हे राम! मोदी-शाह ने लोकतंत्र का सब तो खा लिया!
यों रामजी को भी क्या याद करें! आखिर खुद रामजी को भी मोदी-शाह ने कम बेच नहीं खाया। उनके मंदिर तक को चोरों का अड्डा बनाया। रामजी भी सोचते होंगे इन दो इंसानों के अहंकार, भूख के नाश के लिए वे क्या अवतार धरें! या अभी इंतजार करें कि इनका और क्या-क्या खाना बाकी है? किस मर्यादा को इन्होने बख्शा है। मंदिर हो, सनातन धर्म की सत्यता, नैतिकता, चरित्र, मर्यादाओं को राक्षसों जैसे तहस-नहस किया है। लोकतंत्र, संसद, सरकार, जांच एजेंसियां, मीडिया, विश्वविद्यालयों, राज्यपाल, नौकरशाही, न्यायपालिका, लोकजीवन—सभी की ऐसी-तैसी की है। और पिछले दस महीनों से मां भारती की संतानों,...