GDP Data

  • आंकड़ों का धुंधला आईना

    जीडीपी वृद्धि दर को जितनी मोटी सुर्खियों में दिखाया जाता है, उतने ही ध्यानाकर्षक ढंग से यह नहीं बताया जाता कि यह दर किस आधार पर हासिल हुई और कुल (नोमिनल) और वास्तविक वृद्धि दर में कितना फर्क है। जुलाई से सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़ों ने एक तरह का कौतुक पैदा किया है। जिस समय डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत गिरने के बावजूद व्यापार घाटा बढ़ने का ट्रेंड हो, 8.2 फीसदी की वृद्धि दर हासिल करना अपने-आप में करिश्माई है। वैसे जीडीपी वृद्धि दर को जितनी मोटी सुर्खियों में दिखाया जाता है, उतने ही ध्यानाकर्षक ढंग से...

  • तो दुनिया में भारत के आंकड़ों को ‘सी’ग्रेड

    यह भी दुनिया देख रही है। अब तक दुनिया की संस्थाएं भारत के आंकड़ों पर संदेह जताती थीं। विकास के आंकड़ों से लेकर गरीबी, प्रदूषण, शौचालय आदि के तमाम आंकड़े संदेह के घेरे में थे। कहा जा रहा था कि भारत आंकड़ों में गड़बड़ी करता है। लेकिन अब तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने भारत के आंकड़ों को ‘सी’ ग्रेड ही दे दिया है। यह दूसरी सबसे खराब रेटिंग होती है। आईएमएफ ने नेशनल अकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स को ‘सी’ ग्रेड दिया है, जिसमें सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी और ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी जीवीए शामिल है। सोचें, ये दोनों सबसे...