Menstrual Health

  • सैद्धांतिक रूप से अहम

    आरटीई कानून लागू हुए 16 वर्ष गुजर गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से जाहिर है कि सरकारों ने उस धारा के तहत अपने दायित्व को नहीं निभाया। यानी लड़कियों के लिए अलग शौचालय की जरूरत पूरी नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट की इस व्याख्या का ऊंचा सैद्धांतिक महत्त्व है कि मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संविधान प्रदत्त जीवन के मौलिक अधिकार का अभिन्न अंग है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ ने कहा कि स्कूलों में लड़कियों को इससे संबंधित सुविधाएं मिलें, यह सरकारों को सुनिश्चित करना चाहिए। इस सिलसिले में लड़के, लड़कियों, और...