जंतर-मंतर के बाद
अवसरहीनता से जूझ रही नई पीढ़ी ‘अतीत के गौरव की वापसी’, ‘विकसित भारत’, या ‘विश्व गुरु’ जैसी कहानियों से प्रभावित नहीं है। वह मोदी सरकार से उसके 12 साल के कार्यकाल का हिसाब मांग रही है। एक मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर करने की कॉकरोच आंदोलन की सफलता से जनमत के एक हिस्से में “लोकतंत्र के जिंदा होने” का बना अहसास यही बताता है कि हालिया वर्षों में “लोकतंत्र की स्थिति” लेकर इस दायरे में कितनी मायूसी छायी रही है। यह भावना जवाबदेही तय करने वाली संस्थाओं के पंगु होने और लोकतांत्रिक अधिकारों के सिकुड़ते जाने की धारणा से...