सरकार ने बीपीसीएल बेचने के लिए बोलियां आमंत्रित की

सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) में अपनी पूरी 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए आज बोलियां आमंत्रित की।

बीपीसीएल में हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां आमंत्रित

सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) में अपनी संपूर्ण 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए शनिवार को बोलियां आमंत्रित की।

कंपनियों की बिक्री से सरकार का खर्च!

भारत सरकार 24 सरकारी कंपनियों को बेचने जा रही है। चालू वित्त वर्ष में उसने एक लाख पांच हजार करोड़ रुपए विनिवेश यानी सरकारी कंपनियों को बेच कर जुटाने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य पूरा नहीं होता दिखा तो मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को भी बेचने का फैसला अब लिया गया है।

आईओसी,बीपीसीएल पर बोली लगाने की अनुमति नहीं

सरकार ने संकेत दिया है कि इंडियन आयल कॉरपोरेशन (आईओसी) तथा सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनियों को भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बोली लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बीपीसीएल के अधिग्रहण के लिए किसी भी खरीदार को करीब 90,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।

भारत को पूरी तरह बेच रही सरकार : कांग्रेस

कांग्रेस ने गुरुवार को भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर लाभदायक सार्वजनिक उद्यमों का विनिवेश करने और साथ ही देश को पूरी तरह बेचने का आरोप लगाया। कांग्रेस महासचिव के. सी वेणुगोपाल ने  कहा, “यह सरकार भारत को पूरी तरह से बेचने जा रही है।

विपक्ष हंगामे के कारण राज्यसभा में नहीं हो सका शून्यकाल

चुनावी बाैंड और सार्वजनिक क्षेत्रों में विनिवेश को लेकर कांग्रेस और वामदलों द्वारा चर्चा कराये जाने के लिए दिये गये नोटिस को खारिज किये जाने से नाराज इन दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण गुरूवार को राज्यसभा में शून्यकाल नहीं हो सका और कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गयी।

बीपीसीएल समेत 5 कंपनियों की हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कैबिनेट ने पांच कंपनियों में विनिवेश को मंजूरी दे दी है। इन कंपनियों में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और टीएचडीसीआईएल है। बीपीसीएल में केंद्र की हिस्सेदारी 53.29 फीसदी है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन कंपनियों में मैनेजमेंट कंट्रोल भी सरकार ने छोड़ने का फैसला किया है। बड़ी बात यह है कि नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन में सौ फीसदी विनिवेश होगा। सरकार ने कॉनकॉर में 30.8 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। बीपीसीएल और नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन के अलावा जिन और तीन कंपनियों में विनिवेश का फैसला किया गया है, वे हैं शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और टीएचडीसीआईएल। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी बीपीसीएल के विनिवेश से नुमालीगढ़ रिफाइनरी को अलग रखा गया है, इसमें सरकार विनिवेश करेगी।सरकार ने बीपीसीएल में 53.29 फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश का फैसला किया है, इसमें नुमालीगढ़ रिफाइनरी की 61 फीसदी हिस्सेदारी शामिल नहीं है।

सरकार कितनी कंपनियों को बेचेगी?

केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले दिनों कहा कि सरकार का काम कारोबार करना नहीं है। हालांकि इसके अलावा सरकार और कोई काम करती भी नहीं है। बाकी सारे काम तो भारत में भगवान भरोसे होते हैं। भारत में सरकार का मुख्य काम कारोबार करना ही है।

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