cji surya kant

  • ऐसे तो ना बोलिये!

    कुछ बेरोजगार फर्जी डिग्रियां हासिल करते हैं, तो फर्जी डिग्री का धंधा चलने देने के लिए जिम्मेदार कौन है? और क्या ‘व्यवस्था’ की कमियों को उजागर करने के लिए आरटीआई कार्यकर्ताओं को अपमान भाव से देखा जाना चाहिए? कॉकरोच और परजीवी संबंधी अपनी टिप्पणी के बारे में भारत के प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्टीकरण दिया है। कहा कि उन्होंने इन शब्दों का उपयोग सभी युवाओं के लिए नहीं- बल्कि उन लोगों के लिए किया, जो फर्जी डिग्रियां लेकर वकील, मीडियाकर्मी या सोशल मीडियाकर्मी बन जाते हैं। बहरहाल, इस सफाई के बावजूद कुछ सवाल रह जाते हैं। क्या प्रधान न्यायाधीश को इस...