हक्सले, ऑरवेल और भारत 2026
सन् 1985 में नील पोस्टमैन ने “हँसते-हँसते विनाश की ओर” (Amusing Ourselves to Death) किताब लिखी थी। उसमें आधुनिक सभ्यता को लेकर एक ठंडी और बेचैन कर देने वाली चेतावनी छिपी थी। पोस्टमैन का कहना था कि समाज धीरे-धीरे उस “टाइपोग्राफिक माइंड” से दूर जा रहा है, जो पढ़ने, तर्क करने, धैर्य रखने और विचार को क्रम से समझने की आदत से बना था। उसकी जगह एक दूसरा मन जन्म ले रहा है — तस्वीरों, झांकियों, गति और तमाशों से संचालित मन। पोस्टमैन ने अपनी किताब में जॉर्ज ऑरवेल और एल्डस हक्सले के दो अलग-अलग भय याद किए। ऑरवेल को...