बंगाल में नब्बे के दशक जैसा दृश्य

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने वैसा दृश्य बना दिया है, जैसा नब्बे के दशक में पूरे देश में होता था। नब्बे के दशक में मंदिर आंदोलन चरम पर था और चारों तरफ जय श्रीराम के नारे सुनाई देते थे।

औवेसी और भाजपा की लड़ाई में भविष्य क्या?

हिन्दुओं के बाद अब मुसलमान भी प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के जाल फंसने लगे हैं। जिस दो दलीय प्रणाली की बात आडवानी जी करते थे और जो वास्तव में दो ध्रुवीय राजनीति थी वह कामयाब होने लगी है।

मेक इन इंडिया का क्या होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया का ऐलान किया था, जिसे पिछले कुछ समय से आत्मनिर्भर भारत का नाम दिया गया है। कोरोना वायरस का संकट शुरू होने और चीन से अनेक देशों का मोहभंग होने के बाद भारत में इस बात का जोर-शोर से प्रचार हुआ था

आजादी के प्रतीकों का इस्तेमाल

आजादी दिवस नजदीक है। क्या इसलिए प्रधानमंत्री इन दिनों अपने भाषणों में आजादी की लडाई से जुड़े प्रतीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं या किसी सुविचारित योजना के तहत वे मंदिर निर्माण से लेकर स्वच्छता तक के अभियान के लिए इन प्रतीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं

पहले संकट में सीडीएस का अनुभव!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल आजादी दिवस के अपने भाषण में देश में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त करने की बात कही थी

लद्दाख के लोगों की बात सुने: राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लद्दाख के लोगों के बहाने सरकार पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि सरकार को चीनी घुसपैठ के मामले में लद्दाख के लोगों की बात सुननी चाहिए।

दिल्ली के आगे क्या होगा?

सवाल है कि दिल्ली चुनाव के बाद क्या होगा? अगर इतना सब कुछ करने के बावजूद भाजपा दिल्ली का चुनाव नहीं जीती तो क्या होगा? ध्यान रहे राजनीतिक स्तर पर कई विभाजनकारी प्रतीक कारगर साबित नहीं हुए हैं। देशभक्ति का मुद्दा भी बहुत कारगर नहीं रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा के इस किस्म के दांव पिट रहे हैं। पर यह भी हकीकत है कि सामाजिक स्तर पर इससे विभाजन बढ़ रहा है। हिंदू-मुस्लिम की सदियों पुरानी ग्रंथि उभर कर खतरनाक होने के स्तर तक बड़ी गई है, जिसके कभी भी फट जाने का खतरा है।वह तो हिंदू की सदियों पुरानी ऐसी तासीर है कि वह तमाम उकसावे के बावजूद मारो-काटो के फेरे में नहीं फंसा है। पर सवाल है कि कब तक वह इस फेरे में नहीं फंसेगा? जिस तरह एक नौजवान पिस्तौल लेकर नागरिकता कानून के विरोधियों को गोली मारने पहुंच गया, शाहीन बाग खत्म कराने पहुंच गया, उससे यह आशंका बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं का दोहराव बढ़ सकता है। एक तरफ आर्थिकी का भट्ठा बैठा है, जिससे बेरोजगारों की फौज बढ़ती जा रही है और दूसरी ओर मुस्लिम विरोध और हिंदू राष्ट्रवाद की भावना का अबाध प्रवाह हो… Continue reading दिल्ली के आगे क्या होगा?

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