regulatory agencies

  • लोगों की शोषक, नाकारा नियामक एजेंसियां

    regulatory agencies: भारत में जितनी नियामक एजेंसियां हैं, शायद दुनिया के किसी और देश में उतनी नहीं होंगी। लेकिन इतनी नियामक एजेंसियां मिल कर भी भारत के आम नागरिक या आम उपभोक्ता के हितों की रक्षा नहीं कर पाती हैं। या तो ये नियामक एजेंसियां किसी लायक नहीं हैं यानी उनके पास कोई अधिकार नहीं है या उनकी बातों पर कोई ध्यान नहीं देता है क्योंकि कॉरपोरेट जगत अपने हिसाब से ही चीजों को संचालित करता है या इन नियामक एजेंसियों की ही कॉरपोरेट के साथ मिलीभगत होती है, जिसकी वजह से ये कुछ नहीं कर पाती हैं। भारत के...