चीन के आगे अमेरिका है साथ

चीन की नियत पर गुरूवार को खबर थी कि वह सीमा पर से सेना पीछे नहीं हटा रहा है। कई राउंड बातचीत में अलग-अलग पोजिशन से पीछे हटने की सहमति के बावजूद चीनी सेना देपसांग, और गोगरा-हॉट स्प्रिंग, पैंगोंग सो-पैंगांग झील के फिंगर क्षेत्र मेंसैनिक जस के तस तैनात किए हुए है।

भारत डटे, लड़े चीन से!

यह मैं कई बार लिख चुका हूं। लेकिन पिछले दस दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चीन को घेरने की जितनी कार्रवाईयां हुई हैं, चीन जितना बदनाम हुआ है उनके चलते भारत के लिए वक्त है चीन को आंखे दिखाने का।

चीन को दिखलानी होगी ताकत!

चीन पर हम वैसे नहीं सोचते हैं, जैसे पाकिस्तान पर सोचते हैं। तभी दोनों सीमाओं पर सतर्कता में फर्क है। भारत में लोग हैरान हुए थे यह जान कर कि चीनी सीमा पर भारत के निहत्थे सैनिक तैनात हैं।

न्यूज एजेंसी और सेना के सूत्र?

भारत और चीन की सीमा पर पूर्वी लद्दाख में वास्तविक स्थिति क्या है यह पता नहीं चल पा रहा है। इसका कारण यह है कि सरकार आधिकारिक रूप से कुछ नहीं बता रही है।

चीन की बदमाशी की नई मिसाल

चीन को लेकर भारत कई किस्म के मुगालतों में रहता है। उनमें से एक भ्रम भारत ने यह पाला था कि सैन्य व कूटनीतिक वार्ता और सहमति के बाद अब चीन पीछे हट जाएगा

समझे, चीन हमसे कैसा व्यवहार करता है?

चीन कैसे भारत को ट्रीट करता है? कैसे भारत से झगड़ता है? जवाब जानेंगे तो चीन की नियत, उसका भारत के प्रति भाव जहांसमझेंगे वहीं भारत की बेबसी भी। आप अपने घर में रहते हैं। अचानक एक दिन मोहल्ले का गुंड़ा आपके घर में घुस आता है।

चीन के साथ सिर्फ सीमा विवाद नहीं

लद्दाख से लेकर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी पर चीन के साथ चल रहा गतिरोध सिर्फ सीमा विवाद नहीं है। अगर यह सिर्फ सीमा विवाद होता तो कब का इसे निपटाया जा चुका होता।

भारत कैसे करे सीमा रक्षा?

भारत लड़े या न लड़े? भारत को अपनी अखंडता- सार्वभौमता की रक्षा में लड़ना चाहिए या नहीं? वह कैसे लड़े?  कौन है दुश्मन? वह चीन से लड़े या पाकिस्तान से? क्या दोनो से  उसकी लड़ाई नहीं है? दोनों क्या उसके दुश्मन नहीं है

चीन को भारत की परवाह नहीं है

भारत के नेता भले कह रहे हैं कि चीन के साथ बातचीत चल रही है, विवाद सुलझाए जा रहे हैं और चीन की सेना पीछे हट रही है पर ऐसा लग रहा है कि असल में चीन को भारत की कतई परवाह नहीं है। वह एक जगह वार्ता करके समझौता करता है और उसी बीच दूसरी जगह मोर्चा खोल देता है। उसने नया मोर्चा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में खोला है, जहां उसने तीन बड़े बांध बनाने का काम शुरू किया है। सोचें, अगर उसे भारत की परवाह होती तो क्या वह ऐसा कर सकता था? यह भी ध्यान देने की बात है कि पाकिस्तान के साथ मिल कर चीन ने जिस इलाके में बांध बनाने का काम शुरू किया है वह विवादित इलाका है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस इलाके को विवादित घोषित किया है इसके बावजूद चीन वहां निर्माण कार्य कर रहा है। वह इस इलाके के पानी को कंट्रोल करना चाहता है। सोचें, अगर भारत पूर्वी या उत्तरी सीमा पर कहीं किसी विवादित इलाके में निर्माण कार्य शुरू करे तो चीन की क्या प्रतिक्रिया होगी? चीन किसी हाल में भारत को निर्माण नहीं करने देगा पर वह खुद संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विवादित घोषित किए… Continue reading चीन को भारत की परवाह नहीं है

देपसांग में चीन ने तैनात की सेना

भारत के साथ कई दौर की सैन्य व कूटनीतिक वार्ताओं के बाद भी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उसने पूर्वी लद्दाख के गलवान सहित कई इलाकों से पीछे हटने की बात कही और सेना हटानी भी शुरू की पर वहां की बजाय लद्दाख के कई इलाकों में उसने अपने सैनिक तैनात कर दिए हैं।

राहुल गांधी के बयान पर भाजपा-कांग्रेस में तकरार

भारत-चीन की सीमा पर चल रहे तनाव को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान पर भाजपा और कांग्रेस के बीच तकरार हो रही है

गरीब की जोरू बन गया है भारत!

भारत के लोक मानस में एक कहावत प्रचलित है‘गरीब की जोरू सबकी भौजाई’ यानी उसके साथ जो चाहे मजाक कर सकता है, छेड़छाड़ कर सकता है। इन दिनों भारत की स्थिति ऐसी ही होती जा रही है।

जब संबंध बिगड़ते हैं

इन दिनों भारत में चीन के बायकॉट की मुहिम चल रही है। चीनी उत्पादों के साथ- साथ अब निशाने पर चीनी ऐप भी हैं। हालांकि ये मुहिम वास्तव में कितनी कामयाब होगी, कहना कठिन है। इसलिए कि भारत के बहुत से नामी स्टार्ट-अप्स असल में चीनी फंडिंग से चल रहे हैं।

अचानक ये तनाव कैसे?

यह हैरतअंगेज है। दुनिया भर का जन मानस कोरोना वायरस की महामारी से त्रस्त है। उसकी अभी सीमा तनाव जैसे मसलों में शायद ही कोई रुचि है।

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