रिश्तों की खामोशी, अवसाद की चीख
हमें फिर से ‘ठहरना’ सीखना होगा। बिना मोबाइल के, बिना किसी एजेंडा के। हमें फिर से पूछना होगा, “कैसे हो?” …रिश्ते समय मांगते हैं, उपस्थिति मांगते हैं, और सबसे बढ़ कर। साथ मांगते हैं। समय भी। यदि हम यह नहीं कर पाए, तो आने वाले समय में अवसाद केवल एक चिकित्सकीय समस्या नहीं रहेगा, बल्कि एक सामाजिक महामारी बन जाएगा। जहां लोग बाहर से सामान्य दिखेंगे, पर भीतर से टूटे हुए होंगे। हम एक विचित्र समय में जी रहे हैं, जहां सूचना का शोर बढ़ता जा रहा है। पर संवाद का सन्नाटा गहराता जा रहा है। मनुष्य, जो मूलतः एक...