सियासत के चक्रव्यूह में
महाराष्ट्र का घटनाक्रम मिसाल है कि पहचान की सियासत कैसे वहां भी विवाद खड़े कर देती है, जहां इसकी जड़ें मौजूद नहीं होतीं। ऐसे विवाद आज भारत में आम जन को आपस में जोड़ने वाले हर पहलू की बलि ले रहे हैं। महाराष्ट्र में हिंदी सियासत के चक्रव्यूह में फंस गई है। जोड़ने वाली ये भाषा वहां एक विभाजन रेखा बन गई है। वहां के सियासी समूहों में सबकी रुचि माहौल को अधिक से अधिक गरमाए रखने में है, वरना मेल-मिलाप से मसले को हल कर लेना कठिन नहीं होता। महाराष्ट्र में कभी हिंदी विरोध मजबूत मुद्दा नहीं रहा। विडंबना...