Protests

  • आंदोलम, प्रदर्शनों में सरकार की क्या ज़िम्मेदारी?

    सीजेपी आंदोलन ने साबित कर दिया कि जेन-ज़ी अब सिर्फ रील्स नहीं बनाता, वह प्रतिरोध भी करता है। लोकतंत्र में प्रदर्शन अपरिहार्य हैं। प्रशासन की सफलता इस बात में है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की रक्षा करे और असामाजिक तत्वों को अलग करे। अगर सरकार संवाद, पारदर्शिता और सुधार का रास्ता अपनाती है तो प्रदर्शन सहयोग का माध्यम बन सकते हैं। अन्यथा, असंतोष की आग और भड़केगी। लोकतंत्र में प्रदर्शन केवल विरोध का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ को सत्ता तक पहुँचाने का संवैधानिक अधिकार है। भारत का संविधान अनुच्छेद 19(1)(ए) और (बी) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और...

  • कश्मीर में सियासी मुद्दा

    29 सितंबर को जम्मू कश्मीर में तीसरे और आखिरी चरण के मतदान के लिए प्रचार का आखिरी दिन था। लेकिन कश्मीर के अनेक नेताओं ने नसरल्लाह के लिए शोक मनाने का फैसला किया। पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती प्रचार के आखिरी दिन प्रचार करने नहीं निकलीं और उन्होंने नसरल्लाह को शहीद बताया। श्रीनगर से फारूक अब्दुल्ला की पार्टी के सांसद आगा रूहुला मेहदी ने भी नसरल्लाह के मारे जाने को महान शहादत बताया। रविवार, 29 सितंबर को श्रीनगर और बडगाम दोनों जगह बड़ा प्रदर्शन हुआ। बड़ी संख्या में कश्मीरी मुस्लिम नसरल्लाह के पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन...