mass movements

  • जन आंदोलनों का बंद होता रास्ता

    इतिहास के अंत की घोषणा की तरह क्या जन आंदोलनों के अंत की भी घोषणा की जा सकती है? कई लोग मानेंगे कि ऐसा कहना जल्दबाजी है या आधा अधूरा है। कई लोग किसान आंदोलन के कारण तीन विवादित कृषि कानूनों के वापस लिए जाने की मिसाल भी देंगे। निश्चित रूप से वह मिसाल उम्मीद जगाने वाली थी। लेकिन उसके तीन साल बाद जो स्थिति है वह जन आंदोलनों के क्षमता और उसके असर को कमतर करने वाली है। इस स्थिति के पीछे भी उस आंदोलन की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। निकट अतीत में उतना बड़ा,...