कॉरपोरेट के आगे असहाय
क्रोनी कैपिटलिज्म में राजसत्ता पसंदीदा पूंजीपतियों को अनुचित लाभ पहुंचाती है। यह लाभ पाने के लिए पूंजीपति सत्ताधारियों को प्रसन्न रखने की कोशिश करते हैं। जबकि इंडिगो प्रकरण में केंद्र असहाय नजर आया और आखिरकार उसने घुटने टेक दिए। इंडिगो एयरलाइन्स के मामले ने बताया है कि भारत में सरकार और उपभोक्ता दोनों कॉरपोरेट्स- खासकर मोनोपॉली कायम कर चुकी कंपनियों के आगे असहाय हैं। इस प्रकरण का संदेश है कि क्रोनी कैपिटलिज्म जैसी बातें पुरानी पड़ चुकी हैं। क्रोनी कैपिटलिज्म में फिर भी शक्ति प्रमुख रूप से राजसत्ता के पास ही होती है, जो अपने पसंदीदा पूंजीपतियों को अनुचित लाभ...