अमेरिकी विशेषज्ञ का आरोप: हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का विरोध करने पर पद से हटाया

वाशिंगटन। कोरोना वायरस महामारी को काबू करने के प्रयास कर रही अमेरिका की एक सरकारी एजेंसी के प्रमुख के तौर पर सेवाएं दे चुके एक विशेषज्ञ ने आरोप लगाया है कि उसे मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को बढ़ावा देने के ‘राजनीतिक मकसद वाले प्रयासों का’ विरोध करने के कारण प्रमुख के पद से हटाया गया। विशेषज्ञ ने दावा किया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी सबूत के बिना कोविड-19 के उपचार के रूप में इस दवा का प्रचार कर रहे हैं। ‘बॉयोमेडिकल एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवल्पमेंट अथॉरिटी’ (बीएआरडीए) के पूर्व निदेशक रिक ब्राइट ने बुधवार को एक बयान में कहा कि उन्हें मंगलवार को उनके पद से हटाकर कम महत्वपूर्ण काम सौंपा गया। ब्राइट के वकीलों डेब्रा कात्ज और लीसा बैंक्स ने इसे ‘‘बदले की कार्रवाई’’ करार दिया है। ट्रंप ने जब से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का कोविड-19 के उपचार में सहायक दवा के रूप में प्रचार करना शुरू किया है, तब से इसे लेकर विवाद चल रहा है। प्रतिरक्षा विज्ञान में पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले ब्राइट ने कहा, ‘‘मैं इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि इस घातक वायरस से निपटने के लिए विज्ञान की आवश्यकता है, राजनीति की नहीं।’’ ब्राइट के वकीलों ने उनका यह बयान जारी किया। ब्राइट… Continue reading अमेरिकी विशेषज्ञ का आरोप: हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का विरोध करने पर पद से हटाया

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से कोई फायदा नहीं

अमेरिका में कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल  से कोई फायदा मिलता नहीं दिख रहा है।

अमेरिका लूट मार पर उतर गया है

अमेरिका के लिए अपने हर नागरिक की जान की कीमत होती है पर उसी अमेरिका की नजर में दुनिया के दूसरे देशों के नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं है। तभी वह कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी के समय भी दूसरे देशों के नागरिकों की जान की कीमत पर अपने नागरिकों की जान बचाने का घटिया काम कर रहा है। उसके एक तरह से लूटमार मचा रखी है। उसे अपने यहां सारी दवाएं चाहिएं, सारे वेंटिलेटर और मास्क चाहिए। इसके लिए वह दुनिया भर देशों पर दबाव बना रहा है। इससे काम नहीं चल रहा है तो दूसरे देशों को भेजी जा रही सप्लाई अपने यहां मंगा ले रहा है। अमेरिका की इस लूट मार का एक खास शिकार भारत भी है। यह अलग बात है कि भारत के हुक्मरान उसे अपना दोस्त मानते हैं। पर सबने देखा कि कैसे उसने हाइड्रोक्सीक्लरोक्वीन दवा के लिए भारत को धमकी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करके दवा भेजने का अनुरोध किया और भारत सरकार कोई फैसला करती उससे पहले ही भारत को धमकी दे दी कि अगर भारत ने दवा नहीं दी तो जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहे। उनकी धमकी का असर यह… Continue reading अमेरिका लूट मार पर उतर गया है

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की पहली खेप अमेरिका पहुंची

भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की एक खेप शनिवार को अमेरिका पहुंची, जिसे कोविड-19 के उपचार के लिए संभावित दवा के रूप में देखा जा रहा है।

बंगाल के किसानों को कुनैन की मांग बढ़ने की आशा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल पर जोर दिए जाने के बाद दार्जिलिंग की पहाड़ियों में सिनकोना पेड़ों की बागवानी करने

क्या ट्रंप की धमकी में कारोबारी पहलू भी है ?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड अचानक डॉक्टर ट्रंप कहे जाने लगे हैं। उन्होंने अमेरिका के डॉक्टरों और तमाम शोधकर्ताओं की आशंकाओं को दरकिनार कर ऐलान कर दिया कि मलेरिया का इलाज करने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरक्वीन से कोरोना वायरस का इलाज होगा।

देश में हाइडॉक्सीक्लोरोक्वीन की कमी नहीं: स्वास्थ्य मंत्रालय

केन्द्र सरकार ने कहा है कि देश में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की कोई कमी नहीं है और इसका पर्याप्त स्टॉक है तथा भविष्य में भी इस दवा की कोई कमी नहीं रहेगी।

दवाई न मिलने पर ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मलेरिया की ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ दवाई ना देने पर भारत को कड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दी और कहा कि निजी अनुरोध के बाद भी भारत का दवाई ना देना उनके लिए चौंकाने वाला होगा क्योंकि वाशिंगटन के नयी दिल्ली के साथ अच्छे संबंध हैं।

ट्रंप ने भारत से मांगी दवा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के आर्डर की आपूर्ति करने का आग्रह किया है।

भारत ने पाबंदी को सख्त किया

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो रही मलेरिया के इलाज वाली दवा के निर्यात पर लगाई गई पाबंदी को भारत सरकार ने और सख्त कर दिया है। सरकार ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन के निर्यात पर पाबंदी को सख्त करते हुए विशेष आर्थिक क्षेत्रों, सेज की इकाइयों को भी रोक के दायरे में शामिल कर दिया है। सरकार देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण हालात बिगड़ने की आशंकाओं को देखते हुए ये रोक लगा रही है, ताकि देश में जरूरी दवाओं की कमी नहीं हो। विदेशी व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना में कहा- हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन और इससे बनने वाली दूसरी दवाओं का निर्यात अब सेज से भी नहीं हो सकेगा, भले ही इसके लिए पहले मंजूरी दी जा चुकी हो या भुगतान किया जा चुका हो। निर्यात पर बिना किसी छूट के पाबंदी रहेगी। गौरतलब है कि सीमा शुल्क नियमों के मामले में सेज को विदेशी निकाय माना जाता है। इस कारण निर्यात पर रोक के आदेश आम तौर पर सेज पर लागू नहीं होते हैं। सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन के निर्यात पर 25 मार्च को रोक लगाने की घोषणा की… Continue reading भारत ने पाबंदी को सख्त किया

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