Free Trade Agreements

  • हौव्वा ही साबित हुए!

    अंतरराष्ट्रीय अवसरों का लाभ उठाने के लिए भी जरूरी है कि देशी अर्थव्यवस्था में निवेश एवं प्रतिस्पर्धा के अनुकूल स्थितियां हों। इसके अभाव में ना संरक्षणवाद काम आया है, और ना खुले व्यापार का रास्ता! एक के बाद एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) करना तीसरे कार्यकाल में नरेंद्र मोदी सरकार की प्राथमिकता रही है। इनसे धारणा बनाई गई कि अब उन समस्याओं का हल निकल आएगा, जिन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को घेरे रखा है। लेकिन मशहूर अमेरिकी थिंक टैंक- सेंटर फॉर इंटरनेशनल एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज (सीएसआईएस) के एक अध्ययन पत्र का निष्कर्ष है कि ये समझौते भारत के व्यापार ढांचे या...