विमानन क्षेत्र की विडंबना
हितों के टकराव को रोकने के लिए यह नियम बनाया गया था। लेकिन अब अडानी समूह ने एयरलाइन क्षेत्र में उतरने की योजना बनाई है, तो वर्तमान सरकार प्रतिबंध पर पुनर्विचार के लिए तैयार हो गई है। साल 2006 में जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों को निजी हाथ में देने का निर्णय लिया, तो उसके साथ यह नियम तय किया गया था कि एयरपोर्ट संचालक किसी कंपनी को विमान सेवा चलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हितों के टकराव को रोकने के लिए तब ये नियम जरूरी समझा गया। लेकिन अब चूंकि अडानी समूह ने...