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  • मदुरै में लेफ्ट की दुविधा

    लेफ्ट पार्टियों के लिए अगला एक साल करो या मरो का साल है। उसे अगले साल मई में केरल की अपनी सत्ता बचानी है। पश्चिम बंगाल से लेफ्ट मोर्चा का डेरा डंडा उखड़ चुका है और त्रिपुरा में भी मानिक सरकार व कुछ अन्य नेताओं की वजह से लेफ्ट की सांस चल रही है। हालांकि वहां भी वह आईसीयू में ही है। बाकी सभी राज्यों में भी, जहां सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई एमएल, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी या फॉरवर्ड ब्लॉक की आंशिक उपस्थिति थी वहां से भी ये पार्टियां लगभग सिमट गई हैं। बिहार में राजद व कांग्रेस के साथ एलायंस में...