Gig worker

  • स्वागत-योग्य हस्तक्षेप

    जब गिग वर्क का चलन तेजी से बढ़ रहा हो, इस काम में लगे श्रमिकों के लिए कामकाज की अपेक्षाकृत अधिक मानवीय परिस्थितियां सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। गिग वर्कर यूनियनों की बाकी मांगों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। ऐप के जरिए वस्तुओं की दस मिनट के अंदर डिलीवरी के चलन को रुकवाने के लिए केंद्र सरकार ने उचित हस्तक्षेप किया है। इसका नतीजा तुरंत सामने आया। केंद्रीय श्रम मंत्री के साथ ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विजी, जमैटो आदि ऐप्स की संचालक कंपनियों के अधिकारियों की हुई बैठक में दस मिनट के अंदर डिलीवरी को रोकने पर सहमति बनी।...

  • संगठित होने की मजबूरी

    यह मुद्दा चर्चा में था कि क्या कभी गिग कर्मियों को संगठित किया जा सकता है अथवा क्या वे संगठित होकर अपने हित की लड़ाई लड़ सकेंगे। ऐसे सवालों का जवाब बदलते हालात और नई उभरी परिस्थितियों ने दे दिया है। ऐप आधारित गिग कर्मी ‘कर्मचारी’ या ‘मजदूर वर्ग’ की श्रेणी में आते हैं या नहीं, इस तरह के काम के प्रचलन में आने के बाद से यह सवाल बहस का विषय है। उनकी सेवा लेने वाली प्लैटफॉर्म कंपनियां इन श्रेणियों की जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसे कर्मियों को पार्टनर कहती हैं। गिग कर्मियों का एक हिस्सा भी अपने...