Mukund Naravane book

  • किताब तो आने दीजिए

    सत्ता पक्ष के मुताबिक चूंकि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए उसमें वर्णित मामलों का उल्लेख सदन में नहीं हो सकता। मगर किताब का प्रकाशन किसने रोक रखा है? बेहतर होगा कि प्रकाशन की मंजूरी अविलंब दी जाए। पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरावणे की किताब लगभग 21 महीनों से प्रकाशन के इंतजार में है, क्योंकि उसे केंद्र से हरी झंडी नहीं मिली है। अब उस किताब में वर्णित बातों को लेकर एक अंग्रेजी पत्रिका ने लंबी रिपोर्ट छापी है। उसमें शामिल एक प्रकरण का हवाला विपक्ष के नेता राहुल गांधी लोकसभा में देना चाहते थे। मगर सत्ता पक्ष...