प्रकृति की खातिर हर साल 21 दिन का लॉकडाउन जरूरी: पर्यावरणविद

कोरोना संक्रमण के चलते देशव्यापी लाकडाउन ने सरकार और आम आदमी की मुश्किलों में इजाफा किया है लेकिन आपदा की इस घड़ी ने प्रकृति के सौंदर्य को

आम आदमी ही मदद भी करे

आम आदमी अपनी लड़ाई लड़े, कोरोना वायरस से संक्रमित होने से बचने और दूसरों को बचाने के लिए घर में बंद रहे और ऊपर से सरकार की मदद भी करे। यह भी सिर्फ भारत में ही हो रहा है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से मदद की अपील की।

घडि़याली आंसू बहाकर लूट रही है मोदी सरकार: कांग्रेस

कांग्रेस ने आज दावा किया कि वाहनों से जुड़े बीमा और जीवन बीमा के प्रीमियम में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है तथा मोदी सरकार घड़ियाली आंसू बहाकर आम लोगों की जेब ढीली करने में लगी है।

वैज्ञानिक लोगों की जीवन गुणवत्ता सुधारे: मोदी

मोदी ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद सोसाइटी की बैठक को सम्बोधित करते हुये विश्व स्तरीय उत्पाद विकसित करने के लिए आधुनिक विज्ञान के साथ पारम्परिक ज्ञान को जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

आम आदमी को जन सुविधाएं बढ़ाना सरकार का लक्ष्य: कमलनाथ

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आम आदमी की बुनियादी सुविधाओं में निरंतर वृद्धि हो, जिससे वह एक सुरक्षित और सम्मानित जीवन जी सके।

आम आदमी की लड़ाई और लोहिया

रघु ठाकुर लोहिया समग्र परिवर्तन में विश्वास रखते थे। उनके ही शब्दों में हिन्दुस्तान की सामान्य जनता मामूली लोग अपने में भरोसा करना शुरू करे कि कल तक जो अंग्रेजी राज था वह पाजी बन गया तो उसे खत्म किया, आज कांग्रेसी सरकार है वह पाजी बन गई तो उसे खत्म करेंगे। कल मान लो कम्यूनिस्ट सरकार बने व पाजी बन जाये तो उसे भी खत्म करेंगे परसों सोशलिस्ट सरकार बनेगी मान लो वह भी पाजी बन जाये तो उसे भी खत्म करेंगे। जिस तरह तवे पर रोटी उलटते पलटते सेंक लेते हैं उसी तरह हिन्दुस्तान की सरकार को उलटते पलटते ईमानदार बनाकर छोंड़ेंगे। यह भरोसा किसी तरह हिन्दुस्तान की जनता में आ जाये तो फिर रंग आ जायेगा राजनीति में। लोहिया आम आदमी को लड़ना सिखाकर राजनैतिक परिवर्तन की क्रिया को तेज करना चाहते थे। उनके ही शब्दों में बिना हथियारों के अन्याय से लड़ने का तरीका निकालना पड़ेगा इसका तरीका निकला भी है। सिविल नाफरमानी की क्रिया में न्याय और समता प्राप्त करने की उस मनुष्य की अदम्य प्रवृत्ति प्रकट होती है जिसके हाथ में हथियार नहीं है। हथियारों के खात्मे की तरह गरीबी का अंत भी अपने आप नहीं हो जायेगा। दोनों के लिये लगन के साथ… Continue reading आम आदमी की लड़ाई और लोहिया

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