आंकड़ों का धुंधला आईना
जीडीपी वृद्धि दर को जितनी मोटी सुर्खियों में दिखाया जाता है, उतने ही ध्यानाकर्षक ढंग से यह नहीं बताया जाता कि यह दर किस आधार पर हासिल हुई और कुल (नोमिनल) और वास्तविक वृद्धि दर में कितना फर्क है। जुलाई से सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़ों ने एक तरह का कौतुक पैदा किया है। जिस समय डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत गिरने के बावजूद व्यापार घाटा बढ़ने का ट्रेंड हो, 8.2 फीसदी की वृद्धि दर हासिल करना अपने-आप में करिश्माई है। वैसे जीडीपी वृद्धि दर को जितनी मोटी सुर्खियों में दिखाया जाता है, उतने ही ध्यानाकर्षक ढंग से...