कांग्रेस का घटता राजनीतिक स्पेस

शायद ही किसी को याद होगा कि 2014 के बाद से पिछले सात साल में राहुल गांधी कितनी बार मीडिया के सामने आकर अपनी हार कबूल कर चुके हैं। यह उनकी भलमनसाहत है और साहस भी है कि पार्टी चुनाव हारती है तब भी वे मीडिया के सामने आते हैं और हार स्वीकार करते हैं। लेकिन सवाल है कि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता कब तक उन्हें हार कबूल करते देखते रहेंगे? एकाध अपवादों को छोड़ दें तो पिछले सात साल में हर चुनाव के बाद राहुल को हार स्वीकार करनी होती है। कांग्रेस एक के बाद एक चुनाव हारती जा रही है। राज्यों के चुनाव में, जहां उसके पास मजबूत सहयोगी हैं वहां भी कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। यह हैरानी की बात है कि गठबंधन में कांग्रेस के प्रादेशिक सहयोगी को तो लोग वोट दे दे रहे हैं पर कांग्रेस को नहीं दे रहे हैं। झारखंड जैसे राज्य का एकाध अपवाद जरूर है पर बिहार से लेकर असम, केरल और तमिलनाडु तक की राजनीति का सच यह है कि कांग्रेस मजबूत सहयोगी होने के बावजूद अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। क्या यह कांग्रेस का या राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस का एंडगेम… Continue reading कांग्रेस का घटता राजनीतिक स्पेस

विजयन, सोनोवाल का राज लौटा, डीएमके भी जीती

नई दिल्ली। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल को छोड़ कर बाकी पांच राज्यों में वास्तविक नतीजे लगभग वैसे ही आए, जैसे एक्जिट पोल में बताया गया था। तमिलनाडु में एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने शानदार जीत दर्ज की तो केरल में कम्युनिस्ट पार्टी का राज लगातार दूसरी बार लौटा। असम में भी भाजपा लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में कामयाब रही। पुड्डुचेरी में कांग्रेस चुनाव हार गई है और रंगास्वामी की पार्टी एनआर कांग्रेस के साथ तालमेल में भाजपा पहली बार सत्ता में आई है। तमिलनाडु में लगातार दो चुनाव हारने के बाद एमके स्टालिन का जादू चला। करुणानिधि और जयललिता की गैरहाजिरी में हुए पहले चुनाव में स्टालिन की कमान में डीएमके गठबंधन ने 154 सीटों के साथ शानदार जीत दर्ज की। स्टालिन की पार्टी डीएमके को अकेले दम पर पूर्ण बहुमत मिला। उनकी पार्टी ने 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े को अपने दम पर पार कर लिया। उसने अकेले 119 सीटें मिलीं और उसकी सहयोगी कांग्रेस पार्टी भी 16 सीटें जीतने में कामयाब रही। सत्तारूढ़ अन्ना डीएमके को बड़ा झटका लगा और देर रात तक नतीजों और रूझानों में वह सिर्फ 80 सीटें जीतने में कामयाब होती दिखी। तमिल और हिंदी… Continue reading विजयन, सोनोवाल का राज लौटा, डीएमके भी जीती

कांग्रेस पर पूर्व कांग्रेसियों की नजर!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे आने से पहले कई पार्टियों में अंदरखाने राजनीतिक हलचल चल रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कोलकाता में अपनी पार्टी के नेताओं की बैठक की है। वैसे तो यह बैठक चुनाव नतीजों को लेकर हुई थी लेकिन बताया जा रहा है कि इसमें नतीजों के बाद की राजनीति पर चर्चा हुई है। तृणमूल कांग्रेस के एक जानकार नेता का कहना है कि पार्टी पूर्ण बहुमत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है और इसलिए पार्ट की बैठक में नतीजों के बाद राष्ट्रीय राजनीति की संभावना को लेकर ज्यादा बात हुई। दिलचस्प बात यह है कि तृणमूल नेताओं ने नतीजों के बाद की कांग्रेस की राजनीति को लेकर भी चर्चा की। असल में कांग्रेस छोड़ कर गए कई और नेताओं की नजर कांग्रेस पार्टी पर है। चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस के अंदर घमासान छिड़ने की संभावना है। अगर एक्जिट पोल के नतीजे सही होते हैं और कांग्रेस केरल व असम दोनों जगह हारती है तो कांग्रेस की राजनीति में कुछ तो उथल-पुथल होगी। अगर एक्जिट पोल के नतीजे सही साबित होते हैं तो राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष का नेतृत्व नए नेता के हाथ में जा सकता… Continue reading कांग्रेस पर पूर्व कांग्रेसियों की नजर!

पांच राज्यों में वोटों की गिनती आज

नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए हुए मतदान के बाद अब वोटों की गिनती की बारी है। रविवार को पांचों राज्यों में वोटों की गिनती होगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनावों के लिए वोटों की गिनती रविवार को ही होगी। हाई कोर्ट ने कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से वोटों की गिनती पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने कोरोना के लिए जारी दिशा-निर्देशों के साथ साथ मतगणना के दिन के लिए कुछ नए गाइडलाइंस भी जारी किए हैं। बहरहाल, पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा दिलचस्पी वाला राज्य पश्चिम बंगाल है, जहां लगातार दो बार से चुनाव जीत रही तृणमूल कांग्रेस को भाजपा ने बड़ी चुनौती दी है। चुनाव के बाद हए एक्जिट पोल में दोनों के बीच लगभग बराबरी का मुकाबला दिखाया गया है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस का पलड़ा भारी दिख रहा है। राज्य में कांग्रेस, सीपीएम और आईएसएफ के गठबंधन का सूपड़ा साफ होने की संभावना है। बंगाल में आठ चरण में मतदान हुआ था, जिसका आखिरी चरण 29 अप्रैल को पूरा हुआ। बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी के चुनाव नतीजे भी दो मई को आएंगे। तमिलनाडु में डीएमके… Continue reading पांच राज्यों में वोटों की गिनती आज

जो मिलेगा वह भाजपा की जीत होगी!

पांच राज्यों के चुनाव नतीजे भाजपा के लिए बहुत अहम हैं। लेकिन यह समझने की बात है कि असम छोड़ कर भाजपा के पास इन राज्यों में गंवाने के लिए कुछ नहीं है। मीडिया में यह विमर्श जरूर बना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा हारेगी और तृणमूल कांग्रेस जीतेगी। लेकिन यह अधूरी बात है। पश्चिम बंगाल में भाजपा को हारने के लिए कुछ नहीं है और जीतने के लिए सत्ता है। उसको पिछले विधानसभा चुनाव में सिर्फ तीन सीटें मिली थीं। अगर वह एक सौ सीट जीतती है तो यह उसकी बहुत बड़ी जीत होगी। इसे हारना नहीं कह सकते हैं। हां, यह कह सकते हैं कि भाजपा बंगाल नहीं जीत सकी। लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि वह हारेगी नहीं, उसे जो भी मिलेगा वह उसकी जीत होगी। इसी तरह पिछले चुनाव में केरल में भाजपा को सिर्फ एक सीट मिली थी और तमिलनाडु में उसका खाता भी नहीं खुला था। पुड्डुचेरी में भी उसके पास तीन विधायक थे, जिनको केंद्र सरकार ने मनोनीत किया था। यानी वहां भी पार्टी कोई भी सीट नहीं जीत सकी थी। अगर इस बार एनआर कांग्रेस और अन्ना डीएमके के साथ मिल कर भाजपा पुड्डुचेरी में सरकार में आती है तो यह… Continue reading जो मिलेगा वह भाजपा की जीत होगी!

नतीजों से फोकस हटवाने की कोशिश

कांग्रेस पार्टी के नेताओं का एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो विधानसभा चुनाव के नतीजों से फोकस हटवाना चाहता है। राहुल गांधी की टीम के नेता ऐसा चाहते हैं कि चुनाव नतीजों पर ज्यादा ध्यान नहीं रहे क्योंकि उनको लग रहा है कि कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं होने जा रहा है। केरल और असम में पार्टी को एक्जिट पोल के अनुमानों से धक्का लगा है। पार्टी का अपना आकलन भी है कि सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं आएगा। इसी तरह पश्चिम बंगाल पार्टी दहाई के आंकड़े में बड़ी मुश्किल से पहुंच पाएगी। तमिलनाडु में जरूर उसका प्रदर्शन अच्छा होगा पर वह अपनी वजह से नहीं, बल्कि डीएमके की वजह से होगा। तभी कांग्रेस के नेता चाहते हैं कि नतीजों पर ज्याद चर्चा न हो, बल्कि मीडिया का भी सारा विमर्श कोरोना पर रहे। तभी एक्जिट पोल के नतीजों के दिन कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने लाइव डिबेट में इस पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश में लोग मर रहे हैं और चैनलों पर एक्जिट पोल का जश्न मनाया जा रहा है। सबको पता है कि नतीजों पर जितनी ज्यादा चर्चा होगी, राहुल के नेतृत्व पर उतने सवाल उठेंगे। आखिर केरल से वे सांसद हैं और केरल… Continue reading नतीजों से फोकस हटवाने की कोशिश

एक्जिट पोल का कोई मतलब नहीं

पश्चिम बंगाल में आखिरी चरण के मतदान के बाद 29 अप्रैल को आए एक्जिट पोल के नतीजों में बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच लगभग बराबरी का मुकाबला दिखाया गया है। लेकिन यह यकीन करने लायक नहीं है। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता है कि यह गलत ही होगा या सही ही होगा, लेकिन यह तय है कि यह आकलन किसी वैज्ञानिक विधि पर आधारित नहीं है। इसका कारण यह है कि एक्जिट पोल का सैंपल साइज बहुत छोटा है। दूसरे, आखिरी चरण के मतदान का पूरी तरह से खत्म भी नहीं हुआ था कि चैनलों ने अनुमान बताने शुरू कर दिए। जाहिर है यह अनुमान पहले सात चरण की वोटिंग पर आधारित है। तीसरे, किसी चैनल के पास वोट का प्रतिशत नहीं है। ध्यान रहे वोट प्रतिशत से सीटें तय होती हैं, सीटों की संख्या बताने से वोट प्रतिशत का पता नहीं चलता है। एक्जिट पोल के नतीजों के बेमतलब होते जाने का कारण सर्वेक्षण करने वाली एजेंसियां और उन्हें दिखाने वाले मीडिया समूहों का इतिहास है। पिछले कई वर्षों से मीडिया समूह और एजेंसियां इतने पूर्वाग्रह के साथ सर्वेक्षण करती हैं कि लगभग हर बार गलत साबित होती हैं। पिछले साल के अंत में बिहार… Continue reading एक्जिट पोल का कोई मतलब नहीं

कोरोना में चुनाव आयोग भी जिम्मेदार!

वैसे तो पिछले कुछ वर्षों में भारत की लगभग सभी संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र के कथित स्तंभों ने अपनी साख गंवाई है लेकिन जैसी अक्षमता और लापरवाही चुनाव आयोग के कामकाज में देखने को मिली है वह अभूतपूर्व है। इस समय अगर पूरा देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर के भंवर में फंसा है तो कहीं न कहीं चुनाव आयोग भी इसके लिए जिम्मेदार है। अगर पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हिंसक और जहरीला हुआ है तो उसके लिए भी आयोग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है। अगर केंद्रीय सुरक्षा बलों की साख पर बट्टा लगा है और उनकी गोलीबारी में चार बेकसूर लोग मारे गए हैं तो उसके लिए भी चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बनती है। अगर राज्य का प्रशासन पार्टी लाइन पर बंटा हुआ दिख रहा है या संघीय ढांचे पर चोट हुई है या चुनाव में धनबल का इस्तेमाल ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंचा है तो चुनाव आयोग इसकी जिम्मेदारी से भी नहीं बच सकता है। अगर आज चुनाव आयोग पर यह आरोप लग रहा है कि वह भाजपा और केंद्र सरकार के कहे अनुसार काम कर रही है और विपक्षी पार्टियों के साथ भेदभाव कर रही है तो इसके लिए भी खुद आयोग जिम्मेदार है। पश्चिम… Continue reading कोरोना में चुनाव आयोग भी जिम्मेदार!

राजनीतिः सेवा नहीं, मेवा है

देश के सिर्फ पांच राज्यों में आजकल चुनाव हो रहे हैं। ये पांच राज्य न तो सबसे बड़े हैं और न ही सबसे अधिक संपन्न लेकिन इनमें इतना भयंकर भ्रष्टाचार चल रहा है, जितना कि हमारे अखिल भारतीय चुनावों में भी नहीं देखा जाता। अभी तक लगभग 1000 करोड़ रु. की चीजें पकड़ी गई हैं, जो मतदाताओं को बांटी जानी थीं। इनमें नकदी के अलावा शराब, गांजा-अफीम, कपड़े, बर्तन आदि कई चीजें हैं। गरीब मतदाताओं को फिसलाने के लिए जो भी ठीक लगता है, उम्मीदवार लोग वही बांटने लगते हैं। ये लालच तब ब्रह्मास्त्र की तरह काम देता है, जब विचारधारा, सिद्धांत, जातिवाद और संप्रदायवाद आदि के सारे पैंतरे नाकाम हो जाते हैं। कौनसी पार्टी है, जो यह दावा कर सके कि वह इन पैंतरों का इस्तेमाल नहीं करती ? बल्कि, कभी-कभी उल्टा होता है। कई उम्मीदवार तो अपने मतदाताओं को रिश्वत नहीं देना चाहते हैं लेकिन उनकी पार्टियां उनके लिए इतना धन जुटा देती हैं कि वे रिश्वत का खेल आसानी से खेल सकें। पार्टियों के चुनाव खर्च पर कोई सीमा नहीं है। हमारा चुनाव आयोग अपनी प्रशंसा में चुनावी भ्रष्टाचार के आंकड़े तो प्रचारित कर देता है लेकिन यह नहीं बताता कि कौनसी पार्टी के कौनसे उम्मीदवार के… Continue reading राजनीतिः सेवा नहीं, मेवा है

चुनाव आयोग ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

कोलकाता। केंद्रीय चुनाव आयोग ने कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में चुनाव प्रचार, रैलियों और रोडशो आदि को लेकर बातचीत की जाएगी। गौरतलब है कि चुनाव प्रचार के दौरान हो रही रैलियों और रोडशो में कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा। पिछले दिनों चुनाव आयोग ने निर्देश जारी किया था कि सबको कोरोना गाइडलाइंस का पालन करना है और पालन नहीं करने पर सभा रद्द कर दी जाएगी। लेकिन किसी पार्टी पर इस निर्देश का कोई असर नहीं पड़ा। बताया जा रहा है कि सर्वदलीय बैठक में सभी पार्टियों को चुनाव प्रचार के बारे में जरूरी निर्देश दिए जाएंगे और कोरोना से जुड़े दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा जाएगा। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में तेजी से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं और एक दिन में मिलने वाले मरीजों की संख्या चार हजार से ऊपर पहुंच गई है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की एक टीम चुनाव आयोग से मिली है। तृणमूल सांसदों ने आपित्तजनक भाषणों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रचार पर रोक लगाने की मांग की है। गौरतलब है कि आपत्तिजनक… Continue reading चुनाव आयोग ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

क्या हर राज्य में त्रिशंकु विधानसभा होगी?

यह कमाल इस बार विधानसभा में हो सकता है कि पांच राज्यों के चुनाव के बाद हर राज्य में त्रिशंकु विधानसभा बनी हुई दिखे। हालांकि पश्चिम बंगाल में चुनाव पूर्व तमाम सर्वेक्षणों में कहा गया है कि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सीटें कम होंगी फिर भी वे बहुमत हासिल कर लेंगी। उनको पिछली विधानसभा में 211 सीटें मिली थीं। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में उनको 23 ही सीटें मिलीं, जिससे इस बार उनकी सीटें घटने का अनुमान लगाया जा रहा है। फिर भी पश्चिम बंगाल एकमात्र राज्य होगा, जहां किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलेगा। इसके अलावा बाकी चार राज्यों में किसी पार्टी के लिए बहुमत हासिल करना मुश्किल होगा। असम में पिछले चुनाव में भाजपा ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था तो उसे 62 सीटें मिली थीं, जो बहुमत से एक कम थी। उसने अपनी सहयोगी असम गण परिषद और बीपीएफ के साथ मिल कर सरकार बनाई थी। इस बार भाजपा और उसकी सहयोगियों की सीटें कम हो सकती हैं। दूसरी ओर कांग्रेस, एआईयूडीएफ, बीपीएफ और लेफ्ट गठबंधन की सीटें बढ़ सकती हैं। ऐसे में विधानसभा बुरी तरह से त्रिशंकु होगी। केरल में पहले से दोनों गठबधनों की एक दर्जन पार्टियां साथ मिल कर लड़ती हैं… Continue reading क्या हर राज्य में त्रिशंकु विधानसभा होगी?

नतीजों से पहले खरीद-फरोख्त का हल्ला!

पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी कि 2016 से 2020 के बीच पाला बदल कर दूसरी पार्टियों में जाने और उसकी टिकट से चुनाव लड़ने वाले विधायकों में से 45 फीसदी विधायक भाजपा में गए हैं। 2016 से 2020 के बीच कुल 405 विधायकों ने अपनी पार्टी छोड़ी, जिनमें से 182 लोग भाजपा में गए और उसकी टिकट से चुनाव लड़े। इन चार सालों में मध्य प्रदेश, मणिपुर, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक में विधायकों की दलबदल से सरकार गिरी और भाजपा की सरकार बनी। भाजपा ने अपनी इस उद्यमशीलता का अब विस्तार कर दिया है। पहले चुनाव जीतने वाले विधायकों को तोड़ कर भाजपा अपने साथ लाती थी और उनकी मदद से सरकार बनाती थी। लेकिन अब चुनाव जीतने से पहले ही उसने खरीद-फरोख्त शुरू कर दिया है। असम और पश्चिम बंगाल में विपक्षी पार्टियों के सामने अभी से बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि वे अपने संभावित विधायकों को कैसे बचाएं। असम में तो भाजपा ने चुनाव की अधबीच बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के एक उम्मीदवार को तोड़ कर अपने साथ कर लिया और बीपीएफ को न चुनाव आयोग से कोई राहत मिली न सुप्रीम कोर्ट से। तभी बीपीएफ ने अब अपने बचे हुए 11 उम्मीदवारों को किसी… Continue reading नतीजों से पहले खरीद-फरोख्त का हल्ला!

केरल, बंगाल, पुड्डुचेरी में भी सस्पेंस

असल में तमिलनाडु को छोड़ कर बाकी चारों राज्यों में जहां चुनाव हुआ है या हो रहा है वहां नतीजों को लेकर सस्पेंस हैं। इसलिए अभी से संभावित विधायकों की पहचान की जाने लगी है और खरीद-फरोख्त की तैयारी होने लगी है। असम तो चर्चा में आ गया क्योंकि एआईयूडीएफ और बीपीएफ ने अपने उम्मीदवारों को राज्य से बाहर भेजा। लेकिन इस तरह का घटनाक्रम केरल, पश्चिम बंगाल और पुड्डुचेरी में भी हो रहा है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ के बीच कांटे का मुकाबला है। माना जा रहा है कि अगर भाजपा दो-चार सीट जीतने में कामयाब हो जाती है तो विधानसभा त्रिशंकु भी हो सकती है। सो, अभी से कांग्रेस और लेफ्ट अपने अपने गठबंधन की छोटी पार्टियों के उम्मीदवारों पर नजरें गड़ाए हुए हैं। ( suspense-bjp) पुड्डुचेरी में 30 सदस्यों की विधानसभा है। इसके ऊपर से तीन सदस्य मनोनीत होते हैं, जो केंद्र सरकार करती है। सो, भाजपा के पास तीन सीटों का एडवांटेज है। वह वैसे तो ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस और अन्ना डीएमके के साथ मिल कर चुनाव लड़ी है। लेकिन उसकी मंशा अपना मुख्यमंत्री बनाने की है। इसलिए वह अभी से कांग्रेस और डीएमके उम्मीदवारों में… Continue reading केरल, बंगाल, पुड्डुचेरी में भी सस्पेंस

चुनाव हर साल हो तो अच्छा!

नरेंद्र मोदी जिस दिन से प्रधानमंत्री बनें हैं उस दिन से एक देश, एक चुनाव की बात कर रहे हैं, लेकिन उसके बाद से ही जिस तरह चुनाव आयोग एक-एक राज्य में आठ-आठ चुनाव करा रहा है उससे लगता है कि प्रधानमंत्री यह बात मजाक में कहते हैं। असल में वे भी चाहते हैं कि चुनाव कई चरणों में हो ताकि वे सब जगह जाकर प्रचार कर सकें। हो सकता है कि हर साल कई चरणों में होने वाले मतदान उनके लिए अच्छे हों लेकिन यह देश के लोगों के लिए अच्छा है कि हर साल चुनाव होता रहे। जैसे इसी साल देखें, जब से चुनाव की घोषणा हुई है तब से एक बार भी पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं। उससे पहले तीन महीने का रिकार्ड उठा कर देखें। दिसंबर से फरवरी के अंत तक 30 बार से ज्यादा दाम बढ़े थे और दोनों ईंधनों की कीमत में प्रति लीटर 10 रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। रसोई गैस के सिलिंडर की कीमत तो दिसंबर से फरवरी के बीच दो सौ से ज्यादा बढ़ गई। लेकिन फरवरी के अंत में चुनाव की घोषणा हुई और उसके बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने बंद हो गए। उलटे पिछले… Continue reading चुनाव हर साल हो तो अच्छा!

मतदान के दिन प्रचार का सिलसिला जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मतदान के दिन चुनावी रैलियां करने का रिकार्ड कायम है। प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उन्होंने यह शुरू किया था कि कई चरणों में मतदान वाले राज्यों में वे उस दिन जरूर रैली करने जाते हैं, जिस दिन मतदान चल रहा होता है। जिस क्षेत्र में मतदान हो रहा होता है उसके पास उन क्षेत्रों में उनकी रैली होती है, जहां अगले चरण में मतदान होना होता है। पश्चिम बंगाल के मतदान में भी यह रिकार्ड कायम रहा है। शनिवार को जिस समय 44 सीटों पर चौथे चरण का मतदान चल रहा था उसी समय प्रधानमंत्री ने सिलिगुड़ी और कृष्णानगर में चुनावी रैली को संबोधित किया। बंगाल में यह तीसरा मौका है, जब प्रधानमंत्री ने मतदान के दिन चुनावी रैली को संबोधित किया। जिस एक चरण के मतदान के दिन वे चुनावी रैली नहीं कर पाए थे उस दिन वे बांग्लादेश में थे और वहीं पर उनके ऐसे कार्यक्रम बने थे, जिससे बंगाल के चुनाव पर सीधा असर हुआ। वे मतुआ समुदाय के एक मंदिर में गए थे। ध्यान रहे बंगाल में भाजपा पिछले काफी समय से मतुआ समुदाय का वोट लुभाने का प्रयास कर रही है। बहरहाल, एक अप्रैल को जिस दिन ममता बनर्जी… Continue reading मतदान के दिन प्रचार का सिलसिला जारी

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