नए नजरिए की तलाश
हालांकि ब्रिक्स+ की अहमियत को कम करके नहीं आंका जा सकता, लेकिन इस समूह के भीतर उद्देश्य की एकता के अभाव के कारण इसके किसी नई विश्व व्यवस्था का सूत्रधार बनने की उम्मीद भी अभी नहीं है। मेजबान भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती 12-13 सितंबर को आयोजित ब्रिक्स+ शिखर सम्मेलन के दौरान सभी सदस्य देशों के बीच ऐसी आम सहमति तैयार करने की है, जिससे सम्मेलन के आखिर में साझा बयान जारी हो सके। किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता का एक पैमाना संयुक्त विज्ञप्ति होती है। इसे तैयार करने में फिलहाल सबसे बड़ी अड़चन ईरान और संयुक्त अरब अमीरात...