अब खतरा आ पहुंचा
नेपाल की त्रासदी का संदेश है कि प्राकृतिक तकाजों को नजरअंदाज करने का समय बीत चुका है। विकास के नाम पर पर्यावरणीय सुरक्षा की बलि देना जारी रहा, तो ऐसी घटनाओं से बचना संभव नहीं रह जाएगा। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, यह चर्चा दशकों पुरानी हो चुकी है। इसके क्या घातक परिणाम होंगे, इसको लेकर वैज्ञानिक चेतावनियां भी आम चर्चा में रही हैं। कई दिन की जांच-पड़ताल के बाद अब यह साफ है कि नेपाल में 26 अगस्त को जो हुआ, वह उन चेतावनियों का ही साकार रूप लेना था। इसीलिए उस रोज हुई ग्लेशियर टूटने...