भुगतान संतुलन का संकट
पिछले वित्त वर्ष में सिर्फ एक महीना युद्ध से प्रभावित था। बाकी समय जो हुआ, उससे साफ है कि समस्या की जड़ें निवेश के नए ट्रेंड और भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के घटते भरोसे से है। डॉलर बचाने के लिए सरकारी हलकों में क्यों इतनी बेचैनी फैली है, इसका राज़ भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में भारत का भुगतान संतुलन 30.8 बिलियन डॉलर घाटे में रहा। सरल भाषा में इसका अर्थ है कि गुजरे वित्त वर्ष में भारत में जितना डॉलर आया, उससे 30.8 बिलियन अधिक डॉलर बाहर गया। ऐसा पूंजीगत खाते...