ठुकराए हुओं का जुड़ना!
पी4एम असल में क्या करेगा? पहली नजर में यह ट्रंप-कालीन अमेरिका के ठुकराए देशों का संवाद मंच नजर आता है। यानी यह नकारात्मक कारणों से हुई पहल है। ऐसे में क्या सहयोग का कोई एजेंडा तय हो पाएगा? भारत ने यह फैसला लेने में खासी फुर्ती दिखाई। उसने यूरोपीय संघ, कनाडा, ब्राज़ील, और केन्या की ‘बहुपक्षीयता के लिए सहभागिता’ पहल का हिस्सा बनने का निर्णय लिया है। सोमवार को एक ब्रिटिश अखबार में लिखे लेख के जरिए यूरोपियन काउंसिल के प्रमुख एंतोनियो कोस्ता, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनेसियो लूला दा सिल्वा, और केन्या के राष्ट्रपति...