मौजूदा दौर के अनुरूप
ताजा फैसला श्रमिक कल्याण की उस समझ के विपरीत है, जिससे प्रेरित होकर पांच दशक पहले सर्वोच्च न्यायालय ने ही श्रमिक समर्थक परिभाषा तय की थी। ताजा निर्णय से बेशक मजदूर अधिकारों को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने मौजूदा दौर में प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक तय कर दिया है कि वैधानिक रूप से अब ‘कारखाना’ का मतलब क्या होगा? इस तरह 1978 में सात जजों की बेंच ने जो परिभाषा तय की थी, वह अब अमान्य हो गई है। उस फैसले को मजदूर अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक ठोस न्यायिक निर्णय समझा...
