Nirmala sitaraman

  • मुश्किलें तो मालूम थीं

    अर्थव्यवस्था का संकट बढ़ रहा है। दरअसल, जड़ कमजोर हो, तो आंधी अधिक भयानक मालूम पड़ने लगती है। यही भारत की मौजूदा हकीकत है। लेकिन ऐसा नहीं है कि अर्थव्यवस्था की मूलभूत समस्याएं भारत सरकार को मालूम ना रही हों। चिंता की कोई बात ना होने जैसे प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के आश्वासनों के बावजूद हकीकत यही है कि खुद केंद्र गहरी चिंता में है। इसका प्रमाण वित्त मंत्रालय की ताज़ा मासिक समीक्षा रिपोर्ट है। इसमें अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद जोखिमों का साफ-साफ जिक्र किया गया है। स्वीकार किया गया है कि इस महीने आर्थिक गतिविधियां धीमी हुईं। हालांकि इसके...