तो सत्य एक, झूठ अनेक!

अब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का ऐलान। प्रधानमंत्री द्वारा एनआरसी की बात को झूठा करार देने के 48 घंटों के भीतर एनआरसी को बनवाने वाले आंकड़ा आधार (mother database) याकि एनपीआर को कैबिनेट ने मंजूरी दे डाली। यों जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी में कनेक्शन नहीं है। एनपीआर के आंकड़े एनआरसी में इस्तेमाल नहीं होंगे। पर इस बात कि पड़ताल करते हुए कोलकाता के द टेलीग्राफ अखबार ने संसद के भीतर मंत्री के जवाब और केंद्रीय गृहमंत्रालय की वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट का जो अंश छापा है तो जैसे प्रधानमंत्री का कहा झूठ माना गया वैसे ही प्रकाश जावडेकर के झूठ परइस अखबार में शीर्षक है कि ‘मंगलवार को हमने क्या सुना और उससे पहले क्या कहा गया था!’ मगर मोदी सरकार के मामले में अब सत्य और झूठ की बहस में नहीं पड़ना चाहिए। तभी हैरानी वाली बात है कि जब दुनिया को नागरिकता संशोधन कानून से मोदी सरकार ने बता दिया है कि मुस्लिम घुसपैठियों, शरणार्थियों, अवैध मुसलमानों का भारत में स्वागत नहीं है, भारत इनकी धर्मशाला नहीं होगा तो फालतू का लाग-लपेट, नाक को इधर-उधर से पकड़ने की एप्रोच व बातें क्यों? मोदी-शाह ने दस तरह से मंशा बताई… Continue reading तो सत्य एक, झूठ अनेक!

तो क्या आधार फेल हो गया?

केंद्र सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में 2021 की जनगणना और उससे पहले राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और दोनों के लिए करीब 12 हजार करोड़ रुपए की मंजूरी भी दे दी है। इसके लिए सरकार ने जो नियम तय किए हैं उसके मुताबिक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में लोगों को आधार देना अनिवार्य नहीं किया गया है।

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