बहस तो अधूरी ही रह गई
संसद के मानसून सत्र का इंतजार सबको था। इंतजार इसलिए था क्योंकि सरकार ने पहलगाम कांड और ऑपेरशन सिंदूर के बाद विशेष सत्र बुलाने की विपक्ष की अपील पर ध्यान नहीं दिया था। संसद में खड़े होकर विपक्ष को जवाब देने और देश के नागरिकों को इसकी सचाई बताने की बजाय सरकार दुनिया भर के देशों में डेलिगेशन भेज कर उनके सामने अपना पक्ष रख रही थी। तभी जब मानसून सत्र की शुरुआत हुई और यह तय हुआ कि दूसरे हफ्ते के पहले दिन यानी सोमवार, 28 जुलाई को पहलगाम कांड व ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा शुरू होगी तो उम्मीद...