multinational companies

  • काबिल और कारिंदे!

    भारत में जिसको सुनिए वो कहेगा कि काबिल लोगों की कमी नहीं हैं। कमी नहीं है तो फिर कहां हैं काबिल लोग? भारत के काबिल लोग क्या अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के लिए कुलीगिरी नहीं कर रहे है? वे चाइनीज कंपनियों के भारत में बाजार एजेंट हैं या अमेरिकी उद्यमियों की कंपनियां चला रहे हैं। मोटा वेतन पा रहे हैं। उससे मुगालता और संतोष मिलता है कि हमारा दुनिया में डंका। देखा नहीं गूगल के इंडियन सीईओ सुदंर पिचाई ट्रंप के शपथ प्रोग्राम में थे। पर वे मालिक तो नहीं हैं। मालिक और कंपनी तो अमेरिकी हैं। और कल्पना करें...