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सुखद खबर! नक्सलियों की कैद से रिहा हुआ जवान, इनकी रही सराहनीय भूमिका

बस्तर। छत्तीसगढ़ से एक बड़ी सुखद खबर है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली और जवानों के बीच मुठभेड़ ( Naxal attack in Chhattisgarh ) के बाद नक्सलियों ने जिस जवान को अगवा ( Kidnapped CoBRA jawan ) कर लिया था उसे वापस रिहा कर दिया है। अगवा जवान राकेश्वर सिंह मनहास 6 दिन बाद रिहा हो गए हैं। जवान की रिहाई के लिए मध्यस्थता कराने गयी दो सदस्यीय टीम ने बस्तर के 7 पत्रकारों को भी नक्सलियों के कब्जे से छुड़ा लिया है। नक्सलियों के बुलावे पर जवान को रिहा कराने बस्तर के बीहड़ में दल समेत कुल 11 सदस्यीय टीम पहुंची थी। बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि टेकलगुडेम मुठभेड़ में बाद नक्सलियों द्वारा अपहृत CoBRA 210वीं वाहिनी के जवान राकेश्वर सिंह मनहास सुरक्षित जिला बीजापुर के थाना तर्रेम पहुंच मनहास का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। राकेश्वर सिंह की रिहाई के बाद उनके परिवार में खुशी की लहर है। उनकी मीनू ने कहा कि ये उनकी जिंदगी का सबसे खुशनुमा दिन है। उन्हें विष्वास था कि उनके पति वापस लौटेंगे। गौरतलब है कि जवान के अगवा होने के बाद उसके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवारजन रिहाई के लिए सरकार से लगातार मांग कर रहे थे।… Continue reading सुखद खबर! नक्सलियों की कैद से रिहा हुआ जवान, इनकी रही सराहनीय भूमिका

पीके की भविष्यवाणी का क्या मतलब?

क्या प्रशांत किशोर की जिह्ना पर सरस्वती विराजमान थीं, जब उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच का अंतर तभी कम हो सकता है, जब अर्धसैनिक बलों के ऊपर हमला हो जाए या ऐसी कोई घटना हो जाए? उन्होंने यह बात कुछ समय पहले देश के सबसे तेज चैनल को दिए इंटरव्यू में कही थी। उनसे पूछा गया था कि क्या वे अब भी इस बात पर कायम हैं कि भाजपा एक सौ का आंकड़ा नहीं पार कर पाएगी? इस पर उन्होंने कहा था कि वे अपनी बात पर कायम हैं, लेकिन एक ही स्थिति में भाजपा की सीटें बढ़ सकती हैं, जब अर्धसैनिक बलों पर हमला हो जाए। यह संयोग है कि तीसरे चरण के मतदान से ठीक पहले छत्तीसगढ़ में माओवादियों के साथ अर्धसैनिक बलों की एक मुठभेड़ हो गई, जिसमें 22 जवान मारे गए औऱ सीआऱपीएफ की कोबरा बटालियन के एक जवान को माओवादियों ने अगवा कर लिया। अब सवाल है कि क्या प्रशांत किशोर भविष्य देख रहे थे या भाजपा के साथ चुनाव रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुके होने की वजह से वे कुछ बातें जानते थे या पिछले कुछ समय से हर चुनाव से पहले होने वाली इस… Continue reading पीके की भविष्यवाणी का क्या मतलब?

सियासत में जकड़ी नजरें

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हमले में 22 सुरक्षाकर्मियों की मौत तुरंत सियासी आरोप- प्रत्यारोप का मुद्दा बन गई। केंद्र में सत्ताधारी भाजपा ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा तो कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया। जबकि हकीकत यह है कि नक्सली समस्या और नक्सलियों की हिंसा के मामले में सबक सीखने के लिए अपने देश की सरकारें तैयार नहीं रही हैं। मसला इसे सामाजिक समस्या मानने से लेकर विशुद्ध कानून व्यवस्था की समस्या माने जाने तक का सफर तय कर चुका है। लेकिन ताजा हमला बताता है कि उससे जमीन पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। गौरतलब है कि 2010 के चिंतलनार नक्सली हमले के बाद से अब तक दंतेवाड़ा-सुकमा-बीजापुर की धुरी में नक्सलियों के हमले में 175 सुरक्षाबलों की जान जा चुकी है। बीते सालों में सैकड़ों आम नागरिक भी अपनी जान गंवा बैठे हैं। ताजा हमले में नक्सलियों ने बड़ी योजना के तहत सुरक्षाबलों को तीन तरफ से घेर कर हमला किया। यह हमला इस साल का अब तक के सबसे बड़ा नक्सली हमला है। हमले में 22 सुरक्षाकर्मी मारे गए और 20 से अधिक घायल हुए। मुठभेड़ पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के 400 सदस्यीय दल और सुरक्षाबलों के बीच बीते… Continue reading सियासत में जकड़ी नजरें

24 जवानों का खून किसके सिर?

साजिश थ्योरी की बात करने वालों की इन बातों को छोड़ें कि आखिर ऐसा कैसे होता है कि हर चुनाव के बीच में या उससे पहले सुरक्षा बलों पर नक्सलियों का या आतंकवादियों का हमला हो जाता है और भाजपा के बड़े बड़े नेता जवानों की शहादत पर वोट मांगने लगते हैं, तब भी यह बड़ा सवाल है कि आखिर छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ प्लान किया गया इतना बड़ा अभियान कैसे विफल हुआ और 24 जवानों का खून किसके सिर होगा? क्या इसे सुरक्षा बलों की विफलता मान कर भूला दिया जाएगा, जैसा कि पहले होता रहा है या किसी की जिम्मेदारी तय होगी? भाजपा के नेता आरोप लगा रहे हैं कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री असम में प्रचार कर रहे थे तो कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि देश के गृह मंत्री केरल में प्रचार कर रहे थे। सवाल है कि अगर नक्सलियों के सबसे बड़े कमांडर को घेर कर मारने के लिए कोई अभियान प्लान किया गया था तो क्या देश के गृह मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री दोनों को इस अभियान में तालमेल के काम की निगरानी नहीं करनी चाहिए थी? सुरक्षा बलों का यह अभियान कोई मामूली अभियान नहीं था। आधुनिक समय के किसी… Continue reading 24 जवानों का खून किसके सिर?

नक्सलियों से कैसे निपटें?

छत्तीसगढ़ के टेकलगुड़ा के जंगलों में 22 जवान मारे गए और दर्जनों घायल हुए। माना जा रहा है कि इस मुठभेड़ में लगभग 20 नक्सली भी मारे गए। यह नक्सलवादी आंदोलन बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से 1967 में शुरु हुआ था। इसके आदि प्रवर्तक चारु मजूमदार, कानू सान्याल और कन्हाई चटर्जी जैसे नौजवान थे। ये कम्युनिस्ट थे लेकिन माओवाद को इन्होंने अपना धर्म बना लिया था। मार्क्स के ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ के आखिरी पेराग्राफ इनका वेदवाक्य बन गया है।ये सशस्त्र क्रांति के द्वारा सत्ता-पलट में विश्वास करते हैं। इसीलिए पहले बंगाल, फिर आंध्र व ओडिशा और फिर झारखंड और मप्र के जंगलों में छिपकर ये हमले बोलते रहे हैं और कुछ जिलों में ये अपनी समानांतर सरकार चलाते हैं। इस समय छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में और देश के लगभग 50 अन्य जिलों में इनका दबदबा है। ये वहां छापामारों को हथियार और प्रशिक्षण देते हैं और लोगों से पैसा भी उगाहते रहते हैं। ये नक्सलवादी छापामार सरकारी भवनों, बसों और नागरिकों पर सीधे हमले भी बोलते रहते हैं। जंगलों में रहने वाले आदिवासियों को भड़का कर ये उनकी सहानुभूति अर्जित कर लेते हैं और उन्हें सब्जबाग दिखा कर अपने गिरोहों में शामिल कर लेते हैं। ये गिरोह इन जंगलों में… Continue reading नक्सलियों से कैसे निपटें?

नक्सलियों के खिलाफ तेज होगी कार्रवाई

जगदलपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है और इसे अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा जिले की सीमा पर शनिवार को नक्सली हमले में 22 जवानों के मारे जाने की घटना के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को बस्तर पहुंचे और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उनके साथ थे। गृह मंत्री सोमवार की सुबह सीमा सुरक्षा बल के विशेष विमान से बस्तर जिले के जगदलपुर पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य की पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। शाह और बघेल ने पुलिस लाइन पहुंच कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। शाह ने जगदलपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के अधिकारियों के साथ बैठक की। गौरतलब है कि त्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर और सुकमा जिले की सीमा पर शनिवार को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बल के 22 जवान शहीद हो गए थे जबकि 31 अन्य… Continue reading नक्सलियों के खिलाफ तेज होगी कार्रवाई

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