठगी के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. ऐसा ही एक मामला UP के मेरठ (Meerut) से सामने आया है. यहां एक शाही समारोह के दौरान दौरान ही...

शरणार्थियों से बेरुखी क्यों?

म्यांमार के शरणार्थियों के मामले में भारत सरकार ने क्यों निर्मम रुख अपना रखा है, इसे समझना मुश्किल है। रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में सरकार के ऐसे रुख पर समझा गया था कि चूंकि रोहिंग्या मुसलमान हैं, इसलिए ये...

म्यांमारः भारत दृढ़ता दिखाए

म्यांमार में सेना का दमन जारी है। 600 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। आजादी के बाद भारत के पड़ौसी देशों— पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, मालदीव— आदि में कई बार फौजी और राजनीतिक तख्ता-पलट हुए और उनके खिलाफ इन...

म्यांमार पर कूटनीति अब ठीक

मैने चार-पांच दिन पहले लिखा था कि म्यांमार (बर्मा) में चल रहे नर-संहार पर भारत चुप क्यों है ? उसका 56 इंच का सीना कहां गया लेकिन अब मुझे संतोष है कि भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ और...

अभी भी क्लाइमेट जस्टिस के लिए लड़ रही हूं : दिशा रवि

कथित टूलकिट मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा अपनी गिरफ्तारी के एक महीने बाद, 22 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता दिशा ए. रवि ने कल अपने ट्विटर अकाउंट पर अपने चार पेज के बयान पोस्ट किए।

कहानी से संभलेगी बात?

म्यांमार के सैनिक शासक अपनी छवि सुधारना चाहते हैं। यानी वे चाहते हैं कि जिस तरह का दमन कर रहे हैं, दुनिया उस पर ध्यान ना दे। या ध्यान दे तो यह समझे कि आखिर वे क्यों ऐसा कर रहे हैं।

29 साल के मैनुद्दीन ने एक साल पहले मन्नू यादव बनकर 20 साल की युवती से मंदिर में की थी शादी, ऐसे हुआ खुलासा

Gorakhpur:  देश में बीते कुछ महीनों में  लव जिहाद(love jihad) को लेकर काफी विवाद हुआ था. जिसके बाद देश  के कई राज्यों में इस पर कानून बनाने को लेकर भी विवाद शुरु हो गया था. इन सबके बाद एक...

जहां चाह, वहां राह

म्यांमार में इस बार सैनिक शासकों के लिए पहले जैसी आसानी नहीं है। इस बार वहां की जनता ने साफ कर दिया है कि उन्हें लोकतंत्र का गला घोंटा जाना मंजूर नहीं है

एक जज और देश का मन

मैं 1975 की इमरजेंसी के युवा मन पर जेएनयू में हुए अनुभव में मानवाधिकारों और सिविल लिबर्टी का घनघोर समर्थक रहा हूं।

काश ये अपवाद ना होता!

पर्यावरणवादी कार्यकर्ता दिशा रवि की जमानत पर उचित ही है कि देश के एक बड़े हलके में राहत महसूस की गई है। उससे भी राहत उन बातों से महसूस की गई है
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कोरोना की दूसरी लहर से बचें!

लोगों को सरकारों के फैलाए झूठ में नहीं फंसना चाहिए और न नेताओं के आचरण का अनुसरण करना चाहिए।...
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