सवाल पुलिस के रवैये का

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका पर कई गहरे सवाल उठे हैं। दिल्ली के जामिया मिल्लिया में विशेष रूप से दिल्ली पुलिस के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने और सख्ती से पेश आने के आरोप लगे। अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जामिया से भी पहले विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। वहां से भी पुलिस के लाठीचार्ज करने और आंसू गैस का प्रयोग करने की खबरें आई थीं। बताया जा रहा है कि वहां पुलिस कार्रवाई में कम से कम 60 लोग घायल हुए। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी प्रदर्शनों को खत्म करने के लिए पुलिस की ओर से अत्यधिक बल-प्रयोग किया गया। बताया जाता है कि वहां पुलिस ने गोलियां भी चलाईं। दिल्ली के ही सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि जामिया में पुलिस की कार्रवाई में घायल हुए जिन छात्रों को लाया गया, उनमें से दो के शरीर पर गोली लगने के घाव हैं। दिल्ली पुलिस ने इससे पहले गोली चलाने के आरोपों से साफ इंकार कर दिया था। उधर दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में भी लिया, पर उनमें से एक भी छात्र नहीं निकला। इस से सवाल यह उठ रहा है कि… Continue reading सवाल पुलिस के रवैये का

पीड़ित कौन, अल्पसंख्यक कौन?

जैसा असम, त्रिपुरा और बंगाल की घटनाओं ने फिर दिखाया – भारत में हिन्दू समाज बहुसंख्यक की तरह न रहता है, न सोचता है। नागरिकता कानून पर सब से पहला विरोध उन्होंने ही किया। यह कोई अपवाद घटना नहीं है। महाराष्ट्र में शिव सेना ने भी इस का विरोध किया, जो भाजपा से भी प्रखर हिन्दूवादी मानी जाती रही है। यह भी नोट करना चाहिए कि कांग्रेस, सपा, बसपा, कम्युनिस्ट पार्टियाँ भी मूलतः हिन्दुओं से भरी पार्टियाँ हैं। उन में कहने को इक्का-दुक्का मुसलमान हैं। मजे की बात कि इस विडंबना को एक बार स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने भी नोट किया। बाल पाटिल तथा अन्य बनाम भारत सरकार (2005) मामले में निर्णय देते हुए न्यायाधीशों ने स्पष्ट लिखा, “ ‘हिन्दू’ शब्द से भारत में रहने वाले विभिन्न प्रकार के समुदायों का बोध होता है। यदि आप हिन्दू कहलाने वाला कोई व्यक्ति ढूँढना चाहें तो वह नहीं मिलेगा। … भारतीय समाज में लोगों का कोई हिस्सा या समूह बहुसंख्यक होने का दावा नहीं कर सकता। हिन्दुओं में सभी अल्पसंख्यक हैं।”  मगर दुर्भाग्य! सुप्रीम कोर्ट ने भी इस अल्पसंख्यक के लिए कुछ न किया। यह कोई बढ़ा-चढ़ा कर कही बात नहीं। बल्कि गंभीर सचाई है हिन्दू न केवल दुनिया में, बल्कि भारत… Continue reading पीड़ित कौन, अल्पसंख्यक कौन?

दिल्ली में कश्मीर जैसे हालात

नई दिल्ली। गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हालात कश्मीर जैसे बन गए। कई इलाकों में इंटरनेट बंद करना पड़ा और 20 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन करीब पूरे दिन बंद रहे। कई इलाकों में सड़कें बंद रहीं और लोग जाम में फंसे रहे। दिल्ली-गुड़गांव हाईवे पर गुरुवार को दस किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा। नागरिकता कानून के विरोध में उतरे लोगों की जगह जगह पर पुलिस के साथ झड़प हुई और लोगों को हिरासत में लिया गया। दिल्ली में लाल किला, जामिया नगर, मंडी हाउस सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। इसकी वजह से राजीव चौक, मंडी हाउस सहित 20 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े। कई इलाकों में फोन, एसएमएस और इंटरनेट सेवाएं भी बंद करवा दी गईं। मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों ने बताया कि सरकार के निर्देश पर उन्होंने सेवा स्थगित की है। हाल के दिनों में यह संभवतः पहली बार हुआ है कि राष्ट्रीय राजधानी में संचार सेवाओं पर पाबंदी लगानी पड़ी। इससे पहले कश्मीर, असम, त्रिपुरा आदि जगहों पर संचार सेवाओं पर पाबंदी की खबरें थीं। गुरुवार को होने वाले प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली में लाल किला क्षेत्र के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई थी। निषेधाज्ञा का… Continue reading दिल्ली में कश्मीर जैसे हालात

अमित शाह ने बुलाई आपात बैठक

नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार की शाम को एक आपात बैठक बुलाई। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि अमित शाह के अलावा इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल भी शामिल हुए। इनके अलावा बैठक में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी और नित्यानंद राय भी शामिल हुए। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला भी बैठक में शामिल हुए। उन्होंने और दूसरे अधिकारियों ने गुरुवार को देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा हालात के बारे में गृह मंत्री को जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा स्थितियों की समीक्षा के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। गौरतलब है कि नागरिकता कानून के विरोध में देश के हर हिस्से में गुरुवार को आंदोल हुए। वामपंथी पार्टियों ने गुरुवार को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। बहरहाल, इससे पहले, बुधवार शाम को प्रशासन ने दिल्ली, लखनऊ और बेंगलुरू में प्रदर्शन की इजाज़त देने से इनकार कर दिया था, जबकि मुंबई, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद, नागपुर, भुवनेश्वर, कोलकाता और भोपाल में प्रदर्शनों पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी। वहीं, मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में नागरिकता… Continue reading अमित शाह ने बुलाई आपात बैठक

अगस्त क्रांति मैदान में जुटे हजारों लोग

मुंबई। नागरिकता कानून के विरोध में देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में गुरुवार की शाम को हजारों लोग सड़क पर उतरे। करीब 70 संगठनों के लोगों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में हुए इस प्रदर्शन में कई फिल्मी सितारों और फिल्मकारों ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने पूरे प्रदर्शन को अराजनीतिक बनाए रखा। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने शिक्षण संस्थानों में और छात्रों के ऊपर हुई पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया। इस प्रदर्शन को कांग्रेस, एनसीपी, समाजवादी पार्टी आदि ने समर्थन दिया था। नागरिकता कानून के खिलाफ सोशल मीडिया में अभियान चला रहे अभिनेता खुले में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। फिल्म अभिनेता फरहान अख्तर, अभिनेत्री स्वरा भास्कर, फिल्मकार अनुराग कश्यप, कबीर खान जैसी फिल्मी हस्तियां गुरुवार के प्रदर्शन में शामिल हुईं। इससे पहले फरहान अख्तर ने कहा था कि वे संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सड़क पर उतरेंगे, क्योंकि सिर्फ सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर करने का वक्त अब निकल चुका है। इसके आयोजकों ने मैदान में लगे सभी राजनीतिक झंडों को हटवा दिया था। प्रदर्शन को देखते हुए अगस्त क्रांति मैदान के आसपास की सभी दुकानों को बंद करवाया गया, ट्रैफिक भी डाइवर्ट कर दिया गया। मुंबई… Continue reading अगस्त क्रांति मैदान में जुटे हजारों लोग

ममता, राहुल, केजरीवाल ने किया विरोध

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को लगातार चौथे दिन नागरिकता कानून के विरोध में कोलकाता में रैली निकाली। उन्होंने रैली में कहा- निष्पक्ष संगठन जैसे यूनाइटेड नेशंस या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक समिति का गठन करवाना चाहिए जो नागरिकता संशोधन कानून मामले पर जनमत संग्रह करवा सके। ताकि यह पता लग सके कि कितने लोग इसके समर्थन में हैं और कितने इसके विरोध में। ममता ने कहा- भाजपा की स्थापना 1980 में हुई थी। आज वो हमसे 1970 के नागरिकता दस्तावेज मांग रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार का विरोध करते हुए कहा- सरकार को कोई अधिकार नहीं है कि वह भारत की आवाज और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने के लिए इंटरनेट, टेलीफोन, कॉलेज और मेट्रो को बंद करे। यह भारत की आत्मा की बेइज्जती है। उनकी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी दिल्ली में इंटरनेट, मेट्रो बंद किए जाने और प्रदर्शन को दबाने का विरोध किया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नागरिकता कानून का विरोध करते कहा- मौजूदा वक्त में देश भर में कानून व्यवस्था की स्थिति ध्वस्त हो चुकी है। केंद्र से अपील करता हूं कि नागरिकता कानून को वापस लें और युवाओं को रोजगार दे।

विपक्ष के लिए परीक्षा की घड़ी

सुशांत कुमार- देश के विपक्ष के लिए परीक्षा की घड़ी है। लोकसभा चुनाव के बाद से हाशिए में पड़ी विपक्षी पार्टियों के पास एकजुट होने का भी मौका है और लोगों को सरकार के एजेंडे के बारे में बताने का भी सही समय है। लोग खुद भी अपने अनुभवों से समझ रहे हैं। तभी महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का केंद्र सरकार का फैसला भाजपा को बहुत ज्यादा चुनावी लाभ नहीं पहुंचा पाया। हालांकि दोनों राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन खराब नहीं कहा जा सकता है पर इन चुनावों में ही विपक्षी पार्टियों को भी लोगों ने ताकत दी। लोगों के इस मैसेज को समझना होगा। दोनों राज्यों में भाजपा के विरोध में लड़ी पार्टियों के वोट और उनकी सीटों में इजाफा इस बात का संकेत है कि लोग चाहते हैं कि विपक्ष रहे और मजबूत रहे। ध्यान रहे मजबूत विपक्ष लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है और देश के लोग इस बात को समझते हैं। तभी महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस के हाशिए में होने के बावजूद लोगों ने उसे वोट दिया। कांग्रेस के लोग भी इस बात… Continue reading विपक्ष के लिए परीक्षा की घड़ी

क्यों डर रही है सरकार?

आंदोलन, प्रदर्शन और धरने से लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीरें बनती हैं। कितने अच्छे ढंग से इस बात को डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने कहा है कि ‘सड़कें सूनी हो जाएंगी तो संसद आवारा हो जाएगी’! असल में लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि इसकी सड़कें आबाद रहें। केंद्र की मौजूदा सरकार और सरकार का नेतृत्व कर रही भाजपा का इतिहास भले समाजवाद का नहीं रहा है पर जयप्रकाश नारायण के आंदोलन की विरासत का कुछ अंश तो उसके हिस्से में भी आया ही है। फिर भी उसकी सरकार क्यों आंदोलनों, प्रदर्शनों और धरनों से डर रही है? वह भी छात्रों के आंदोलन से? देश भर के छात्र आंदोलित हैं। करीब 15 राज्यों में बड़े शिक्षण संस्थानों में छात्रों ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। आमतौर पर प्रदर्शनों से दूर रहने वाले आईआईटी, आईआईएम और इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू के छात्रों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। दिल्ली से लेकर कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, बेंगुलरू, कानपुर, हैदराबाद, पटना, बनारस सहित कोई भी बड़ा शहर ऐसा नहीं है, जहां छात्र और नौजवान आंदोलन के लिए सड़क पर नहीं निकले। केंद्र की भाजपा सरकार के साढ़े पांच साल… Continue reading क्यों डर रही है सरकार?

हिंदुत्ववादी दिखने का शौक?

नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध देश में इतना बड़ा आंदोलन उठ खड़ा होगा, इसकी कल्पना नरेंद्र मोदी और अमित शाह को क्या, कांग्रेसियों और कम्युनिस्टों को भी नहीं होगी। यदि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया के छात्र भड़क उठे हैं तो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और देश के अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र भी इस कानून के विरुद्ध मैदान में उतर आए हैं। यह ठीक है कि देश के विपक्षी दल इस जनोत्थान से खुश हैं और वे इसे उकसा भी रहे हैं लेकिन हम इससे इनकार नहीं कर सकते कि यह आंदोलन स्वतःस्फूर्त है। भाजपा की प्रतिक्रिया ऐसी है, जो इस आंदोलन की आग में घी का काम कर रही है। पहली बात यह कि पुलिस ने विश्वविद्यालयों के अंदर छात्रों के साथ मारपीट क्यों की? यह ठीक है कि छात्र लोगों का आंदोलन अहिंसक नहीं था। उन्होंने तोड़-फोड़ और आगजनी भी कर डाली लेकिन पुलिस थोड़े संयम से काम लेती तो बेहतर होता। दूसरी बात प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना कि प्रदर्शनकारियों के कपड़े देख कर ही पता चल जाता है कि वे कौन हैं? क्या मतलब है, इस वाक्य का? इसका मतलब यह है कि वे मुसलमान हैं और हम पक्के हिंदुत्ववादी हैं। इस मौके पर इतना गैर-जिम्मेदाराना… Continue reading हिंदुत्ववादी दिखने का शौक?

‘पहनावा’ और हिंदू राष्ट्र!

गृह मंत्री अमित शाह खुश होंगे। बहुत खुश। इसलिए कि उन्हें सड़कों पर उस पहनावे के लोगों, छात्रों की भीड़ दिखलाई दे रही है, जिन्हें मुसलमान कहा जाता है। कोलकत्ता के ‘द टेलीग्राफ’ अखबार ने कल विरोध प्रदर्शनों के फोटो छाप प्रधानमंत्री मोदी को आईना दिखाना चाहा कि क्या इन फोटोज में भीड़ मुसलमानी है, जो आप कह रहे हैं कि पहनावा देखो तो मालूम होगा कि सड़कों पर कौन उतरे हुए हैं! हां, भारत के प्रधानमंत्री का ऑन रिकार्ड बयान है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ ये जो आग लगा रहे हैं, ये कौन हैं उनके कपड़ों से इसका पता चल जाता है। इधर उनका यह खुलासा था और उधर जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में पुलिस ने घुस पर छात्रों की ऐसी पिटाई की, जिससे देश को अपने आप मालूम हुआ कि मोदी सरकार में कुव्वत है आग लगाने वालों को ठोकने की। फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल दो टूक शब्दों में बताया कि जिहादी, माओवादी, अलगाववादी हैं छात्र रूप में! भला यह नैरेटिव क्यों, जबकि हिसाब से देश भर में जिहादी, माओवादी, अलगाववादियों का इतनी तादाद में सड़कों पर उतरना अमित शाह के लिए बतौर गृह मंत्री चिंता वाली बात होनी थी! उन्हें व प्रधानमंत्री मोदी… Continue reading ‘पहनावा’ और हिंदू राष्ट्र!

सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार

नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ देश में भर में चल रहे आंदोलन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में अदालत पहुंचे वकीलों को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार भी लगाई। देश के कई हिस्सों में हुई हिंसक विरोध की घटनाओं की जांच के लिए सर्वोच्च अदालत के पूर्व जज की अध्यक्षता में समिति बनाने से मंगलवार को इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की समितियां संबंधित हाई कोर्ट बना सकती हैं। सर्वोच्च अदालत ने सभी याचिकाकर्ताओं को राहत के लिए और जांच समितियां बनवाने के लिए संबंधित राज्यों के हाई कोर्ट में जाने का निर्देश, जहां हिंसा की घटनाएं हुई हैं। चीफ जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की तीन सदस्यों की पीठ ने अपने आदेश में इस तथ्य का जिक्र किया कि याचिकाकर्ताओं के हर आरोप का केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने खंडन किया है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की चिंता दो बातों को लेकर मुख्य रूप से है। पहला तो अंधाधुंध तरीके से छात्रों की गिरफ्तारी और दूसरे, घायल छात्रों का ठीक से इलाज नहीं होना। पीठ ने कहा कि सॉलिसीटर जनरल के… Continue reading सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार

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