तो एक साथ चुनाव 2022 में!

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले दिन से यह बात कह रहे हैं कि देश में सारे चुनाव एक साथ होने चाहिए। यहीं बात उन्होंने इस साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर फिर दोहराया।

दक्षिणी राज्यों को मनाना आसान नहीं होगा

अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सारे चुनाव एक साथ कराने की पहल करते हैं तो विपक्षी पार्टियों को इसके लिए तैयार करना आसान नहीं होगा। खास कर दक्षिण भारत की पार्टियों को, जो अपने किसी तरह से राष्ट्रीय चुनाव से अलग रखने का प्रयास करती हैं।

एक प्रस्ताव दो चरण में चुनाव का है

केंद्र सरकार चाहे तो इस प्रस्ताव पर अमल कर सकती है। अगर प्रधानमंत्री पूरे देश का चुनाव एक साथ कराना चाहते हैं तो उन्हें इस प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए कि सारे चुनाव दो चरण में हों।

सारे चुनाव एक साथः बहस चले

संविधान-दिवस पर यह मांग फिर उठी है कि देश में सारे चुनाव एक साथ करवाएं जाएं। 1952 से 1967 तक यही होता रहा। विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ होते रहे।