शेम, शेम के नारों के बीच गोगोई ने ली शपथ

विपक्षी सदस्यों के शोर शराबे के बीच भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली।

अमरिंदर ने उठाये राज्यसभा में गोगोई को मनोनीत किये जाने पर सवाल

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई को राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किये जाने पर बृहस्पतिवार को सवाल उठाते हुए

गोगोई की नियुक्तिः मर्यादा-भंग

भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को सेवा-निवृत्त हुए अभी चार महिने भी नहीं बीते कि उन्हें राज्यसभा में नामजद कर दिया गया। राष्ट्रपति द्वारा नामजद किए जानेवाले 12 लोगों में से वे एक हैं। ऐसा नहीं है कि गोगोई के पहले कोई न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायाधीश सांसद नहीं बने हैं, वे बने हैं लेकिन गोगोई ऐसे पहले सर्वोच्च न्यायाधीश हैं, जो राष्ट्रपति की नामजदगी से राज्यसभा के सदस्य बननेवाले हैं और वह भी सेवा-निवृत्त होने के चार माह के अंदर ही ! इस नियुक्ति से न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधानपालिका- सरकार के इन तीनों अंगों की प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। मेरा सबसे पहले प्रश्न खुद श्री गोगोई से है। वे न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर रहे हैं। वह देश में एक मात्र पद है। उसके मुकाबले कोई दूसरा पद नहीं है। लेकिन राज्यसभा के लगभग ढाई सौ सदस्य हैं। उस सर्वोच्च पद पर बैठने के बाद अब वे ढाई सौ की इस रेवड़ में क्यों शामिल हो रहे हैं ? क्या उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता स्वीकार करके अपने आप को काफी नीचे नहीं उतार लिया है ? और जहां तक सदस्यता मिलने का सवाल है, यह नाक रगड़े बिना, गिड़गिड़ाए बिना, भीख का पल्ला फैलाए बिना किसी को… Continue reading गोगोई की नियुक्तिः मर्यादा-भंग

गलत से गलत को सही ठहराने का प्रयास

केंद्र सरकार ने सिफारिश की, राष्ट्रपति ने उसे मंजूरी दी और पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने राज्यसभा का मनोनयन स्वीकार कर लिया। उसके बाद से इसे लेकर देश में विवाद छिड़ा है। बहस चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के कम से कम चार रिटायर जजों ने इसका विरोध किया है और कहा है कि इससे आम लोगों के मन में न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होंगे। एक पूर्व जज ने तो कहा कि इस नियुक्ति के साथ ही आखिरी किला भी ढह गया। ध्यान रहे इस देश के आम लोगों की नजर में न्यायपालिका ही लोकतंत्र का आखिरी किला है, जिससे वे उम्मीद करते हैं और जिस पर भरोसा करते हैं। अब न्यायपालिका के ही लोग कह रहे हैं कि आखिरी किला ढह गया। सरकार, भाजपा और उनके समर्थकों की ओर से इस कदम को न्यायसंगत ठहराने के लिए सिर्फ यह तर्क दिया जा रहा है कि पहले भी ऐसा होता रहा है और कांग्रेस ने भी ऐसा किया है। जस्टिस रंगनाथ मिश्रा को राज्यसभा भेजे जाने की मिसाल दी जा रही है। हालांकि वह तुलना भी सही नहीं है। जस्टिस रंगनाथ मिश्रा जब देश के चीफ जस्टिस थे, उस समय ज्यादातर समय गैर कांग्रेसी सरकार थी… Continue reading गलत से गलत को सही ठहराने का प्रयास

लंबे समय के बाद चीफ जस्टिस को पद मिला

इस बात को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा है कि रिटायर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने राज्यसभा का प्रस्ताव स्वीकार किया। खुद गोगोई ने कहा है कि वे जल्दी ही इस बारे में सबको हकीकत बताएंगे कि उन्होंने क्यों सरकार का यह प्रस्ताव स्वीकार किया।

सदाशिवम के बाद अब गोगोई

भारत में कहा जाता है तुरंत दान, महाकल्याण। तभी ऐसा लग रहा है कि सरकार अपनी पसंद के लोगों को उपकृत करने में देरी नहीं कर रही है। जस्टिस रंजन गोगोई को देश के चीफ जस्टिस पद से रिटायर हुए चार महीने हुए हैं और सरकार ने उनको राज्यसभा में मनोनीत कर दिया।

आस्था गंवाने का वर्ष

भारत 2019 में तब झूमा जब हैदराबाद पुलिस ने बलात्कारियों को एनकाउंटर में मारा। वह अदालतों, सुप्रीम कोर्ट और न्याय व्यवस्था पर भरोसा टूटने का जनता का ऐलान था। दिल्ली में वकीलो के सामने पुलिस के प्रति जनता की हमदर्दी हो या अप्रैल में भारत के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर एक महिला द्वारा उत्पीड़न का आरोप और उस पर चीफ जस्टिस द्वारा बाले-बाले सुनवाई

मोदी ने न्यायमूर्ति गोगोई को अयोध्या फैसले पर नहीं लिखा पत्र : सरकार

सरकार ने आज स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर से संबंधित मामले में फैसला आने के बाद उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई को कोई पत्र नहीं लिखा।

वृहद पीठ निपटाएगी वित्त विधेयक 2017 का मामला

उच्चतम न्यायालय ने वित्त विधेयक 2017 को मनी बिल के रूप में पारित कराए जाने का मामला बुधवार को वृहद पीठ के सुपुर्द कर दिया।

प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय खोजें केंद्र : सुप्रीम कोर्ट

देश, खासकर राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों, में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को हाइड्रोजन आधारित ईंधन के इस्तेमाल की संभावना तलाशने को कहा है।

गोगोई क्या एनएचआरसी में जाएंगे?

भारत के पिछले कई चीफ जस्टिस रिटायर होने के बाद किसी पद पर नियुक्त नहीं किए गए। कई जजों को तो रिटायर होने के बाद किसी संवैधानिक या वैधानिक पद पर नियुक्त कर दिया गया पर पिछले कई सालों से रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस किसी पद पर नियुक्त नहीं किए गए।

बाबरी मस्जिद विध्वंस, कानून का घोर उल्लंघन था : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को कहा कि छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद का विध्वंस कानून का घोर उल्लंघन था।

निर्मोही अखाड़े और सेंट्रल वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज

उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में आज एकमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो प्रमुख पक्षकारों निर्मोही अखाड़े और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की याचिकाओं को खारिज कर दिया

फैसले से सुन्नी वक्फ बोर्ड संतुष्ट नहीं

नई दिल्ली। अयोध्या मामले के प्रमुख पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान व्यक्त करते हुए कहा है कि वे इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और फैसला पढने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। जबकि निर्मोही अखाडा ने फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि अदालत ने पिछले 150 साल से चली आ रही उनकी लड़ाई को स्वीकार किया है और उन्हें मंदिर के निर्माण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा बनाये जाने वाले न्यास में प्रतिनिधित्व दिया है और इसके लिए वह न्यायालय के कृतज्ञ हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ का फैसला आने के बाद शनिवार को यहां न्यायालय परिसर में संवाददाताताओं से कहा कि वह फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन इससे संतुष्ट नहीं हैं। न्यायालय का विस्तृत फैसला पढने के बाद पढने के बाद आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। निर्माेही अखाडे के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के प्रति कृतज्ञ हैं कि उसने उनके संघर्ष को स्वीकार किया और राम मंदिर बनाने के निर्माण के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित किये जाने वाले न्यास में उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया… Continue reading फैसले से सुन्नी वक्फ बोर्ड संतुष्ट नहीं

अयोध्या फैसले के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को किया अलर्ट

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने से पहले अयोध्या मामले के संभावित फैसले के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को सतर्क रहने की हिदायत दी है।

और लोड करें