कठघरे में खड़ा कॉलेजियम
कॉलेजियम सिस्टम के पक्ष में यही दलील दी जाती है कि जजों की नियुक्ति एवं तबादले सरकार के हाथ में चले गए, तो न्यायपालिका में राजनीतिक हस्तक्षेप होने लगेगा। मगर क्या कॉलेजियम ऐसे दखल से जजों को बचा पा रहा है? सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल तो पुराने हैं, लेकिन अब इन्हें सर्वोच्च न्यायपालिका के अंदर से उठाया जा रहा है, तो स्पष्टतः इसे अधिक गंभीरता से लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों- दीपांकर दत्त और मनमोहन ने इस व्यवस्था के संचालन को लेकर गंभीर टिप्पणियां की हैं। दोनों की शिकायतें अलग-अलग हैं, लेकिन उससे कॉलेजियम को...