Labor Market

  • सिकुड़ता हुआ श्रम बाजार

    पीएलएफएस के मुताबिक श्रमिकों को कोरोना काल के पहले एक हफ्ते में जितने घंटे मिलते थे, आज उससे कम मिल रहे हैं। ऐसे में श्रमिकों की सौदेबाजी की क्षमता गिरी है और कार्य-स्थितियां बिगड़ी हैं। नतीजा बढ़ती श्रमिक अशांति है। भारत में 2025 में श्रमिकों के लिए कम कामकाजी घंटे उपलब्ध हुए। यह तथ्य ताजा आवधिक श्रम शक्ति सर्वेक्षण (पीएलएफएस) से सामने आया है। इस हाल के निहितार्थ दूरगामी हैं। बारीक नजर डालें, तो मालूम पड़ेगा कि विभिन्न हिस्सों में इस समय दिख रही श्रमिक अशांति से लेकर एफएमसीजी (यानी तेल-साबुन जैसी रोजमर्रा उपयोग की वस्तुएं बनाने वाली) कंपनियों पर...